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कोरोना से डेढ़ गुनी जान दुर्घटनाओं में गई
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फर्रुखाबाद। सड़क हादसे कोरोना महामारी पर भी भारी पड़ रहे हैं। अब तक कोरोना 197 लोगों की जान पर भारी पड़ा। वहीं, सड़कों पर यातायात नियमों की अनदेखी से हुए हादसों ने 297 लोगों को निगल लिया है।
मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण ने दस्तक दी थी। इससे पहली लहर में 87 लोगों की जान चली गई। दूसरी लहर मार्च 2021 में आई और अप्रैल में इस कदर संक्रमण की भयावहता बढ़ी कि लोगों को जान बचाना मुश्किल हो गया। फिलहाल सरकारी आंकड़ों को देखें तो इसमें 107 लोगों की जान गई। तीसरी लहर जनवरी 2022 से शुरू हुई और अब संक्रमण थम सा चुका है। इस बीच तीन लोगों की जान गई।
अब खूनी सड़कों के हाल बयान करें तो सड़क हादसे महामारी से काफी आगे हैं। जर्जर सड़कें, अंधे मोड़ और युवाओं के जोशीले फर्राटे आए दिन जान पर भारी पड़ रहे हैं। हर वर्ष चलने वाले यातायात माह की जागरूकता भी दुर्घटनाएं रोकने के लिए बेअसर साबित हो रही हैं। यातायात नियमों का पालन कराने के लिए सख्ती न होने से लोग अनजान बने हुए हैं। बाइक चालक हेलमेट नहीं लगाते और कार चालक सीट बेल्ट से वास्ता कम रखते हैं। कोरोना काल में सड़कों पर कई माह सन्नाटा रहने के बावजूद कुल 640 सड़क हादसे हुए। इसमें 297 लोग दुनिया से अलविदा कह गए, जबकि 444 घायल हुए। इससे संक्रमण से सड़क हादसे काफी खतरनाक साबित हो रहे हैं।
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यातायात नियमों का पालन कराने और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर दोगुना जुर्माना कर दिया। इसके बावजूद दुर्घटनाओं की संख्या कम नहीं हुई। सख्ती को देखें तो 30 फीसदी लोग ही हेलमेट व सीट बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग को यातायात नियम तोड़ने में ही अपनी शान समझते हैं।
वर्ष - कुल दुर्घटना - मौत - घायल - कोरोना से मौत
2020 - 304 - 144 - 234 - 87
2021 - 298 - 137 - 188 - 107
2022 - 38 - 16 - 22 - 03
--------------------------------------------------------------------
अब तक - 640 - 297 - 444 - 197
यातायात के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। आम नागरिकों को वाहनों को धीमा व नियमों का पालन कर चलाने के लिए जागरूक भी किया जाएगा। प्रदीप सिंह, सीओ सिटी
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मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण ने दस्तक दी थी। इससे पहली लहर में 87 लोगों की जान चली गई। दूसरी लहर मार्च 2021 में आई और अप्रैल में इस कदर संक्रमण की भयावहता बढ़ी कि लोगों को जान बचाना मुश्किल हो गया। फिलहाल सरकारी आंकड़ों को देखें तो इसमें 107 लोगों की जान गई। तीसरी लहर जनवरी 2022 से शुरू हुई और अब संक्रमण थम सा चुका है। इस बीच तीन लोगों की जान गई।
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अब खूनी सड़कों के हाल बयान करें तो सड़क हादसे महामारी से काफी आगे हैं। जर्जर सड़कें, अंधे मोड़ और युवाओं के जोशीले फर्राटे आए दिन जान पर भारी पड़ रहे हैं। हर वर्ष चलने वाले यातायात माह की जागरूकता भी दुर्घटनाएं रोकने के लिए बेअसर साबित हो रही हैं। यातायात नियमों का पालन कराने के लिए सख्ती न होने से लोग अनजान बने हुए हैं। बाइक चालक हेलमेट नहीं लगाते और कार चालक सीट बेल्ट से वास्ता कम रखते हैं। कोरोना काल में सड़कों पर कई माह सन्नाटा रहने के बावजूद कुल 640 सड़क हादसे हुए। इसमें 297 लोग दुनिया से अलविदा कह गए, जबकि 444 घायल हुए। इससे संक्रमण से सड़क हादसे काफी खतरनाक साबित हो रहे हैं।
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यातायात नियमों का पालन कराने और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर दोगुना जुर्माना कर दिया। इसके बावजूद दुर्घटनाओं की संख्या कम नहीं हुई। सख्ती को देखें तो 30 फीसदी लोग ही हेलमेट व सीट बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग को यातायात नियम तोड़ने में ही अपनी शान समझते हैं।
वर्ष - कुल दुर्घटना - मौत - घायल - कोरोना से मौत
2020 - 304 - 144 - 234 - 87
2021 - 298 - 137 - 188 - 107
2022 - 38 - 16 - 22 - 03
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अब तक - 640 - 297 - 444 - 197
यातायात के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। आम नागरिकों को वाहनों को धीमा व नियमों का पालन कर चलाने के लिए जागरूक भी किया जाएगा। प्रदीप सिंह, सीओ सिटी