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सावन आते ही सजी कांवर की दुकानें
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Fri, 31 Jul 2015 10:49 PM IST
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सावन का महीना शुरू हो गया है। गंगा किनारे पांचाल घाट पर कांवर की दुकानें
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सजने गई हैं। बढ़ती महंगाई और घटते मुनाफे से कांवर दुकानदारों के लिए
परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। सावन के महीने में भगवान शिव को कांवर
चढ़ाने के लिए हजारों भक्त पांचाल घाट गंगा तट से जल भरते हैं। यहां से वह
शिव मंदिरों के लिए यात्रा शुरू करते हैं। घाट पर
दुकानदार भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद मोक्ष की कामना करने वालों से रोजी रोटी का जुगाड़ करने में जुट गए हैं। कांवर बनाने वाले दुकानदार बताते हैं कि कांवर बनाने केे लिए एक महीने पहले से सामान जुटाना शुरू करते हैं। इसके बाद सावन के महीने में कांवर बनाने का काम शुरू हो पाता है। पांचाल घाट पर करीब 20 दुकानदार कांवर बनाने
का धंधा कर रहे हैं। बंधे पर कांवर बनाकर बेंचने वाले राजेश का कहना है कि वह वर्षों से कांवर बेंच रहे हैं। पहले कांवर चढ़ाने का भक्तों में क्रेज कम था। अब तो हर कोई कांवर चढ़ाना चाहता है। बताते हैं कि रोज करीब 20 से 30 कांवर बेच लेते हैं। महंगाई को लेकर कहते हैं कि पहले जो कांवर 50-60 रुपये में तैयार होती थी, उसमें अब करीब 90 रुपये लग रहे
हैं। साधारण कांवर की कीमत 100 रुपये है। ज्यादा फैंसी सजावट और लाइटिंग लगी कांवर 500 रुपये की है। कांवर बनाने के लिए बांस तो शहर की मंडी से मिल जाता, सजावट का सामान दिल्ली, घंटी और भगवान की तस्वीरों के लिए सोरों, कांवरियों के लिए कपड़े और गंगाजल भरने के लिए प्लास्टिक की केन कानपुर से मंगवाई जाती हैं।
दुकानदार धर्मेंद्र, मंगूलाल, बबलू, सुरेश का कहना है कि बंधा पर एक महीने के लिए दुकानें लगाने के लिए मकान मालिक 6 से 7 हजार रुपए किराया वसूलते हैं। इसके बाद मेला समिति के लोग वसूली करते हैं। लाइट के लिए 1500 से 2000 रुपये अलग से खर्च हो जाते हैं। मौसम खुला रहने पर तो दुकानदारी ठीक हो जाती है। बरसात होने पर हाथ पर हाथ
रखकर बैठना पड़ता है। दुकानदार कहते हैं कि कांवर बनाने के लिए घर के एक दो सदस्यों को छोड़कर बाकी सभी इस काम में दिन रात जुटे रहते हैं।
बंधा रोड पर दुकानों से लगता जाम
बंधा किनारे लगने वाली कांवर की दुकानों से सड़क पर जाम की स्थिति बनी रहती है। सोमवार को मेले में उमडने वाली भीड़ से भीषण जाम लग जाता। दुकानदार बनी हुई कांवरों को सड़क किनारे रखकर पूरे फुटपाथ कब्जा कर लेते हैं। इससे स्नानार्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
दुकानदार भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद मोक्ष की कामना करने वालों से रोजी रोटी का जुगाड़ करने में जुट गए हैं। कांवर बनाने वाले दुकानदार बताते हैं कि कांवर बनाने केे लिए एक महीने पहले से सामान जुटाना शुरू करते हैं। इसके बाद सावन के महीने में कांवर बनाने का काम शुरू हो पाता है। पांचाल घाट पर करीब 20 दुकानदार कांवर बनाने
का धंधा कर रहे हैं। बंधे पर कांवर बनाकर बेंचने वाले राजेश का कहना है कि वह वर्षों से कांवर बेंच रहे हैं। पहले कांवर चढ़ाने का भक्तों में क्रेज कम था। अब तो हर कोई कांवर चढ़ाना चाहता है। बताते हैं कि रोज करीब 20 से 30 कांवर बेच लेते हैं। महंगाई को लेकर कहते हैं कि पहले जो कांवर 50-60 रुपये में तैयार होती थी, उसमें अब करीब 90 रुपये लग रहे
हैं। साधारण कांवर की कीमत 100 रुपये है। ज्यादा फैंसी सजावट और लाइटिंग लगी कांवर 500 रुपये की है। कांवर बनाने के लिए बांस तो शहर की मंडी से मिल जाता, सजावट का सामान दिल्ली, घंटी और भगवान की तस्वीरों के लिए सोरों, कांवरियों के लिए कपड़े और गंगाजल भरने के लिए प्लास्टिक की केन कानपुर से मंगवाई जाती हैं।
दुकानदार धर्मेंद्र, मंगूलाल, बबलू, सुरेश का कहना है कि बंधा पर एक महीने के लिए दुकानें लगाने के लिए मकान मालिक 6 से 7 हजार रुपए किराया वसूलते हैं। इसके बाद मेला समिति के लोग वसूली करते हैं। लाइट के लिए 1500 से 2000 रुपये अलग से खर्च हो जाते हैं। मौसम खुला रहने पर तो दुकानदारी ठीक हो जाती है। बरसात होने पर हाथ पर हाथ
रखकर बैठना पड़ता है। दुकानदार कहते हैं कि कांवर बनाने के लिए घर के एक दो सदस्यों को छोड़कर बाकी सभी इस काम में दिन रात जुटे रहते हैं।
बंधा रोड पर दुकानों से लगता जाम
बंधा किनारे लगने वाली कांवर की दुकानों से सड़क पर जाम की स्थिति बनी रहती है। सोमवार को मेले में उमडने वाली भीड़ से भीषण जाम लग जाता। दुकानदार बनी हुई कांवरों को सड़क किनारे रखकर पूरे फुटपाथ कब्जा कर लेते हैं। इससे स्नानार्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।