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कट गए संपर्क मार्ग, बढ़ने लगी परेशानी
Updated Mon, 03 Sep 2018 10:57 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
अमृतपुर/शमसाबाद (फर्रुखाबाद)। गंगा और रामगंगा की बाढ़ से संपर्क मार्ग कटने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ने लगी है। ग्रामीणों के आगे खाने-पीने का संकट बढ़ गया है। कई गांवों में तो अभी तक राहत सामग्री नहीं बंटी है।
गंगा की बाढ़ से सिया, खुटिया, कुंवरपुरा, मिश्रनपुरवा, कोला ईमादपुर, और कड़हर गांव में पानी तो पहले से ही भरा था। अब इनके संपर्क मार्ग भी कट गए हैं। ईमादपुर मार्ग पर करीब चार फीट पानी बह रहा है। रामगंगा से अमैयापुर, गहलार, खाकिन, कोलासोता, सिकंदरपुर, चबिया, मौलिया, मोकुलपुर और अलादपुर भटौली में घरों के अंदर पानी घुस गया है। इसके चलते ग्रामीण छतों और चारपाई आदि पर भोजन बनाने को मजबूर हैं। आशा की मड़ैया के रामरहीस, मनीष कुमार, अनंतराम, नन्हें, गोविंद और गुड्डू आदि ने राहत सामग्री न मिलने पर लेखपाल के खिलाफ विरोध जताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि 100 बाढ़ पीड़ितों में से 60 को ही अभी तक राहत सामग्री मिली है। इसकी शिकायत वह डीएम से भी करेंगे। रामपुर के रहने वाले राजपाल, जुगेंद्र और केदारनाथ आदि का कहना था कि डीएम ने पांच-पांच लीटर केरोसिन देने के आदेश दिए थे लेकिन दो-दो लीटर ही केरोसिन दिया गया है। चपरा, हीरानगर, रूलापुर, गुड़ेरा और भावन के रहने वाले मिथलेश कुमार, श्यामसुंदर, पुत्तूलाल, रामसिंह, रामरईस और विजेंद्र आदि का कहना है कि उन लोगों को अभी तक राहत सामग्री नहीं मिली है। अफसर भी हालचाल लेने नहीं आए हैं।
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शमसाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, गुटैटी दक्षिण, फरीदपुर, जैतपुर, फुलहा, मंझा और रूपपुर मंगलीपुर आदि गांवों में गंगा की बाढ़ से संपर्क मार्ग कट गए हैं। इन गांवों में नाव के सहारे ग्रामीण आवागमन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चारों ओर पानी भरा होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एडीएम मनोज सिंघल ने नाव से बाढ़ प्रभावित गांव कटरी तौफीक का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि चिलसरा स्थित मंडी समिति में बाढ़ शरणालय बनाया गया है। बाढ़ पीड़ित वहां जाकर रहें। उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम भी किया गया है लेकिन बाढ़ पीड़ितों ने जाने से इनकार कर दिया। एडीएम ने तहसीलदार कायमगंज गजेंद्र सिंह को राहत सामग्री बंटवाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर एसडीएम कायमगंज अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।
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अमृतपुर/शमसाबाद (फर्रुखाबाद)। गंगा और रामगंगा की बाढ़ से संपर्क मार्ग कटने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ने लगी है। ग्रामीणों के आगे खाने-पीने का संकट बढ़ गया है। कई गांवों में तो अभी तक राहत सामग्री नहीं बंटी है।
गंगा की बाढ़ से सिया, खुटिया, कुंवरपुरा, मिश्रनपुरवा, कोला ईमादपुर, और कड़हर गांव में पानी तो पहले से ही भरा था। अब इनके संपर्क मार्ग भी कट गए हैं। ईमादपुर मार्ग पर करीब चार फीट पानी बह रहा है। रामगंगा से अमैयापुर, गहलार, खाकिन, कोलासोता, सिकंदरपुर, चबिया, मौलिया, मोकुलपुर और अलादपुर भटौली में घरों के अंदर पानी घुस गया है। इसके चलते ग्रामीण छतों और चारपाई आदि पर भोजन बनाने को मजबूर हैं। आशा की मड़ैया के रामरहीस, मनीष कुमार, अनंतराम, नन्हें, गोविंद और गुड्डू आदि ने राहत सामग्री न मिलने पर लेखपाल के खिलाफ विरोध जताया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि 100 बाढ़ पीड़ितों में से 60 को ही अभी तक राहत सामग्री मिली है। इसकी शिकायत वह डीएम से भी करेंगे। रामपुर के रहने वाले राजपाल, जुगेंद्र और केदारनाथ आदि का कहना था कि डीएम ने पांच-पांच लीटर केरोसिन देने के आदेश दिए थे लेकिन दो-दो लीटर ही केरोसिन दिया गया है। चपरा, हीरानगर, रूलापुर, गुड़ेरा और भावन के रहने वाले मिथलेश कुमार, श्यामसुंदर, पुत्तूलाल, रामसिंह, रामरईस और विजेंद्र आदि का कहना है कि उन लोगों को अभी तक राहत सामग्री नहीं मिली है। अफसर भी हालचाल लेने नहीं आए हैं।
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शमसाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, गुटैटी दक्षिण, फरीदपुर, जैतपुर, फुलहा, मंझा और रूपपुर मंगलीपुर आदि गांवों में गंगा की बाढ़ से संपर्क मार्ग कट गए हैं। इन गांवों में नाव के सहारे ग्रामीण आवागमन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चारों ओर पानी भरा होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एडीएम मनोज सिंघल ने नाव से बाढ़ प्रभावित गांव कटरी तौफीक का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि चिलसरा स्थित मंडी समिति में बाढ़ शरणालय बनाया गया है। बाढ़ पीड़ित वहां जाकर रहें। उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम भी किया गया है लेकिन बाढ़ पीड़ितों ने जाने से इनकार कर दिया। एडीएम ने तहसीलदार कायमगंज गजेंद्र सिंह को राहत सामग्री बंटवाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर एसडीएम कायमगंज अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।