{"_id":"5c8d3744bdec22140f075814","slug":"11552758596-farrukhabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो माह में भी पूरा न हो सका गोसदनों का निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो माह में भी पूरा न हो सका गोसदनों का निर्माण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री ने अन्ना पशुओं से अन्नदाताओं व राहगीरों को निजात के लिए इनकी धरपकड़ करने का फरमान जारी किया। इसके लिए जनपद में 26 गोसदनों स्वीकृति के साथ का इनका शीघ्र ही निर्माण कराया जाना था। दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकतर गोसदनों का निर्माण अधूरा है। तैयार चार गोसदनों में महज 70 गोवंश ही बंद किए जा सके। धरपकड़ अभियान भी ठंडा पड़ गया। इससे अन्ना मवेशियों से लोग परेशान हैं।
मुख्यमंत्री के फरमान के बाद 10 जनवरी को जिले में 26 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल स्वीकृत किए गए। इन गोसदनों का मनरेगा, जिला पंचायत आदि विभागों के सहयोग से निर्माण कराया जाना है। उद्देश्य है कि निराश्रित गोवंश को आश्रय मिल जाएगा। इनकी बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण, भरण-पोषण, गोवंश से उत्पादित दूूध, गोबर, कंपोस्ट आदि के विक्रय व्यवस्था से आश्रय स्थल को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ लोगों को निराश्रित गोवंश की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए सभी सात ब्लाकों में नवाबगंज में दो, जबकि अन्य में चार-चार आश्रय स्थल बनने हैं।
आदेश के दो माह बीतने के बाद 26 में मात्र चार आश्रय स्थल ही तैयार हो सके। इनमें राजेपुर ब्लाक के भाऊपुर चौरासी में स्वीकृत आश्रय स्थल का निर्माण शुरू तक नहीं हो सका।
विज्ञापन
मनरेगा के एपीओ गौरव सिंह ने बताया कि इस आश्रय स्थल का निर्माण ग्राम पंचायत से कराया जाना है। प्रधान व सेक्रेटरी के रुचि न लेने से अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। शेष आश्रय स्थलों में मनरेगा का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि तैयार चार आश्रय स्थलों में याकूतगंज में 12, सरह में 16, रम्पुरा में 50 सहित करीब 90 मवेशी बंद किए जा चुके हैं। अन्य आश्रय स्थलों में कुछ कार्य शेष रह गया। कार्य पूर्ण होने पर उनमें मवेशी बंद किए जाएंगे। शीघ्र ही कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री के फरमान के बाद 10 जनवरी को जिले में 26 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल स्वीकृत किए गए। इन गोसदनों का मनरेगा, जिला पंचायत आदि विभागों के सहयोग से निर्माण कराया जाना है। उद्देश्य है कि निराश्रित गोवंश को आश्रय मिल जाएगा। इनकी बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण, भरण-पोषण, गोवंश से उत्पादित दूूध, गोबर, कंपोस्ट आदि के विक्रय व्यवस्था से आश्रय स्थल को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ लोगों को निराश्रित गोवंश की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए सभी सात ब्लाकों में नवाबगंज में दो, जबकि अन्य में चार-चार आश्रय स्थल बनने हैं।
विज्ञापन
आदेश के दो माह बीतने के बाद 26 में मात्र चार आश्रय स्थल ही तैयार हो सके। इनमें राजेपुर ब्लाक के भाऊपुर चौरासी में स्वीकृत आश्रय स्थल का निर्माण शुरू तक नहीं हो सका।
विज्ञापन
मनरेगा के एपीओ गौरव सिंह ने बताया कि इस आश्रय स्थल का निर्माण ग्राम पंचायत से कराया जाना है। प्रधान व सेक्रेटरी के रुचि न लेने से अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। शेष आश्रय स्थलों में मनरेगा का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि तैयार चार आश्रय स्थलों में याकूतगंज में 12, सरह में 16, रम्पुरा में 50 सहित करीब 90 मवेशी बंद किए जा चुके हैं। अन्य आश्रय स्थलों में कुछ कार्य शेष रह गया। कार्य पूर्ण होने पर उनमें मवेशी बंद किए जाएंगे। शीघ्र ही कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।