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उमस के आगे बारिश भी बेदम
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Fri, 07 Aug 2015 10:59 PM IST
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शुक्रवार को दोपहर के बाद अचानक मौसम बदला और पानी भी गिरा, लेकिन उमस के आगे यह बारिश बेदम साबित हुई। रिकार्ड के अनुसार 31 मिलीमीटर बारिश हुई लेकिन इससे उमस बढ़ गई है।
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हालांकि इससे धान किसानों को जरूर कुछ राहत मिली है। गुजरे महीने की शुरुआत में महज हफ्ते भर में करीब 100 मिलीमीटर पानी गिरा। इससे धान की रोपाई की राह तक रहे किसानों को काफी उम्मीदें बंध गई थी, लेकिन दूसरे पखवाड़े में मानसून के गच्चा दे जाने से उनके माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी है।
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जुलाई के बाद अगस्त में भी अच्छी शुरुआत नहीं हुई है। शुरुआती सप्ताह सूखा निकल गया, जिसने गर्मी में बेतहाशा वृद्धि कर दी। दरअसल किसानों को इस समय पानी की बेहद जरूरत बनी हुई है। धान की रोपाई और बाजरा समेत अन्य दलहनी फसलों की बुआई होनी है।
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शुक्रवार की सुबह भी उमस का कहर जारी था तभी दोपहर करीब एक बजे अचानक बादलों से पानी बरसने लगा। बमुश्किल आधा घंटे की बारिश हुई। इसके करीब दो घंटे के अंतराल पर अपराह्न में फिर से 10 मिनट के लिए बादल गरजे और बरस कर चले गए। सरकारी आंकड़े के अनुसार शहर में शुक्रवार को 31 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई।
पानी गिरने से अधिकतम तापमान में भी गिरावट आई। शुक्रवार सुबह यह 35.6 डिग्री सेल्सियस रहा और शाम को घटकर 30 डिग्री सेल्सियस रह गया। हालांकि न्यूनतम तापमान में मामूली कमी रही।
यह 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। नमी में बढ़ोत्तरी होने से उमस में इजाफा हुआ। बारिश से जन सामान्य को राहत तो नहीं मिली, लेकिन कुछ जगहों पर जलभराव होने से लोगों की परेशानियां अवश्य बढ़ गई।
कचहरी के सामने इटावा-सैफई मार्ग का फुटपाथ बरसाती पानी में जलमगभन रहा। लाइनपार क्षेत्र के विजयनगर, रामनगर की कई गलियाें में पानी का जमाव हो गया। शहर की सड़कों पर कीचड़ के चलते चलना मुश्किल रहा।
मालूम हो कि शहर के तमाम मार्ग पानी की पाइप लाइन बिछाए जाने से खुदे पड़े हैं। इनमें मिट्टी निकाल कर गिट्टी डाली जा रही है। बरसात से यह मिट्टी कीचड़ में बदल गई। इससे लोगों को फिसलने का डर बना रहा।