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अंशुल यादव का दोबारा जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तय
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इटावा। सपा सुप्रीमो और पूर्व सीएम अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव उर्फ अंशुल का लगातार दूसरी बार निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुना जाना तय हो गया है। अंशुल लगातार दूसरी बार जिला पंचायत की कुर्सी पर बैठकर जिले के पहले नागरिक बनेंगे। शनिवार को नामांकन वाले दिन अध्यक्ष पद पर सिर्फ एक ही नामांकन दाखिल हुआ। दोपहर लगभग डेढ़ बजे अंशुल यादव, सपा जिला अध्यक्ष गोपाल यादव, पूर्व चेयरमैन कुलदीप गुप्ता संटू, फुरकान अहमद सहित सदस्यों के साथ नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचे। उन्होंने चार सेटों में जिला अधिकारी श्रुति सिंह के समक्ष नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। निर्धारित अवधि तक कोई दूसरा नामांकन नहीं हुआ।
दो मई को घोषित चुनाव परिणामों के बाद ही बाजी सपा के हाथ आ गई थी। 24 जिला पंचायत सदस्यों के सदन में सपा और प्रसपा ने 20 सीटों पर कब्जा कर लिया। भाजपा जो दूसरी बड़ी दावेदार पार्टी थी उसका केवल एक सदस्य ही चुनाव जीत सका। एक पर बसपा और बाकी दो पर निर्दलीय जीते। भाजपा प्रस्ताव और समर्थक नहीं जुटा सकी।
इससे पहले तीन दिनों तक नामांकन पत्रों की बिक्री हुई थी। इस दौरान सिर्फ अभिषेक यादव ने नामांकन पत्रों के चार सेट खरीदे थे। नामांकन पत्रों का यह चारों सेट शनिवार की दोपहर को अभिषेक यादव ने दाखिल किए। उनके अलावा किसी अन्य ने नामांकन नहीं खरीदा। निर्विरोध चुना जाना तय होने का उत्साह सपा प्रत्याशी अभिषेक यादव अंशुल तथा उनके समर्थकों के चेहरों पर साफ दिखाई दिया।
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मां और बेटा दो बार बने अध्यक्ष
इटावा। इटावा जिला पंचायत में एक और रिकार्ड कायम हुआ है। जब मां के बाद पुत्र दोबारा जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे। अंशुल यादव की मां प्रेमलता यादव दो बार अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके बाद यह कुर्सी अंशुल ने संभाली। अब वे दूसरी बार अध्यक्ष बनने जा रहे हैं।
89 से है सपा का कब्जा
इटावा। जिला पंचायत का गठन होने के बाद 1989 से अध्यक्ष पद पर सपा का ही कब्जा रहा है। वर्ष 1989 में सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव अध्यक्ष चुने गए। 94 में पूर्व सांसद राम सिंह शाक्य, 96 में शिवपाल सिंह यादव, इसी साल महेंद्र सिंह राजपूत, 2000 में प्रेमदास कठेरिया, 2006 और 2011 में प्रेमलता यादव और 2016 में अभिषेक यादव अध्यक्ष चुने गए।
बिना लड़े ही मैदान से बाहर हुई भाजपा
इटावा। जिला पंचायत के चुनाव परिणाम भाजपा के लिए काफी निराशाजनक रहे। सांसद और दो-दो विधायक होने के बाद भी भाजपा सिर्फ एक ही जिला पंचायत सदस्य जिता सकी। अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा बिना चुनाव लड़े ही मैदान से बाहर हो गई। चुुनाव से पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होने का दंभ भरने वाले भाजपाई कहीं दिखाई नहीं दिए।
सपा प्रसपा की रणनीति ने किया कमाल
इटावा। समाजवादी परिवार में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के नाम पर हुआ एका आखिर कामयाब रहा। प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने पहले ही अंशुल को अध्यक्ष बनने का आशीर्वाद दे दिया था। सपा और प्रसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। जिसकी वजह से वोटों का बिखराव नहीं हो सका। जिसका पूरा लाभ सपा को मिला। भाजपा की रणनीति यहीं फेल हो गई।
प्रसपा नेता ही बने प्रस्तावक
इटावा। अंशुल यादव ने नामांकन पत्र चार सेटों में दाखिल किया। पहले सेट में उनके प्रस्तावक प्रसपा के सैफई से निर्वाचित सदस्य डॉ. अरविंद यादव बने। सतेंद्र यादव समर्थक रहे। इसी तरह से दूसरे सेट में पंकज यादव, प्रेमसागर, तीसरे सेट में गीतम पाल और शैलेश देवी, चौथे सेट में अंजू और निर्मला बघेल क्रमश: प्रस्तावक और समर्थक बने।
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दो मई को घोषित चुनाव परिणामों के बाद ही बाजी सपा के हाथ आ गई थी। 24 जिला पंचायत सदस्यों के सदन में सपा और प्रसपा ने 20 सीटों पर कब्जा कर लिया। भाजपा जो दूसरी बड़ी दावेदार पार्टी थी उसका केवल एक सदस्य ही चुनाव जीत सका। एक पर बसपा और बाकी दो पर निर्दलीय जीते। भाजपा प्रस्ताव और समर्थक नहीं जुटा सकी।
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इससे पहले तीन दिनों तक नामांकन पत्रों की बिक्री हुई थी। इस दौरान सिर्फ अभिषेक यादव ने नामांकन पत्रों के चार सेट खरीदे थे। नामांकन पत्रों का यह चारों सेट शनिवार की दोपहर को अभिषेक यादव ने दाखिल किए। उनके अलावा किसी अन्य ने नामांकन नहीं खरीदा। निर्विरोध चुना जाना तय होने का उत्साह सपा प्रत्याशी अभिषेक यादव अंशुल तथा उनके समर्थकों के चेहरों पर साफ दिखाई दिया।
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मां और बेटा दो बार बने अध्यक्ष
इटावा। इटावा जिला पंचायत में एक और रिकार्ड कायम हुआ है। जब मां के बाद पुत्र दोबारा जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे। अंशुल यादव की मां प्रेमलता यादव दो बार अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके बाद यह कुर्सी अंशुल ने संभाली। अब वे दूसरी बार अध्यक्ष बनने जा रहे हैं।
89 से है सपा का कब्जा
इटावा। जिला पंचायत का गठन होने के बाद 1989 से अध्यक्ष पद पर सपा का ही कब्जा रहा है। वर्ष 1989 में सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव अध्यक्ष चुने गए। 94 में पूर्व सांसद राम सिंह शाक्य, 96 में शिवपाल सिंह यादव, इसी साल महेंद्र सिंह राजपूत, 2000 में प्रेमदास कठेरिया, 2006 और 2011 में प्रेमलता यादव और 2016 में अभिषेक यादव अध्यक्ष चुने गए।
बिना लड़े ही मैदान से बाहर हुई भाजपा
इटावा। जिला पंचायत के चुनाव परिणाम भाजपा के लिए काफी निराशाजनक रहे। सांसद और दो-दो विधायक होने के बाद भी भाजपा सिर्फ एक ही जिला पंचायत सदस्य जिता सकी। अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा बिना चुनाव लड़े ही मैदान से बाहर हो गई। चुुनाव से पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होने का दंभ भरने वाले भाजपाई कहीं दिखाई नहीं दिए।
सपा प्रसपा की रणनीति ने किया कमाल
इटावा। समाजवादी परिवार में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के नाम पर हुआ एका आखिर कामयाब रहा। प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने पहले ही अंशुल को अध्यक्ष बनने का आशीर्वाद दे दिया था। सपा और प्रसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। जिसकी वजह से वोटों का बिखराव नहीं हो सका। जिसका पूरा लाभ सपा को मिला। भाजपा की रणनीति यहीं फेल हो गई।
प्रसपा नेता ही बने प्रस्तावक
इटावा। अंशुल यादव ने नामांकन पत्र चार सेटों में दाखिल किया। पहले सेट में उनके प्रस्तावक प्रसपा के सैफई से निर्वाचित सदस्य डॉ. अरविंद यादव बने। सतेंद्र यादव समर्थक रहे। इसी तरह से दूसरे सेट में पंकज यादव, प्रेमसागर, तीसरे सेट में गीतम पाल और शैलेश देवी, चौथे सेट में अंजू और निर्मला बघेल क्रमश: प्रस्तावक और समर्थक बने।