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पैसे के लालच में ताऊ ने ही कराया था अगवा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Mon, 26 Jan 2015 01:10 AM IST
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जसवंत नगर में बच्चे का अपहरण फिर हत्या और हाइवे पर दिनभर बवाल के बाद रविवार की शाम को एसएसपी डॉ. राकेश सिंह ने पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर थाना पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को सही बताया। एसएसपी ने कहा कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी बच्चे का ताऊ आदेशबाबू है।
एसएसपी ने बताया कि शुक्रवार को पिता अरविंद शाक्य ने बेटे के गायब होने और फिर फिरौती मांगे जाने की सूचना पुलिस को दी थी। उन्होंने पुलिस को वह नंबर भी बताया जिससे फिरौती मांगी गई। छानबीन की गई तो पुलिस एक आरोपी तक पहुंच गई।
पुलिस ने गांव के ही हरिओम उर्फ विष्णु पुत्र रामकिशोर को गिरफ्तार किया। पूछताछ की गई तो पता चला कि पूरी साजिश का मुखिया बच्चे का ताऊ आदेशबाबू है। पुलिस ने शनिवार की रात घूरे में दबाया गया देवांशू का शव भी बरामद कर लिया। एसएसपी ने बताया कि परिजन भले ही ताऊ को दोषी न मानें, लेकिन पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं।
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जिस सिमकार्ड का प्रयोग फिरौती मांगने के लिए किया गया उसका इस्तेमाल हरिओम और आदेशबाबू के बीच बातचीत में हुआ था। आदेशबाबू अवैध रूप से शराब बेंचने का काम करता है। उसी ने रुपये के लालच में अपहरण जैसी वारदात की साजिश रची।
एसएसपी ने कहा कि नेशनल हाइवे को जाम लगाने, पथराव और पुलिस जीप में आग लगाने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। उनके खिलाफ जल्द ही रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। उन्हें जेल भेजा जाएगा। प्रेसवार्ता के दौरान एएसपी सर्वानंद यादव, सीओ सैफई अरुण दीक्षित, सीओ जसवंतनगर अनिल कुमार आदि उपस्थित रहे।
बीस हजार के लालच में मांगी थी फिरौती
प्रेसवार्ता के समय पुलिस ने दोनों आरोपियों को पेश किया। हरिओम ने बताया कि उसने तो केवल बीस हजार रुपये के लालच में फिरौती मांगी थी। पूरी साजिश ताऊ आदेशबाबू की थी। बकौल हरिओम अपहरण की साजिश 18 जनवरी को बनी थी। देवांशू के ताऊ आदेशबाबू ने उसे बीस हजार रुपये देने की बात कहते हुए फोन से फिरौती मांगने को कहा था।
इसके लिए उसे नया सिमकार्ड दिया गया। शुक्रवार की दोपहर जब देवांशू खेल रहा था तो उसे आदेशबाबू ही ले आया और एक कमरे में बंद कर दिया। प्लानिंग के हिसाब से शाम पांच बजे अरविंद के मोबाइल पर फोन करके साढ़े सात लाख रुपये फिरौती मांगी।
24 जनवरी शनिवार को सुबह फोन किया तो सौदा साढ़े पांच लाख रुपये में तय हो गया। इसी बीच देवांशू की मौत होने की जानकारी मिली। उसने बताया कि देवांशू की मौत रात में ही हो गई थी। फिर यह प्लानिंग बनी कि रुपये मिलने के बाद शव को कहीं ठिकाने लगा दिया जाएगा।
परिवारीजनों को कोई शक नहीं होगा। उधर इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए आदेशबाबू ने रंजिश में उसे फंसाए जाने की बात कही।
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एसएसपी ने बताया कि शुक्रवार को पिता अरविंद शाक्य ने बेटे के गायब होने और फिर फिरौती मांगे जाने की सूचना पुलिस को दी थी। उन्होंने पुलिस को वह नंबर भी बताया जिससे फिरौती मांगी गई। छानबीन की गई तो पुलिस एक आरोपी तक पहुंच गई।
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पुलिस ने गांव के ही हरिओम उर्फ विष्णु पुत्र रामकिशोर को गिरफ्तार किया। पूछताछ की गई तो पता चला कि पूरी साजिश का मुखिया बच्चे का ताऊ आदेशबाबू है। पुलिस ने शनिवार की रात घूरे में दबाया गया देवांशू का शव भी बरामद कर लिया। एसएसपी ने बताया कि परिजन भले ही ताऊ को दोषी न मानें, लेकिन पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं।
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जिस सिमकार्ड का प्रयोग फिरौती मांगने के लिए किया गया उसका इस्तेमाल हरिओम और आदेशबाबू के बीच बातचीत में हुआ था। आदेशबाबू अवैध रूप से शराब बेंचने का काम करता है। उसी ने रुपये के लालच में अपहरण जैसी वारदात की साजिश रची।
एसएसपी ने कहा कि नेशनल हाइवे को जाम लगाने, पथराव और पुलिस जीप में आग लगाने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। उनके खिलाफ जल्द ही रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। उन्हें जेल भेजा जाएगा। प्रेसवार्ता के दौरान एएसपी सर्वानंद यादव, सीओ सैफई अरुण दीक्षित, सीओ जसवंतनगर अनिल कुमार आदि उपस्थित रहे।
बीस हजार के लालच में मांगी थी फिरौती
प्रेसवार्ता के समय पुलिस ने दोनों आरोपियों को पेश किया। हरिओम ने बताया कि उसने तो केवल बीस हजार रुपये के लालच में फिरौती मांगी थी। पूरी साजिश ताऊ आदेशबाबू की थी। बकौल हरिओम अपहरण की साजिश 18 जनवरी को बनी थी। देवांशू के ताऊ आदेशबाबू ने उसे बीस हजार रुपये देने की बात कहते हुए फोन से फिरौती मांगने को कहा था।
इसके लिए उसे नया सिमकार्ड दिया गया। शुक्रवार की दोपहर जब देवांशू खेल रहा था तो उसे आदेशबाबू ही ले आया और एक कमरे में बंद कर दिया। प्लानिंग के हिसाब से शाम पांच बजे अरविंद के मोबाइल पर फोन करके साढ़े सात लाख रुपये फिरौती मांगी।
24 जनवरी शनिवार को सुबह फोन किया तो सौदा साढ़े पांच लाख रुपये में तय हो गया। इसी बीच देवांशू की मौत होने की जानकारी मिली। उसने बताया कि देवांशू की मौत रात में ही हो गई थी। फिर यह प्लानिंग बनी कि रुपये मिलने के बाद शव को कहीं ठिकाने लगा दिया जाएगा।
परिवारीजनों को कोई शक नहीं होगा। उधर इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए आदेशबाबू ने रंजिश में उसे फंसाए जाने की बात कही।