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समलैंगिक विवाह कर थाने पहुंची दो युवती
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:24 PM IST
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महानगरों में समलैंगिक विवाह के मामले सामने आते रहे हैं। इस मुद्दे पर
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बहस होती रही हैं। कुछ संगठन इसके लिए कानून बनाने की आवाज भी उठा रहे हैं,
लेकिन छोटे जिलों और गांवों में अभी इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
गांवों में जातीय और सामाजिक पंचायतें हावी है तो तमाम दुश्वारियां भी इस
राह में हैं. घर-परिवार व समाज की नाराजगी का जोखिम अलग। ऐसे में गांव की
दो युवतियों ने समलैंगिक विवाह कर चौका दिया। शनिवार को यह मामला थाने में
पहुंच गया और पुलिस सोमवार को न्यायालय में दोनों के बयान कराएगी।
समलैंगिक विवाह करने वाली युवतियों में नन्हीं(25) गांव रामसिंहपुरा निवासी रामसिंह और सपना (19) गांव रामपुर नगरिया निवासी रामवीर की पुत्री हैं। शनिवार को इन्होंने कोतवाली में आपस में शादी करने की बात कहते हुए एक शपथ पत्र वरिष्ठ उपनिरीक्षक को सौंपा। कुछ देर बाद इनके परिवारीजन भी कोतवाली पहुंच गए। वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने उनसे वार्ता की और उनके प्रपत्रों का परीक्षण किया। नन्हीं और सपना ने 14 अप्रैल को नोटरी अधिवक्ता के माध्यम से ये शपथ पत्र तैयार कराया है। दो गवाहों ने इस शादी नामा की औपचारिकता भी पूरी की। नन्हीं और सपना ने बताया कि वह लगभग डेढ़ वर्ष से एक दूसरे का साथ निभाते हुए जीवन जीने का सपना देख रहीं थीं, जो अब साकार हुआ है।
लड़कों की तरह रहती हैं नन्हीं
सोरों(ब्यूरो)। नन्हीं ने भले ही अपना नाम न बदला हो, लेकिन लिबास जरूर बदला है। वह लड़कों की तरह रहती और कपड़े पहनती है। इस शादी में भी सपना के साथ वह दूल्हे की भूमिका में है और सपना के भरण पोषण का जिम्मा भी संभाला है। वह स्वयं गांव में एक छोटी सी परचून की दुकान चलाती है। सपना भी ने भी थाने में उसके साथ विवाह करने की बात को स्वीकार करती है। दोनों बहुत अधिक पढ़ी लिखी नहीं है और प्राइमरी स्तर तक ही इनकी शिक्षा हुई है। इन्हें अब न गांव- समाज की चिंता है और उनके तानों की। बेफिक्र होकर एक साथ जिंदगी बिताना चाहती है।
भारत में समलैंगिक विवाह की मान्यता देने के संबंध में कोई कानून नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में समलैंगिक विवाह को मान्यता दी है। कैलाश राजपूत, वरिष्ठ अधिवक्ता
समलैंगिक विवाह करने वाली युवतियों में नन्हीं(25) गांव रामसिंहपुरा निवासी रामसिंह और सपना (19) गांव रामपुर नगरिया निवासी रामवीर की पुत्री हैं। शनिवार को इन्होंने कोतवाली में आपस में शादी करने की बात कहते हुए एक शपथ पत्र वरिष्ठ उपनिरीक्षक को सौंपा। कुछ देर बाद इनके परिवारीजन भी कोतवाली पहुंच गए। वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने उनसे वार्ता की और उनके प्रपत्रों का परीक्षण किया। नन्हीं और सपना ने 14 अप्रैल को नोटरी अधिवक्ता के माध्यम से ये शपथ पत्र तैयार कराया है। दो गवाहों ने इस शादी नामा की औपचारिकता भी पूरी की। नन्हीं और सपना ने बताया कि वह लगभग डेढ़ वर्ष से एक दूसरे का साथ निभाते हुए जीवन जीने का सपना देख रहीं थीं, जो अब साकार हुआ है।
लड़कों की तरह रहती हैं नन्हीं
सोरों(ब्यूरो)। नन्हीं ने भले ही अपना नाम न बदला हो, लेकिन लिबास जरूर बदला है। वह लड़कों की तरह रहती और कपड़े पहनती है। इस शादी में भी सपना के साथ वह दूल्हे की भूमिका में है और सपना के भरण पोषण का जिम्मा भी संभाला है। वह स्वयं गांव में एक छोटी सी परचून की दुकान चलाती है। सपना भी ने भी थाने में उसके साथ विवाह करने की बात को स्वीकार करती है। दोनों बहुत अधिक पढ़ी लिखी नहीं है और प्राइमरी स्तर तक ही इनकी शिक्षा हुई है। इन्हें अब न गांव- समाज की चिंता है और उनके तानों की। बेफिक्र होकर एक साथ जिंदगी बिताना चाहती है।
भारत में समलैंगिक विवाह की मान्यता देने के संबंध में कोई कानून नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में समलैंगिक विवाह को मान्यता दी है। कैलाश राजपूत, वरिष्ठ अधिवक्ता