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उड़ रहे धूल के गुबार, लोगों की सांसें फुला रहा प्रदूषण
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हाईवे निर्माण कार्य के दौरान धूल उड़ाकर जाते दिखे वाहन- संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। जैस-जैसे शहर विकसित हो रहा है, वैसे-वैसे वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। शहर से लेकर गांव तक के हर व्यक्ति प्रदूषण की चपेट में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक हर तीन मिनट पर एक व्यक्ति की मौत प्रदूषण के कारण हो रही है। जिले में भी प्रदूषण की समस्या से लोग अछूते नहीं हैं। आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और दम घुटने जैसी दिक्कते सामने आ रही हैं। चिकित्सकों के पास मरीजों की अच्छी खासी भीड़ लग रही है।
प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है जिले में खाटरा वाहनों का सड़कों पर दौड़ना व टूटी सड़कों से उड़ने वाली धुंध। जिला अस्पताल में से लेकर नर्सिंग होम तक में आंख और फेफड़ों की समस्या से ग्रसित लोग पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन आंखों से परेशान दो सौ से ढाई सौ मरीज पहुंच रहे हैं। साथ ही सांस की समस्या से ग्रसित 100 से 120 के करीब आते हैं। अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि धूल उड़ने से सांस के माध्यम से कुछ कण अंदर पहुंच जाते हैं। वह फेफड़ों को प्रभावित करते हैं।
आंखों की कार्नियां हो रही खराब
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मनोज कुुमार जैन बताते हैं कि धूल व जहरीले धुएं के कारण आंख की ऑकुलर सतह पर असर पड़ रहा है। आंखों में खुजली हो रही है, इससे आंखो की कार्नियां खराब हो जाती है।
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जलन होने पर साफ पानी से धोएं आंखें
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित गुप्ता कहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण भी वायु प्रदूषण का एक कारण है। उनसे निकलने वाली गैस व्यक्ति के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। आखों में जलन होने पर साफ पानी से उसको साफ करें।
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प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है जिले में खाटरा वाहनों का सड़कों पर दौड़ना व टूटी सड़कों से उड़ने वाली धुंध। जिला अस्पताल में से लेकर नर्सिंग होम तक में आंख और फेफड़ों की समस्या से ग्रसित लोग पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन आंखों से परेशान दो सौ से ढाई सौ मरीज पहुंच रहे हैं। साथ ही सांस की समस्या से ग्रसित 100 से 120 के करीब आते हैं। अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि धूल उड़ने से सांस के माध्यम से कुछ कण अंदर पहुंच जाते हैं। वह फेफड़ों को प्रभावित करते हैं।
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आंखों की कार्नियां हो रही खराब
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मनोज कुुमार जैन बताते हैं कि धूल व जहरीले धुएं के कारण आंख की ऑकुलर सतह पर असर पड़ रहा है। आंखों में खुजली हो रही है, इससे आंखो की कार्नियां खराब हो जाती है।
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जलन होने पर साफ पानी से धोएं आंखें
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित गुप्ता कहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण भी वायु प्रदूषण का एक कारण है। उनसे निकलने वाली गैस व्यक्ति के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। आखों में जलन होने पर साफ पानी से उसको साफ करें।