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ई-श्रम कार्ड और टीकाकरण के बहाने ऑनलाइन ठगी
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एटा। साइबर ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। इस समय ई-श्रम कार्ड की मारामारी को देख साइबर ठगों ने इसे भी हथकंडा बनाया है। लोगों को झांसे में ले रहे हैं। वहीं कोरोना टीकाकरण के नाम पर भी ठगने की कोशिशें चल रहीं हैं। प्रतिदिन कोई न कोई व्यक्ति जिले में ठगी का शिकार हो रहा है। एक जनवरी से 13 जनवरी तक की ठगी के मामलों की बात करें तो पुलिस की साइबर सेल के पास 14 मामले आए। जहां साइबर सेल द्वारा तीन मामलों में ठगी के शिकार व्यक्तियों की रकम वापस कराई।
केस एक
सकीट थाना क्षेत्र निवासी एक महिला के पास 10 जनवरी को कॉल आई। कॉल करने वाले ने बताया कि ई-श्रम कार्ड बन गया है, खाते में रुपये डाले जाएंगे। इसलिए बैंक अकाउंट की जानकारी दो। महिला जानकारी दे दी। जिसके बाद उसके खाते से पांच हजार रुपये निकाल लिए गए।
केस दो
मिरहची निवासी एक व्यक्ति के पास कॉल कर कोरोना टीकाकरण की जानकारी दी गई। बताया कि टीकाकरण के लिए पंजीकरण किया जा रहा है। मोबाइल पर आए ओटीपी नंबर को पूछा। संबधित व्यक्ति जागरूक था, उसने ओटीपी नहीं बताया और ठगी से बच गया।
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अगर किसी के पास कॉल आए और बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड की जानकारी या मोबाइल पर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आदि पूछे तो बताना नहीं चाहिए। अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो गया है तो तत्काल टोल फ्री नंबर 155260 पर शिकायत दर्ज कराए। जिस वेबसाइट लिंक के बारे में जानकारी नहीं है, उसको नहीं खोलना चाहिए। ज्यादा रुपयों की खरीदारी ऑनलाइन नहीं करनी चाहिए। - स्नेहलता, अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध)
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केस एक
सकीट थाना क्षेत्र निवासी एक महिला के पास 10 जनवरी को कॉल आई। कॉल करने वाले ने बताया कि ई-श्रम कार्ड बन गया है, खाते में रुपये डाले जाएंगे। इसलिए बैंक अकाउंट की जानकारी दो। महिला जानकारी दे दी। जिसके बाद उसके खाते से पांच हजार रुपये निकाल लिए गए।
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केस दो
मिरहची निवासी एक व्यक्ति के पास कॉल कर कोरोना टीकाकरण की जानकारी दी गई। बताया कि टीकाकरण के लिए पंजीकरण किया जा रहा है। मोबाइल पर आए ओटीपी नंबर को पूछा। संबधित व्यक्ति जागरूक था, उसने ओटीपी नहीं बताया और ठगी से बच गया।
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अगर किसी के पास कॉल आए और बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड की जानकारी या मोबाइल पर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आदि पूछे तो बताना नहीं चाहिए। अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो गया है तो तत्काल टोल फ्री नंबर 155260 पर शिकायत दर्ज कराए। जिस वेबसाइट लिंक के बारे में जानकारी नहीं है, उसको नहीं खोलना चाहिए। ज्यादा रुपयों की खरीदारी ऑनलाइन नहीं करनी चाहिए। - स्नेहलता, अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध)