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कैसे पढ़ें और बढ़ें बेटियां, आठवीं के बाद शिक्षा के नहीं बंदोबस्त

Tue, 21 Sep 2021 10:41 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 21 Sep 2021 10:41 PM IST
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How to read and grow daughter: No arrangements for education after eighth
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ।संवाद - फोटो : ETAH
एटा/मारहरा। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देकर सरकार बालिका सशक्तीकरण की बात तो कह रही है, लेकिन व्यवहारिक रूप से इसमें तमाम अड़चनें हैं। मारहरा ब्लॉक में बनाए गए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय को एक दशक बाद भी उच्चीकृत नहीं किया गया है। आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद छात्राएं घर बैठने को मजबूर हैं।
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बालिकाओं के उत्थान के लिए नवोदय की तर्ज पर मारहरा क्षेत्र के गांव पिवारी में कक्षा 8 तक कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित किए गए। जिससे गरीब तबके के परिवारों की बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा प्राप्त कराई जा सके। इसे संचालित हुए दस साल से अधिक समय बीत गया, लेकिन अभी तक अगली कक्षाओं में इसे उच्चीकृत नहीं किया गया है। क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं जहां आसपास 10वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं हैं। अभिभावकों का कहना है कि गैर आवासीय सरकारी स्कूलों में भी सरकार निशुल्क शिक्षा प्राप्त करा रही है तो इन आवासीय स्कूलों पर करोड़ों का बजट क्यों खर्च कर रही है।
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कक्षा आठ के बाद घर बैठने को मजबूर हैं बालिकाएं
केस 1: गांव लालपुर देहामाफी निवासी राकेश कुमार बताते हैं कि अपनी बेटी का कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में प्रवेश कराया था। कक्षा आठ में उत्तीर्ण होने के बाद उसे घर बैठाना पड़ गया। विद्यालय में आगे की पढ़ाई नहीं थी। वहीं गांव से मारहरा सरकारी स्कूल आठ किमी दूर है, जिसके लिए संसाधन नहीं है।
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