{"_id":"67dff5238c9bc5f85202a311","slug":"four-people-freed-from-murder-charges-after-22-years-etah-news-c-163-1-sagr1016-131332-2025-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etah News: 22 साल बाद हत्या के आरोप से मुक्त हुए चार लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etah News: 22 साल बाद हत्या के आरोप से मुक्त हुए चार लोग
Sun, 23 Mar 2025 05:18 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 23 Mar 2025 05:18 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
एटा। सिकंदरपुर वैश्य थानांतर्गत (वर्तमान में जनपद कासगंज के अधीन) 22 साल पहले एक दलित व्यक्ति की गोलियां मारकर हत्या की गई। इस आरोप में 4 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट मनीषा ने चारों को दोषमुक्त करार दिया है।
थाना क्षेत्र के गांव रानीडामर के रहने वाले सुआलाल की हत्या 10 दिसंबर 2003 को की गई थी। उसकी पत्नी पुत्तनदेवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया कि भूसा चोरी में टिंचू ठाकुर निवासी गांव राजा रिजौला पर शक जताया गया था। इससे टिंचू नाराज था। 10 दिसंबर की रात के समय टिंचू, बबलू, उसका भाई ओमवीर, वीरपाल सभी निवासी गांव रानी डामर ने पति के ऊपर तमंचों से फायर कर दिए। ओमवीर ने उनको बांके से भी काटा। पुलिस ने विवेचना के बाद चारों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में भेज दिया।
बचाव पक्ष ने कोई गवाह पेश नहीं किया। जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 9 गवाहों को पेश किया गया, लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान कुछ गवाह अपने बयानों से पलट गए तो कुछ के बयान विरोधाभासी रहे। ऐसे में पूरा मामला संदेहपूर्ण हो गया। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए चारों आरोपियों को दोषमुक्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
थाना क्षेत्र के गांव रानीडामर के रहने वाले सुआलाल की हत्या 10 दिसंबर 2003 को की गई थी। उसकी पत्नी पुत्तनदेवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया कि भूसा चोरी में टिंचू ठाकुर निवासी गांव राजा रिजौला पर शक जताया गया था। इससे टिंचू नाराज था। 10 दिसंबर की रात के समय टिंचू, बबलू, उसका भाई ओमवीर, वीरपाल सभी निवासी गांव रानी डामर ने पति के ऊपर तमंचों से फायर कर दिए। ओमवीर ने उनको बांके से भी काटा। पुलिस ने विवेचना के बाद चारों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में भेज दिया।
विज्ञापन
बचाव पक्ष ने कोई गवाह पेश नहीं किया। जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 9 गवाहों को पेश किया गया, लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान कुछ गवाह अपने बयानों से पलट गए तो कुछ के बयान विरोधाभासी रहे। ऐसे में पूरा मामला संदेहपूर्ण हो गया। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए चारों आरोपियों को दोषमुक्त किया।
विज्ञापन