{"_id":"6ab0196232b4a11789092574","slug":"a-team-had-arrived-six-months-ago-following-a-tip-off-about-a-fake-clinic-etah-news-c-163-1-eta1014-156980-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etah News: छह माह पहले फर्जी क्लीनिक की सूचना पर पहुंची थी टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etah News: छह माह पहले फर्जी क्लीनिक की सूचना पर पहुंची थी टीम
Sun, 20 Sep 2026 11:05 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:05 PM IST
विज्ञापन
एटा। बीएस मेडिकल कॉलेज व यूनिवर्सिटी मारहरा थाना क्षेत्र के गांव महमूदपुर नगरिया में चार साल तक संचालित होती रही लेकिन जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था इसकी गतिविधियों तक नहीं पहुंच सकी। हैरानी की बात यह है कि करीब छह माह पहले फर्जी क्लीनिक की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संस्थान पर छापा भी मारा था लेकिन उस समय मेडिकल कॉलेज बंद मिला। इसके बाद भी मामले की हकीकत सामने नहीं आ सकी।
सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से संस्थान के संबंध में दो बार कार्रवाई की गई। दोनों ही बार टीम मौके पर पहुंची लेकिन मेडिकल कॉलेज बंद मिला। ऐसे में टीम को मौके पर संस्थान के संचालन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल सकी। सवाल यह है कि यदि विभाग को संस्थान के संबंध में शिकायत मिली थी तो बंद मिलने के बाद उसकी दोबारा प्रभावी जांच क्यों नहीं हो सकी। इस बारे में सीएमओ ने कहा कि हमारे स्तर तक की कार्रवाई ही हम कर सकते हैं।
मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि इसका उनके स्तर से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में अब यह सवाल भी सामने है कि संस्थान के संचालन, मान्यता और वहां होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी किस विभाग की जिम्मेदारी थी। चार साल तक संस्थान के संचालन के बाद यह भी जांच का विषय है कि वहां जिन पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा था उसमें कितने विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। इन बिंदुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से संस्थान के संबंध में दो बार कार्रवाई की गई। दोनों ही बार टीम मौके पर पहुंची लेकिन मेडिकल कॉलेज बंद मिला। ऐसे में टीम को मौके पर संस्थान के संचालन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल सकी। सवाल यह है कि यदि विभाग को संस्थान के संबंध में शिकायत मिली थी तो बंद मिलने के बाद उसकी दोबारा प्रभावी जांच क्यों नहीं हो सकी। इस बारे में सीएमओ ने कहा कि हमारे स्तर तक की कार्रवाई ही हम कर सकते हैं।
विज्ञापन
मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि इसका उनके स्तर से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में अब यह सवाल भी सामने है कि संस्थान के संचालन, मान्यता और वहां होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी किस विभाग की जिम्मेदारी थी। चार साल तक संस्थान के संचालन के बाद यह भी जांच का विषय है कि वहां जिन पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा था उसमें कितने विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। इन बिंदुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
विज्ञापन