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गुलाब की खुशबू पर अकुशलता का ग्रहण

Sun, 05 Sep 2021 06:12 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 06:12 PM IST
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eclipse of inefficiency on the scent of roses
एटा। निधौली कलां विकासखंड क्षेत्र में बड़े स्तर पर गुलाब की खेती की जाती है। यहां से गुलाब रस तैयार कर इत्र नगरी कन्नौज भेजा जाता है। ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के तहत इसे योजना में शामिल करने की पहल की गई, लेकिन न तो मजदूर कुशल हैं और न ही इसकी इकाइयां स्थापित करना चाहते हैं। इसी के चलते वर्षों बाद भी गुलाब की खुशबू पर अकुशलता का ग्रहण लगा हुआ है और यह कारोबार निधौली कलां ब्लॉक तक सिमटा हुआ है।
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निधौली कलां ब्लॉक क्षेत्र के गांव झिनवार, गहेतु, रूपसपुर, सोरखा, लालपुर, खिदरपुर, सीतारामपुर, लालपुर, बाकलपुर आदि गांव में करीब तीन हजार बीघा क्षेत्रफल में गुलाब की खेती होती है। सबसे अधिक करीब 1200 बीघा खेती अकेले ग्राम पंचायत झिनवार में होती है। गुलाब रूह से गुलाब जल, इत्र, गुलकंद बनाया जाता है। झिनवार में छोटे-बड़े डेढ़ दर्जन कारखाने संचालित हैं। एक कारखाने में बीस से पचास भट्ठियां चलती हैं। कारीगर जुलाई से नवंबर तक इन कारखानों में काम करते हैं। लेकिन सभी कारखाने परंपरागत रूप से चले आ रहे हैं। कोई इन्हें आधुनिक स्वरूप और नई तकनीकी के साथ संचालन के लिए आगे नहीं आया। ओडीओपी की तहत हर जिले से दूसरा उत्पाद चुने जाने के निर्देश हैं। इसमें गुलाब रूह पर मंथन किया गया। लेकिन आधुनिक कारखानों और कारीगरों की अकुशलता के चलते बात आगे नहीं बढ़ी।
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चार साल में व्यवसाय सबसे निचले स्तर पर
क्षेत्रीय किसान बताते हैं कि इस बार चार साल में व्यवसाय सबसे निचले स्तर पर है। सबसे बड़ी वजह है कि गुलाब की खरीदारी करने वाले व्यापारी ही इसकी कीमत तय करते हैं। अधिकांश व्यापारी कन्नौज के होते हैं, जो मनमाने दामों पर रूह खरीदते हैं। मुनाफा घटने से किसान खेती छोड़ते जा रहे हैं। इस बार खेती और व्यवसाय चार साल में सबसे निचले स्तर पर है। किसानों की मांग है कि अन्य फसलों की तरह गुलाब के लिए भी केंद्र या राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करे।
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