फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etah News ›   kisako kitana becha khoon, pata laga raha prashaasan

किसको कितना बेचा खून, पता लगा रहा प्रशासन

Sun, 16 Apr 2017 11:56 PM IST
amar ujala
amar ujala Updated Sun, 16 Apr 2017 11:56 PM IST
विज्ञापन
kisako kitana becha khoon, pata laga raha prashaasan
रक्त - फोटो : demo pic

विज्ञापन
पैथोलॉजी लैब में चल रहे अवैध ब्लड बैंक से अधिकतर निजी अस्पतालों को खून सप्लाई किया गया। प्रशासन अब उन अस्पतालों और मरीजों का पता लगा रहा है जिन्हें इस ब्लड बैंक से बिना रोग जांच वाला खून बेचा गया। वहीं अवैध रूप से ब्लड बैंक चलाने के मामले में लैब संचालक सुधीर जैन और उसके पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। संचालक तो पुलिस के हाथ नहीं लगा लेकिन उसके पिता अक्कू जैन को गिरफ्तार कर लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक 14 साल से पैथोलॉजी लैब की आड़ में सुभाष रोड पर अवैध ब्लड बैंक चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग के अधकारियों ने दो बार इस अवैध ब्लड बैंक पर छापा मारने की तैयारी की थी लेकिन एक सपा नेता के दखल पर कार्रवाई शुरू होने से पहले ही रोक दी गई। इतना ही नहीं लैब संचालक पर कई साल पूर्व एनएसए लगा था, लेकिन प्रशासन की ओर से पुख्ता पैरवी नहीं होने से कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंची।
विज्ञापन



अवैध ब्लड बैंक संचालकों के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई होगी। इस बार मौके की वीडियोग्राफी कराने के बाद फर्द बनाई गई है। आरोपियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।-विजय किरन आनंद, डीएम एटा
विज्ञापन
विज्ञापन



आईएमए का कोई चिकित्सक सदस्य अवैध ब्लड बैंक से खून नहीं खरीदता है। यदि कोई वहां से खून खरीद रहा है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
ड़ा. राजेश सक्सेना, अध्यक्ष आईएमए
जान बची लेकिन मिली लाइलाज बीमारी


अस्पताल में मरीज की जिंदगी बचाने के लिए खून चढ़ाया जाता है, लेकिन अवैध ब्लड बैंक से मिले खून को चढ़ाने पर मरीजों को एचआईवी संक्रमण मिला।  ऐसे लोगों की संख्या दस तक बताई जा रही है जिसमें अधिकतर महिलाएं हैं। खास बात यह कि सभी महिलाओं को प्रसव के दौरान ब्लड चढ़ाया गया। अब एचआईवी संक्रमण की चपेट में आने से उनके पति और बच्चे भी एड्स का दंश झेल रहे हैं।

जिला अस्पताल के यौन रोग काउंसलर मुकेश यादव की मानें तो किसी महिला के परिवार ने इसी अवैध ब्लड बैंक से खून खरीद कर प्राइवेट अस्पताल में चढ़वाया, तो किसी निजी अस्पताल ने अपनी ओर से संक्रमित खून इसी अवैध ब्लड बैंक से मंगवा कर चढ़ाया। अवैध ब्लड बैंक से ब्लड सप्लाई का रिकार्ड भी निजी अस्पतालों  में नहीं है। जब वे एचआईवी काउंसलर थे तो उनके पास ये महिलाएं पहुंची थीं। उन्होंने उनकी काउंसलिंग की थी। काउंसिलिंग के दौरान महिलाओं ने ब्लड चढ़ाए जाने की बात स्वीकारी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed