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एटा में कोर्ट का अहम आदेश: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को गर्भ गिराने की अनुमति, भ्रूण के डीएनए की होगी जांच

Fri, 20 Mar 2026 09:51 PM IST
Rahul Kumar Tiwari संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 20 Mar 2026 09:51 PM IST
सार

एटा में 14 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले में अदालत ने गर्भपात की अनुमति दे दी है। सीएमओ को विधि अनुसार प्रक्रिया कराने के निर्देश दिए गए हैं। भ्रूण को फॉरेंसिक जांच और डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।

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court allowed abortion of 14 weeks of pregnancy in In case of misdeed victim in Etah
एटा में कोर्ट का अहम आदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एटा में 14 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले में एडीजे पॉक्सो अधिनियम न्यायालय ने अहम आदेश दिया है। न्यायालय ने उसके माता-पिता की याचिका पर गर्भ गिराने के अनुमति दे दी है। इस संबंध में सीएमओ को निर्देशित किया है कि पीड़िता का गर्भ समापन विधि अनुसार कराया जाए। गर्भ समापन के बाद भ्रूण को विधिक रूप से सुरक्षित रखा जाए ताकि फॉरेंसिक जांच एवं डीएनए प्रोफाइलिंग की जा सके।

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मामला यूपी के एटा कोतवाली देहात क्षेत्र के एक गांव का है। 15 वर्षीय किशोरी 30 जनवरी को स्कूल गई थी। दोपहर तक घर नहीं पहुंची। इस संबंध में आरोपी लवकुश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने दो फरवरी को किशोरी को बरामद कर लिया। आरोपी को जेल भेज दिया। बाद में परिजनों को उसके गर्भवती होने की जानकारी हुई। 
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किशोरी 14 सप्ताह की गर्भवती है। इस संबंध में एडीजे पाक्सो एक्ट नरेंद्र पाल राना के न्यायालय में पीड़िता के माता-पिता ने याचिका दाखिल की। इस मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने न्यायालय में दलील कि गर्भावस्था एक जघन्य अपराध का परिणाम है और पीड़िता न तो शारीरिक रूप से परिपक्व है और न ही गर्भ को पूर्ण अवधि तक धारण करने में सक्षम है।
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न्याय के हित में और पीड़िता के गरिमापूर्ण जीवन के लिए गर्भ को समाप्त करना आवश्यक है। न्यायालय ने गर्भ गिराने की अनुमति दे दी है। सीएमओ के निर्देशित किया है कि मेडिकल एक्सपर्ट की देखरेख में यह प्रक्रिया अपनाई जाए। भ्रूण की डीएनए प्रोफाइलिंग के भी आदेश दिए हैं। इसका इस्तेमाल मुख्य मामले में सबूत के तौर पर किया जाएगा। कोर्ट ने पीड़िता की गोपनीयता पूरी तरह बनाए रखने और आदेश की प्रति थाना प्रभारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तत्काल भेजने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि सभी चिकित्सा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

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