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Etah News: एटीएम लूटकांड के तीन आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
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एटा। शहर में हुए एटीएम लूटकांड में महिला सहित पांच आरोपी जेल में हैं। तीन आरोपियों द्वारा जमानत के लिए पेश किए गए प्रार्थना पत्र को जिला जज ने खारिज कर दिया। शहर में जीटी रोड पर अरुणा नगर गेट के बाहर स्थित एक्सिस बैंक के एटीएम को 1 नवंबर की रात निशाना बनाया गया था। एटीएम को काटकर इसमें से 26 लाख 5500 रुपये बदमाश ले गए थे। पुलिस ने 17 नवंबर को घटना का खुलासा किया।
मानपाल निवासी मोहल्ला भूतेश्वर बिलराम गेट, देवेंद्र निवासी मोहल्ला योगमार्ग थाना सोरों कासगंज और वीरेश निवासी खेड़ा खड़ौआ थाना पाली मुकीमपुर जिला अलीगढ़ को गिरफ्तार किया। इनसे 10.92 लाख रुपये की बरामदगी दिखाई। इसके बाद 20 नवंबर को वीरेश की पत्नी विनीता और मुख्य आरोपी शहजाद निवासी गांव मशीद जिला नूंह हरियाणा को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से 7.42 लाख रुपये बरामद हुए। जिला जज न्यायालय में विनीता, वीरेश और मानपाल ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए।
इसमें चोरी का कोई साक्ष्य न होने, झूठा नाम शामिल करने और झूठी बरामदगी दिखाने की बात कही। जिला शासकीय अधिवक्ता रेेशपाल सिंह राठौर ने बताया कि विरोध करते हुए न्यायालय को बताया गया कि इन तीनों सहित उनके साथियों का गिरोह है, जो चोरी, लूट की घटनाओं को अंजाम देते हैं। जिला जज विजय शंकर उपाध्याय ने माना कि अपराध गंभीर प्रकृति का है। इसमें जमानत का आधार पर्याप्त नहीं है। तीनों के जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए गए।
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मानपाल निवासी मोहल्ला भूतेश्वर बिलराम गेट, देवेंद्र निवासी मोहल्ला योगमार्ग थाना सोरों कासगंज और वीरेश निवासी खेड़ा खड़ौआ थाना पाली मुकीमपुर जिला अलीगढ़ को गिरफ्तार किया। इनसे 10.92 लाख रुपये की बरामदगी दिखाई। इसके बाद 20 नवंबर को वीरेश की पत्नी विनीता और मुख्य आरोपी शहजाद निवासी गांव मशीद जिला नूंह हरियाणा को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से 7.42 लाख रुपये बरामद हुए। जिला जज न्यायालय में विनीता, वीरेश और मानपाल ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए।
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इसमें चोरी का कोई साक्ष्य न होने, झूठा नाम शामिल करने और झूठी बरामदगी दिखाने की बात कही। जिला शासकीय अधिवक्ता रेेशपाल सिंह राठौर ने बताया कि विरोध करते हुए न्यायालय को बताया गया कि इन तीनों सहित उनके साथियों का गिरोह है, जो चोरी, लूट की घटनाओं को अंजाम देते हैं। जिला जज विजय शंकर उपाध्याय ने माना कि अपराध गंभीर प्रकृति का है। इसमें जमानत का आधार पर्याप्त नहीं है। तीनों के जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए गए।
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