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Deoria News: सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक फैला है कोडिनयुक्त कफ सिरप का जाल

Fri, 21 Nov 2025 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Fri, 21 Nov 2025 01:01 AM IST
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The network of codeine-containing cough syrups spread from Siddharthnagar to Prayagraj.
देवरिया। कोडिनयुक्त कफ सिरप का धंधा सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक फैला है। गोरखपुर की फर्म ने जो सिरप बेचा है, वह हिमाचल प्रदेश के बडी में लगी फैक्टरी में बनी है। गोरखपुर में इसका डिपो है। यह कोडिन फास्फेट सिरप जिसकी बिक्री के लिए कड़े मानक तय हैं, लेकिन इनकी अनदेखी हो रही है। आशंका है कि इस सिरप का प्रयोग नशे के लिए किया जा रहा है। औषधि विभाग की छापेमारी में जो रिकार्ड मिले हैं, उसके मुताबिक सबसे अधिक कफ सिरप सिद्धार्थनगर, मऊ और प्रयागराज जिलों को भेजे गए हैं। देवरिया के भी चार दुकानों को इस सिरप की आपूर्ति हुई है। मामला खुलने के बाद से दवा विक्रेताओं में हड़कंप मचा है।
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कोडिनयुक्त कफ सिरप का प्रयोग नशे के लिए होने के बाद सरकार ने इसकी बिक्री के नियम सख्त कर दिए हैं। इस कफ सिरप को नारकोटिक्स श्रेणी का मानते हुए प्रत्येक शीशी का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। इसके अलावा इस कफ सिरप को केवल डॉक्टर के लिखे पर्चे पर ही देने का नियम है। कड़ाई के पीछे उद्देश्य यह है कि दवा का दुरुपयोग न हो, लेकिन पिछले दिनों लखनऊ, आगरा समेत कई शहरों में कोडिनयुक्त कफ सिरप की खेप पकड़े जाने के बाद से ही पूरे प्रदेश में गोपनीय जांच चल रही है।
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आशंका है कि इस कफ सिरप का बड़े पैमाने पर नशे के लिए उपयोग हो रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों सरकार ने प्रदेश में बिकने वाले कफ सिरप के निर्माताओं से इस बात का विवरण लिया था कि सूबे में उनके कहां-कहां डिपो हैं और वहां कितनी सप्लाई है।
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इसके बाद अब क्रॉस चेकिंग कराई जा रही है। इसी क्रम में गोरखपुर में भी हिमाचल प्रदेश की एक फर्म का डिपो है, जिसके स्टॉक की मंगलवार की शाम जांच हुई।
जांच में सामने आया है कि इस दवा फर्म ने मात्र सात महीनों में 41 हजार से अधिक कोडिनयुक्त कफ सिरप की बिक्री की है। इतने बड़े पैमाने पर की गई सप्लाई ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल बार्डर से सटे सिद्धार्थनगर और बिहार बार्डर से जुड़े देवरिया जैसे जिलों में इसकी खपत अधिक होने से ही इस बात की आशंका बढ़ी है कि कफ सिरप का उपयोग नशे के लिए अधिक हुआ होगा। इसी कारण गोरखपुर-बस्ती मंडल में जिन मेडिकल स्टोर और वितरकों को यह सिरप भेजा गया है, उनसे पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। इसमें खरीदी-बिक्री का ब्योरा, स्टॉक रजिस्टर, बिलिंग और उपभोक्ता विवरण जैसी जानकारी शामिल है।
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