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श्रीराम ने तोड़ा धनुष, सीता ने पहनाई वरमाला
deoria
Updated Thu, 25 Oct 2018 11:09 PM IST
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फुलवारी में सखियों के साथ विचरण करतीं सीतजी।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। शहर के रामलीला मैदान में चल रही रामलीला के तीसरा दिन बृहस्पतिवार को पुष्पवाटिका में राम-सीता मिलन, सीता स्वयंवर एवं लक्ष्मण-परशुराम संवाद प्रसंग का मंचन किया गया। जनकपुर के राजदरबार में सीता स्वयंवर के लिए आए राजाओं का शिव धनुुष तोड़ने का बार-बार असफल प्रयास और परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने दर्शकों को रोमांचित कर तालियां बजाने को मजबूर कर दिया। शिवा कला लोक कल्याण समिति मुरादाबाद के कलाकारों ने अपने अभिनय से इसे और जीवंत बना दिया।
तीसरे दिन मंचन की शुरुआत दोनों राजकुमारों संग ऋषि विश्वामित्र जनकपुर पहुंचने से होती है। राजा जनक उनका स्वागत करते हैं। राम-लक्ष्मण गुरू की आज्ञा पाकर जनकपुर घूमने निकलते हैं। पुष्पवाटिका में उनकी मुलाकात सीता से होती है। अगले दृश्य में सीता स्वयंवर के दौरान राज दरबार में देश-विदेश के राजा मौजूद हैं, लेकिन कोई भी शिव धनुष को हिला तक नहीं पाता। इसी दौरान हुए रावण व बाणासुर संवाद भी दर्शकों को खूब भाया। राजा जनक कहते हैं कि लज्जा करो-लज्जा करो, ये पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। इसके बाद गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष को तोड़ देते हैं और मंगल गीतों के बीच हर्षित सीता उनके गले में वरमाला डालती हैं। धनुष खंडित होने की गूंज से क्रोधित परशुराम सभा में पहुंचते हैं और धनुष तोड़ने वाले का नाम पूछते हैं। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम की गर्मा गर्म बहस होती है। इस दृश्य को महिलाओं और बच्चों ने खूब पसंद किया। आलोक राठौर के निर्देेशन में मंचित रामलीला में कलाकारों का मेकअप व स्टेज डिजाइन अरुण कुमार सिंह व ड्रेसमैन राजू व विक्की वर्मा ने किया।
रामविवाह देख भावविभोर हुए लोग
बरियारपुर। रामपुर कारखाना ब्लॉक के पांडेयपुर गांव में चल रही रामलीला में बुधवार की रात रामविवाह का मंचन हुआ। रामलीला की शुरुआत मुख्य अतिथि भाजपा के किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष संजय तिवारी व विशिष्ट अतिथि प्रबंधक अशोक मिश्रा ने आरती कर की। गांव के ही कलाकार पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकार जब मानस की चौपाइयों का पाठ करते हुए मंच पर उतरे तो दर्शकों ने उत्साह बढ़ाया। पात्रों ने कुशल अभिनय कर रामविवाह का चित्रण किया। मंगल गीतों के बीच भगवान राम व देवी सीता के विवाह की लीला देखकर दर्शक मुग्ध हो गए। कलाकारों की कुशल संवाद शैली और अभिनय की कला ने देर रात तक दर्शकों को मंच के समीप बांधे रखा। इस मौके पर शुभम नाथ त्रिपाठी, सत्य प्रकाश पांडेय, हरीश नाथ त्रिपाठी, विशेश्वर पांडेय, संतोषनाथ त्रिपाठी, प्रदीप विश्वकर्मा, मोनो त्रिपाठी, नागेश पति त्रिपाठी, वेदप्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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शरद पूर्णिमा पर उतारी गई मां सरयू की आरती
बरहज। नगर स्थित गौरा नर्वदेश्वर घाट पर भक्तों ने शरद पूर्णिमा की संध्या पर मां सरयू की आरती उतारी। आरती के उपरांत देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम का लोगों ने लुत्फ उठाया। सुंदर कांड और हवन के बीच लोगों ने वैदिक मंत्रों के बीच मां सरयू की आरती उतारी। टिमटिमाते दीप से पूरा तट जगमगा उठा। गोरखपुर और लखनऊ से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में समां बांधा। भजन संध्या में भक्ति गीतों से लोग सराबोर होते रहे। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष अजीत जायसवाल, डॉ. अजय कुमार मिश्र, प्रदीप जायसवाल, मुरारी अग्रवाल, रणंजय सिंह, दिनेश सिंह, गनेश, अंशू तिवारी, विश्वनाथ मिश्र, विमलेंद्र, मुन्ना गुप्ता, संजय गोड़, बड़े तिवारी, दीपक, राकेश मद्धेशिया आदि उपस्थित रहे।
विहिप ने मनाई वाल्मीकि जयंती
सलेमपुर। नगर के गांधी चौक पर विश्व हिन्दू परिषद की ओर से वाल्मीकि जयंती गुरुवार को नागेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रांत मंत्री वंशराज पांडेय ने वाल्मीकि के चित्र पर दीप जला कर किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा बताए गए धर्म मार्ग पर चलकर एक धर्म परायण समाज का निर्माण किया जा सकता है। वाल्मीकि द्वारा लिखी गई श्रीरामायण समाज का पथ प्रदर्शक है। राम कथा के माध्यम से भारतीय समाज को साहित्य दिया है। जिसका हिंदू समाज उनका आभारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जाति पांति भेद भाव छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। भारत में रामराज्य की स्थापना करनी है। इस दौरान संतोष दूबे, नागेन्द्र सिंह, सुजीत कुशवाहा, संत कन्हैया दास, राजेश मिश्र, पवन कुशवाहा, योगेश शर्मा, सुभाष यादव, पुष्पलता, कंचन लता, गीता शर्मा, रूदल यादव, मनोज कुशवाहा, महावीर दीक्षित, मंतेश्वर मिश्र, सुमंत कुमार, धीरज पासवान, अशोक कुमार, अंकित वर्मा आदि मौजूद रहे।
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तीसरे दिन मंचन की शुरुआत दोनों राजकुमारों संग ऋषि विश्वामित्र जनकपुर पहुंचने से होती है। राजा जनक उनका स्वागत करते हैं। राम-लक्ष्मण गुरू की आज्ञा पाकर जनकपुर घूमने निकलते हैं। पुष्पवाटिका में उनकी मुलाकात सीता से होती है। अगले दृश्य में सीता स्वयंवर के दौरान राज दरबार में देश-विदेश के राजा मौजूद हैं, लेकिन कोई भी शिव धनुष को हिला तक नहीं पाता। इसी दौरान हुए रावण व बाणासुर संवाद भी दर्शकों को खूब भाया। राजा जनक कहते हैं कि लज्जा करो-लज्जा करो, ये पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। इसके बाद गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष को तोड़ देते हैं और मंगल गीतों के बीच हर्षित सीता उनके गले में वरमाला डालती हैं। धनुष खंडित होने की गूंज से क्रोधित परशुराम सभा में पहुंचते हैं और धनुष तोड़ने वाले का नाम पूछते हैं। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम की गर्मा गर्म बहस होती है। इस दृश्य को महिलाओं और बच्चों ने खूब पसंद किया। आलोक राठौर के निर्देेशन में मंचित रामलीला में कलाकारों का मेकअप व स्टेज डिजाइन अरुण कुमार सिंह व ड्रेसमैन राजू व विक्की वर्मा ने किया।
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रामविवाह देख भावविभोर हुए लोग
बरियारपुर। रामपुर कारखाना ब्लॉक के पांडेयपुर गांव में चल रही रामलीला में बुधवार की रात रामविवाह का मंचन हुआ। रामलीला की शुरुआत मुख्य अतिथि भाजपा के किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष संजय तिवारी व विशिष्ट अतिथि प्रबंधक अशोक मिश्रा ने आरती कर की। गांव के ही कलाकार पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकार जब मानस की चौपाइयों का पाठ करते हुए मंच पर उतरे तो दर्शकों ने उत्साह बढ़ाया। पात्रों ने कुशल अभिनय कर रामविवाह का चित्रण किया। मंगल गीतों के बीच भगवान राम व देवी सीता के विवाह की लीला देखकर दर्शक मुग्ध हो गए। कलाकारों की कुशल संवाद शैली और अभिनय की कला ने देर रात तक दर्शकों को मंच के समीप बांधे रखा। इस मौके पर शुभम नाथ त्रिपाठी, सत्य प्रकाश पांडेय, हरीश नाथ त्रिपाठी, विशेश्वर पांडेय, संतोषनाथ त्रिपाठी, प्रदीप विश्वकर्मा, मोनो त्रिपाठी, नागेश पति त्रिपाठी, वेदप्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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शरद पूर्णिमा पर उतारी गई मां सरयू की आरती
बरहज। नगर स्थित गौरा नर्वदेश्वर घाट पर भक्तों ने शरद पूर्णिमा की संध्या पर मां सरयू की आरती उतारी। आरती के उपरांत देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम का लोगों ने लुत्फ उठाया। सुंदर कांड और हवन के बीच लोगों ने वैदिक मंत्रों के बीच मां सरयू की आरती उतारी। टिमटिमाते दीप से पूरा तट जगमगा उठा। गोरखपुर और लखनऊ से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में समां बांधा। भजन संध्या में भक्ति गीतों से लोग सराबोर होते रहे। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष अजीत जायसवाल, डॉ. अजय कुमार मिश्र, प्रदीप जायसवाल, मुरारी अग्रवाल, रणंजय सिंह, दिनेश सिंह, गनेश, अंशू तिवारी, विश्वनाथ मिश्र, विमलेंद्र, मुन्ना गुप्ता, संजय गोड़, बड़े तिवारी, दीपक, राकेश मद्धेशिया आदि उपस्थित रहे।
विहिप ने मनाई वाल्मीकि जयंती
सलेमपुर। नगर के गांधी चौक पर विश्व हिन्दू परिषद की ओर से वाल्मीकि जयंती गुरुवार को नागेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रांत मंत्री वंशराज पांडेय ने वाल्मीकि के चित्र पर दीप जला कर किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा बताए गए धर्म मार्ग पर चलकर एक धर्म परायण समाज का निर्माण किया जा सकता है। वाल्मीकि द्वारा लिखी गई श्रीरामायण समाज का पथ प्रदर्शक है। राम कथा के माध्यम से भारतीय समाज को साहित्य दिया है। जिसका हिंदू समाज उनका आभारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जाति पांति भेद भाव छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। भारत में रामराज्य की स्थापना करनी है। इस दौरान संतोष दूबे, नागेन्द्र सिंह, सुजीत कुशवाहा, संत कन्हैया दास, राजेश मिश्र, पवन कुशवाहा, योगेश शर्मा, सुभाष यादव, पुष्पलता, कंचन लता, गीता शर्मा, रूदल यादव, मनोज कुशवाहा, महावीर दीक्षित, मंतेश्वर मिश्र, सुमंत कुमार, धीरज पासवान, अशोक कुमार, अंकित वर्मा आदि मौजूद रहे।