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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   The secret mystery of a 4,200-year-old city, where the 1,700-year-old story of Kanha is inscribed on stone.

एमपी: जन्माष्टमी पर जानिए ऐरण की अनोखी विरासत, पत्थरों पर उकेरी गई है कृष्ण के जन्म से कंस वध तक की पूरी गाथा

Fri, 04 Sep 2026 08:01 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 04 Sep 2026 08:01 AM IST
सार

सागर के ऐरण में 4200 साल पुराने सभ्यता अवशेषों के साथ वर्षों पुराने गुप्तकालीन मंदिर के 26 शिलाफलक हैं। इनमें श्रीकृष्ण जन्म, बाल लीलाओं, सांदीपनि आश्रम, कंस वध और उग्रसेन राज्याभिषेक तक की कथा उकेरी गई है।

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The secret mystery of a 4,200-year-old city, where the 1,700-year-old story of Kanha is inscribed on stone.
जहां पत्थर बोलते हैं कृष्ण की कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुंदेलखंड के सागर जिले की बीना तहसील के पास स्थित ऐरण गांव अपने भीतर हजारों साल पुराना इतिहास समेटे हुए है। करीब 4200 साल पुरानी नव-पाषाण युगीन मानव सभ्यता के अवशेषों से लेकर गुप्तकालीन स्थापत्य तक, ऐरण भारतीय इतिहास और संस्कृति की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। खास बात यह है कि यहां करीब वर्षों पुराने गुप्तकालीन मंदिर के अवशेषों में भगवान श्रीकृष्ण की जीवन गाथा को पाषाणों पर उकेरा गया है।

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शिशु कृष्ण माता देवकी के साथ

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देशभर में जहां जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम है, वहीं ऐरण की धरती पर मौजूद ये शिलाफलक कृष्ण की बाल लीलाओं और उनके जीवन प्रसंगों की गवाही दे रहे हैं। ऐरण को गुप्त राजवंश की द्वितीय राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। यहां गुप्तकालीन मंदिर के अवशेषों में 26 दुर्लभ शिलाफलक स्थापित हैं। इन पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर कंस वध और राजा उग्रसेन के राज्याभिषेक तक की पूरी कथा को पत्थरों पर उकेरा गया है। इन शिलाफलकों में उस दौर की धार्मिक आस्था, कला और शिल्पकला की अद्भुत झलक देखने को मिलती है।


कृष्ण जन्म के पूर्व कंस द्वारा देवकी के 6 पुत्र वध के लिए ले जाती

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डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के प्राचीन इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. नागेश दुबे के अनुसार, ये शिलाफलक उस दौर में भागवत और वैष्णव संप्रदाय की व्यापक लोकप्रियता के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। शिलाफलकों पर देवकी और वासुदेव द्वारा चतुर्भुजी विष्णु की आराधना, कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म और वासुदेव द्वारा उन्हें यमुना पार कर यशोदा के घर पहुंचाने जैसे प्रसंग उकेरे गए हैं। इसके साथ ही पूतना वध, यमलार्जुन उद्धार, माखन चोरी, कालिया नाग मर्दन और धेनुकासुर वध जैसे कृष्ण की बाल लीलाओं का भी चित्रण किया गया है।


कृष्ण जन्म

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इन शिलाफलकों में श्रीकृष्ण के सांदीपनि आश्रम में बलराम और सुदामा के साथ शिक्षा ग्रहण करने, मथुरा पहुंचने, कुब्जा के उद्धार और मामा कंस के वध के प्रसंग भी शामिल हैं। कथा के अंतिम हिस्से में राजा उग्रसेन के राज्याभिषेक का दृश्य भी पाषाणों पर अंकित है। ऐरण में मौजूद यह दुर्लभ पाषाण कला आज भी इतिहास और धार्मिक संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है। हालांकि, इतनी समृद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत होने के बावजूद ऐरण को अपेक्षित प्रचार-प्रसार नहीं मिल पाया है।

कंस वध

स्थानीय विशेषज्ञों और पर्यटकों का मानना है कि मध्य प्रदेश सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यदि इन धरोहरों के संरक्षण, प्रचार और पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दें तो ऐरण बुंदेलखंड का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बन सकता है। 


कालिया नाग का मर्दन करते श्री कृष्ण

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