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आठ दिनों का होगा शारदीय नवरात्र, दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू
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आठ दिनों का होगा शारदीय नवरात्र, दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू
देवरिया। शारदीय नवरात्र का आरंभ सात अक्तूबर से हो रहा है, इस बार यह केवल आठ दिनों को होगा, यानि 14 अक्तूबर को इसका समापन हो जाएगा। सप्तमी तिथि मंगलवार को होने से देवी का आगमन तुरंग पर हो रहा है, जो फलदायक है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, बृहस्पतिवार से आरंभ होने से यह सभी के लिए शुभ साबित होगा। विभिन्न पूजन समितियों ने भी मां दुर्गा पूजनोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी हैं, हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते इस बार भी मूर्तियों की संख्या कम ही रहने की संभावना है।
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक दुर्गाजी का प्रसिद्ध पर्वकाल है, उसे शारदीय नवरात्र कहते हैं। यह पूजा परम फलदायी है। इसमें नौ दिनो तक नवरात्र व्रत किया जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र केवल आठ दिनो का ही रहेगा। यह सात अक्तूूबर बृहस्पति को प्रारंभ होगा और नवरात्र का समापन 14 अक्तूबर दिन बृहस्पतिवार को ही होगा। शुभ दिन से आरंभ होने से समस्त जनों के लिए यह बेहद शुभद माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य आचार्य पं.विवेकानंद पांडेय ने बताया कि इस वर्ष षष्ठी तिथि का क्षय होने से नवरात्र आठ ही दिन का रहेगा।
नवरात्र के विषय में दो मत है। एक मत के अनुसार, माता का आगमन प्रतिपदा को होता और इसी दिन के आधार पर देवी के आगमन का विचार किया जाए। वहीं द्वितीय मत के विद्वानों का कथन है कि माता का सप्तमी तिथि को आगमन होता है। सप्तमी तिथि को आगमन और गमन दशमी तिथि को होता है। दशमी तिथि के गमन की बात तो दोनों मत वाले मानते है। सप्तमी तिथि 12 अक्टूबर को मंगलवार होने से देवी का आगमन तुरंग (घोड़े) पर हो रहा है। जो सामान्य फलदायक है, लेकिन 15 अक्तूबर को दशमी दिन शुक्रवार होने से प्रस्थान (गमन) हाथी पर हो रहा है जो अति शुभ फलदायक रहेगा। इससे समस्त व्यक्तियों में नई स्फूर्ति, नव चेतना और समृद्धि के उन्नयन का योग प्राप्त हो रहे हैं। इस व्रत में प्रतिपदा को घटस्थापन करके प्रात: देवी का आवाहन और पूजन करना चाहिए।
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शुभ मुहूर्त में होगी कलश स्थापना
आचार्य शरद चंद मिश्र एवं पं.विवेक उपाध्याय के अनुसार नवरात्र के प्रथम दिन सूर्योदय 6.10 बजे प्रतिपदा तिथि दिन में 3.28 बजे तक होने से कलश स्थापन के लिए पर्याप्त समय है। सूर्योदय से प्रतिपदा पर्यंत 3.28 बजे के अंदर कभी भी कलश स्थापन किया जा सकता है। इसके लिए प्रात: 6.10 से 6.40 बजे तक (कन्या लग्न- स्वभाव लग्न में), पुन: दिन में 11.14 से 1.19 मिनट तक (धनु लग्न-द्विस्वभाव लग्न) में कलश स्थापित किया जा सकता है। ये तीनों मुहूर्त ज्यादा प्रशस्त है। इसके अतिरिक्त अभिजित मुहूर्त दिन में 11.36 से 12.24 बजे तक रहेगा।
12 अक्तूबर को पंडालों में होगी मूर्ति स्थापित
12 अक्तूबर, दिन मंगलवार को सूर्योदय 6.14 बजे और सप्तमी तिथि संपूर्ण दिन और रात्रि को 1.49 मिनट तक होने से बलिदानादिक कार्य इस दिन नहीं होंगे। इसके लिए द्वितीय दिन 13 अक्तूबर ही ग्राह्य रहेगा। सप्तमी और मूल नक्षत्र का योग होने से पंडालों में मूर्तियों के स्थापन का कार्य इसी दिन होगा। 14 अक्तूबर दिन बृहस्पतिवार को सूर्योदय 6.15 बजे और नवमी तिथि रात्रि 9.53 बजे तक है। इसलिए नवमी पर्याप्त होने से महानवमी व्रत के लिए पूर्ण प्रशस्त रहेगा।
साक्षात स्वर्ग देव दर्शन पूजा की तैयारियां शुरू
देवरिया। साक्षात स्वर्ग देव दर्शन पूजा समारोह के लिए तैयारी बैठक रविवार को देवरिया खास में हुई। इसमें सात से 16 अक्तूबर तक शात सात बजे से पूर्व के वर्षों की भांति देवी-देवताओं के विभिन्न रूपों के दर्शन एवं पूजन लिए कलाकारों का चयन किया गया। आयोजक गिरिजांशकर यादव ने बताया कि कुमारी शिवांगी, आयुषी, जान्हवी, काजल, साक्षी, नेहा, निर्जला, इशिका, तन्नू, आस्था, अमन, रानी, बिट्टू, रेनू, अनुराधा, दीपमाला, शालू, संगम, प्रांजलि, तनिषा, जान्हवी, प्रज्ञात, शक्ति, सलोनी, प्रियांशु, अनन्या, निशा, अंकिता ये सभी विभिन्न देवी रुप में तथा देवताओं के रुप में कृष्णा, प्रियांशु, अनूप, टुकटुक, अनमोल, आदर्श, आभाश, बंटी, शिवम का चयन किया गया है। सजावटकर्ता के लिए सीमा जायसवाल, कुसुम, सुमन, नेहा, निक्की होंगी। उन्होंने बताया कि लगातार 10 दिन तक ये सभी कलाकार देवी-देवता के रुप में मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे। इस दौरान रामकिशोर कुशवाहा, अनंत प्रकाश सिंह, उमेश गुप्ता, लक्ष्मण शर्मा, राजू शर्मा, ऋषिकेश कुशवाहा, रामकृपाल, ओमप्रकाश, कृष्णा जायसवाल, हंसनाथ यादव, अमरनाथ गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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देवरिया। शारदीय नवरात्र का आरंभ सात अक्तूबर से हो रहा है, इस बार यह केवल आठ दिनों को होगा, यानि 14 अक्तूबर को इसका समापन हो जाएगा। सप्तमी तिथि मंगलवार को होने से देवी का आगमन तुरंग पर हो रहा है, जो फलदायक है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, बृहस्पतिवार से आरंभ होने से यह सभी के लिए शुभ साबित होगा। विभिन्न पूजन समितियों ने भी मां दुर्गा पूजनोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी हैं, हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते इस बार भी मूर्तियों की संख्या कम ही रहने की संभावना है।
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक दुर्गाजी का प्रसिद्ध पर्वकाल है, उसे शारदीय नवरात्र कहते हैं। यह पूजा परम फलदायी है। इसमें नौ दिनो तक नवरात्र व्रत किया जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र केवल आठ दिनो का ही रहेगा। यह सात अक्तूूबर बृहस्पति को प्रारंभ होगा और नवरात्र का समापन 14 अक्तूबर दिन बृहस्पतिवार को ही होगा। शुभ दिन से आरंभ होने से समस्त जनों के लिए यह बेहद शुभद माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य आचार्य पं.विवेकानंद पांडेय ने बताया कि इस वर्ष षष्ठी तिथि का क्षय होने से नवरात्र आठ ही दिन का रहेगा।
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नवरात्र के विषय में दो मत है। एक मत के अनुसार, माता का आगमन प्रतिपदा को होता और इसी दिन के आधार पर देवी के आगमन का विचार किया जाए। वहीं द्वितीय मत के विद्वानों का कथन है कि माता का सप्तमी तिथि को आगमन होता है। सप्तमी तिथि को आगमन और गमन दशमी तिथि को होता है। दशमी तिथि के गमन की बात तो दोनों मत वाले मानते है। सप्तमी तिथि 12 अक्टूबर को मंगलवार होने से देवी का आगमन तुरंग (घोड़े) पर हो रहा है। जो सामान्य फलदायक है, लेकिन 15 अक्तूबर को दशमी दिन शुक्रवार होने से प्रस्थान (गमन) हाथी पर हो रहा है जो अति शुभ फलदायक रहेगा। इससे समस्त व्यक्तियों में नई स्फूर्ति, नव चेतना और समृद्धि के उन्नयन का योग प्राप्त हो रहे हैं। इस व्रत में प्रतिपदा को घटस्थापन करके प्रात: देवी का आवाहन और पूजन करना चाहिए।
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शुभ मुहूर्त में होगी कलश स्थापना
आचार्य शरद चंद मिश्र एवं पं.विवेक उपाध्याय के अनुसार नवरात्र के प्रथम दिन सूर्योदय 6.10 बजे प्रतिपदा तिथि दिन में 3.28 बजे तक होने से कलश स्थापन के लिए पर्याप्त समय है। सूर्योदय से प्रतिपदा पर्यंत 3.28 बजे के अंदर कभी भी कलश स्थापन किया जा सकता है। इसके लिए प्रात: 6.10 से 6.40 बजे तक (कन्या लग्न- स्वभाव लग्न में), पुन: दिन में 11.14 से 1.19 मिनट तक (धनु लग्न-द्विस्वभाव लग्न) में कलश स्थापित किया जा सकता है। ये तीनों मुहूर्त ज्यादा प्रशस्त है। इसके अतिरिक्त अभिजित मुहूर्त दिन में 11.36 से 12.24 बजे तक रहेगा।
12 अक्तूबर को पंडालों में होगी मूर्ति स्थापित
12 अक्तूबर, दिन मंगलवार को सूर्योदय 6.14 बजे और सप्तमी तिथि संपूर्ण दिन और रात्रि को 1.49 मिनट तक होने से बलिदानादिक कार्य इस दिन नहीं होंगे। इसके लिए द्वितीय दिन 13 अक्तूबर ही ग्राह्य रहेगा। सप्तमी और मूल नक्षत्र का योग होने से पंडालों में मूर्तियों के स्थापन का कार्य इसी दिन होगा। 14 अक्तूबर दिन बृहस्पतिवार को सूर्योदय 6.15 बजे और नवमी तिथि रात्रि 9.53 बजे तक है। इसलिए नवमी पर्याप्त होने से महानवमी व्रत के लिए पूर्ण प्रशस्त रहेगा।
साक्षात स्वर्ग देव दर्शन पूजा की तैयारियां शुरू
देवरिया। साक्षात स्वर्ग देव दर्शन पूजा समारोह के लिए तैयारी बैठक रविवार को देवरिया खास में हुई। इसमें सात से 16 अक्तूबर तक शात सात बजे से पूर्व के वर्षों की भांति देवी-देवताओं के विभिन्न रूपों के दर्शन एवं पूजन लिए कलाकारों का चयन किया गया। आयोजक गिरिजांशकर यादव ने बताया कि कुमारी शिवांगी, आयुषी, जान्हवी, काजल, साक्षी, नेहा, निर्जला, इशिका, तन्नू, आस्था, अमन, रानी, बिट्टू, रेनू, अनुराधा, दीपमाला, शालू, संगम, प्रांजलि, तनिषा, जान्हवी, प्रज्ञात, शक्ति, सलोनी, प्रियांशु, अनन्या, निशा, अंकिता ये सभी विभिन्न देवी रुप में तथा देवताओं के रुप में कृष्णा, प्रियांशु, अनूप, टुकटुक, अनमोल, आदर्श, आभाश, बंटी, शिवम का चयन किया गया है। सजावटकर्ता के लिए सीमा जायसवाल, कुसुम, सुमन, नेहा, निक्की होंगी। उन्होंने बताया कि लगातार 10 दिन तक ये सभी कलाकार देवी-देवता के रुप में मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे। इस दौरान रामकिशोर कुशवाहा, अनंत प्रकाश सिंह, उमेश गुप्ता, लक्ष्मण शर्मा, राजू शर्मा, ऋषिकेश कुशवाहा, रामकृपाल, ओमप्रकाश, कृष्णा जायसवाल, हंसनाथ यादव, अमरनाथ गुप्ता आदि मौजूद रहे।