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भगवा ध्वज है आरएसएस का गुरु
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया
Updated Sun, 07 Aug 2016 11:05 PM IST
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प्रेरणा दिवस पर लोगों को संबोधित करते डा.जय सिंह।
- फोटो : रमेश मिश्र
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देवरिया। नगर के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सुुुुभात प्रभात रामगुलाम टोला का गुरू दक्षिण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि पांच लोगों ने मिलकर आरएसएस की शुरूआत की। आज यह देश का सबसे बड़ा संगठन है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए खंड संघ चालक रामनरेश पांडेय ने कहा कि सन 1925 में डॉ. हेडगेवार ने पांच लोगों को लेकर आरएसएस की स्थापना की थी। उस समय लोग उनका मजाक उड़ाते थे। कहते थे कि डॉक्टर की डिग्री लेकर चले हैं हिंदुओं को संगठित करने। हिंदू कभी एकजुट नहीं हो सकता है। उनलोगों की जिद रही और कार्य करते रहे।
आज आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा संगठन है। आरएसएस किसी को गुरु न बनाकर परम पवित्र भगवा ध्वज को अपना गुरु माना है। यह त्याग और बलिदान की मूर्ति है। भगवा ध्वज सूर्य के समान है। जिस प्रकार सूर्य का उदय होता है तो धरती का अंधेरा समाप्त हो जाता है, उसी प्रकार जब गुरु की कृपा होती है तो शिष्य का अज्ञान दूर हो जाता है। गुरु शब्द ग्री धातु से बना है। जिसका अर्थ निगलना या आत्मसात करना होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बैकुंठपुर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य केलाशनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि व्यक्ति में विकार आ सकता है, लेकिन प्रतीक में नहीं। भाजपा के नगर अध्यक्ष ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर हरिओम, अभिषेक वर्मा, राजेश नांगलिया, छेदी प्रजापति, अवधेश सिंह, संतोष, वासुदेव पांडेय, डॉ. रवींद्र सिंह, राकेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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आज आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा संगठन है। आरएसएस किसी को गुरु न बनाकर परम पवित्र भगवा ध्वज को अपना गुरु माना है। यह त्याग और बलिदान की मूर्ति है। भगवा ध्वज सूर्य के समान है। जिस प्रकार सूर्य का उदय होता है तो धरती का अंधेरा समाप्त हो जाता है, उसी प्रकार जब गुरु की कृपा होती है तो शिष्य का अज्ञान दूर हो जाता है। गुरु शब्द ग्री धातु से बना है। जिसका अर्थ निगलना या आत्मसात करना होता है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बैकुंठपुर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य केलाशनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि व्यक्ति में विकार आ सकता है, लेकिन प्रतीक में नहीं। भाजपा के नगर अध्यक्ष ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर हरिओम, अभिषेक वर्मा, राजेश नांगलिया, छेदी प्रजापति, अवधेश सिंह, संतोष, वासुदेव पांडेय, डॉ. रवींद्र सिंह, राकेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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