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रामजन्म होते ही बधाइयों से गूंजा पंडाल, हर्षित हुए दर्शक
deoria
Updated Wed, 24 Oct 2018 11:04 PM IST
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पुत्रेष्टि यज्ञ का मंचन किया गया।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। श्रीरामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में बुधवार की रात कलाकारों ने राम जन्म, नामकरण, विश्वामित्र आगमन, ताड़का-सुबाहु वध एवं अहिल्या उद्धार प्रसंग का मंचन किया। श्रीराम जन्म होते ही पूरा पंडाल बधाई गीतों से गूंज उठा। हर्षित दर्शकों ने जयघोष कर इस पल का आंनद लिया।
मंचन के दूसरे दिन श्रीराम जन्म प्रसंग से रामलीला की शुरुआत हुई। शिवा कला लोक कल्याण समिति मुरादाबाद के कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय से इसे और यादगार बनाया। रामजन्म होते ही अयोध्यानगरी उल्लास से भर उठती है। हर नगरवासी इसे उत्सव के रुप में मनाने को बेचैन हैं। पूरा नगर को इस अवसर पर सजाया गया है और घरों में बधाईयां दी जाती हैं। इसके बाद अगले दृश्य में नामकरण संस्कार, राजकुमार राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुधन की शिक्षा-दीक्षा, ऋषि विश्वामित्र का अयोध्या आकर महाराज दशरथ से श्रीराम व लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए मांगने का मार्मिक प्रसंग सबको भा गया। ताड़का वध प्रसंग में ताड़का का भयंकर गर्जना करते हुए महिलाओं और बच्चों को खूब पसंद आया। मंचन के सूत्रधार प्रदीप भटनागर और संगीत राजकुमार गोस्वामी, अमित शर्मा एवं प्रमोद कुमार का रहा। वहीं कलाकारों में राजा दशरथ बने नरेंद्र कुमार, कैकेयी-विदूषी, कौशिल्या-सुमन, सुमित्रा-प्रिया, राम-कैलाशचंद भट्ट, लक्ष्मण-राजकुमार, विश्वामित्र-विपिन भटनागर, मारीच-अनुराग राठौर, सुबाहु-आकाश मिश्रा, ताड़का-चंद्रमोहन, अहिल्या-मीनाक्षी, सुमंत-देवांग तथा मुनि वशिष्ट के रुप में शिवराज ने अपने अभिनय कला से दर्शकों को बार-बार रोमांचित किया।
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मंचन के दूसरे दिन श्रीराम जन्म प्रसंग से रामलीला की शुरुआत हुई। शिवा कला लोक कल्याण समिति मुरादाबाद के कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय से इसे और यादगार बनाया। रामजन्म होते ही अयोध्यानगरी उल्लास से भर उठती है। हर नगरवासी इसे उत्सव के रुप में मनाने को बेचैन हैं। पूरा नगर को इस अवसर पर सजाया गया है और घरों में बधाईयां दी जाती हैं। इसके बाद अगले दृश्य में नामकरण संस्कार, राजकुमार राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुधन की शिक्षा-दीक्षा, ऋषि विश्वामित्र का अयोध्या आकर महाराज दशरथ से श्रीराम व लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए मांगने का मार्मिक प्रसंग सबको भा गया। ताड़का वध प्रसंग में ताड़का का भयंकर गर्जना करते हुए महिलाओं और बच्चों को खूब पसंद आया। मंचन के सूत्रधार प्रदीप भटनागर और संगीत राजकुमार गोस्वामी, अमित शर्मा एवं प्रमोद कुमार का रहा। वहीं कलाकारों में राजा दशरथ बने नरेंद्र कुमार, कैकेयी-विदूषी, कौशिल्या-सुमन, सुमित्रा-प्रिया, राम-कैलाशचंद भट्ट, लक्ष्मण-राजकुमार, विश्वामित्र-विपिन भटनागर, मारीच-अनुराग राठौर, सुबाहु-आकाश मिश्रा, ताड़का-चंद्रमोहन, अहिल्या-मीनाक्षी, सुमंत-देवांग तथा मुनि वशिष्ट के रुप में शिवराज ने अपने अभिनय कला से दर्शकों को बार-बार रोमांचित किया।
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