{"_id":"65db8c63adced7ce2c080a44","slug":"problem-of-srver-in-real-time-khatauni-deoria-news-c-208-1-sgkp1014-120082-2024-02-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: तहसील से बैंक तक बांट दिया सर्वर, काम अटकने से मायूस हो रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: तहसील से बैंक तक बांट दिया सर्वर, काम अटकने से मायूस हो रहे लोग
Mon, 26 Feb 2024 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 26 Feb 2024 12:22 AM IST
विज्ञापन
फोटो--
यूपी भूलेख के पोर्टल पर ही जमीन को बंधक बनाने का काम कर रहे हैं बैंक
सर्वर बंद होने से खतौनी, रियल टाइम खतौनी के साथ लोन मंजूरी के आवेदन अटक रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। यूपी भूलेख के पोर्टल पर अब खतौनी सहित चार प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। तहसील के साथ बैंक में जमीन बंधक दर्शाकर लोन मंजूर करने का कार्य किया जा रहा है। ओवरलोड के कारण पोर्टल के सर्वर का समय बांट दिया गया है।
इसके बावजूद लोगों की समस्याएं कम नहीं हो रही है। खतौनी से संबंधित कार्य से लेकर बैंक लोन तक के मामलों में काश्तकारों को कई दिन भागदौड़ करने के बाद भी कार्य नहीं हो पा रहा है। इस मामले में शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी जरूरतमंदों को राहत नहीं मिल रही है।
यूपी भूलेख के पाेर्टल पर रियल टाइम खतौनी के साथ खतौनी के नकल लेने और मालगुजारी संसोधन के कार्य किए जा रहे हैं। जबकि अब किसान क्रेडिट कार्ड सहित बंधक जमीन के अन्य लोन और एनपीए खाते में आरसी जारी करने का कार्य पोर्टल से ही किया जा रहा है।
विज्ञापन
एक जुलाई 2023 से बंधक भूमि के आधार पर लोन की मंजूरी के कार्य भी पोर्टल के माध्यम से रहा है। तहसील क्षेत्र में 707 गांवों में रियल टाइम खतौनी अपडेट करने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन 52 राजस्व गांवों की खतौनी नहीं बन पाई है। पहले 31 दिसंबर तक कार्य पूरा होना था, लेकिन सर्वर को बार-बार हैंग होने के कारण यह कार्य पूरा नहीं हो पाया। अब 31 मार्च 2024 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जब ओवरलोड सर्वर बैठने लगा तो अलग-अलग कार्यों के सर्वर का समय बांट दिया गया है। इसके बावजूद सर्वर स्लो होने से कार्य अटक रहे हैं।
जमीन बंधक होने पर ही मिलता है लोन
नए नियम के अनुसार, जमीन को बंधक बनाकर लोन देने का कार्य भी पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। ताकि बंधक जमीन को कई बार बंधक करके लोन न मंंजूर किया जाए। जिले में 22 बैंकों की 257 शाखाएं हैं। जहां जमीन के आधार लोन स्वीकृत किए जा रहे हैं। लीड बैंक अधिकारी अरुणेश कुमार ने बताया कि पोर्टल का सर्वर स्लो होने के मामले में जिला प्रशासन से शिकायत की गई है।
प्रमाणित खतौनी को लगती है लाइन
तहसील कार्यालय के यूपी भूलेख काउंटर पर हर दिन 300 से अधिक लोग खतौनी प्राप्त कर रहे हैं। क्योंकि जनसेवा केंद्रों में अवलोकनार्थ खतौनी मिलती है, जो सरकारी कार्याें में मान्य नहीं होती है। काउंटर से खतौनी लेने पर 15 रुपये शुल्क निर्धारित है, जबकि एक से अधिक पेज के लिए दो रुपये प्रति पेज शुल्क जमा करना पड़ता है। काउंटर पर खतौनी की नकल लेने का शुल्क सस्ता है, लेकिन जब लोग परेशान हो जाते हैं। कचहरी के दलालों को रुपये देकर खतौनी प्राप्त करते हैं।
अधिवक्ता विजयसेन यादव ने बताया कि जानकारी के अभाव में भी लोग परेशान होते हैं। जनसेवा केंद्र से भी खतौनी लें तो पोर्टल में शुल्क जमा कर दें तो खतौनी मान्य होगी।
इस तरह बांटा गया सर्वर
सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक खतौनी निकालने का कार्य किया जाता है। दोपहर एक से तीन बजे बजे बैंक में जमीन बंधक की प्रक्रिया दर्ज करने का समय निर्धारित किया गया है। दोपहर तीन से पांच बजे तक रियल टाइम खतौनी में मालगुजारी संशोधन का कार्य किया जाता है। सवा तीन एकड़ या इससे अधिक रकबा वाले किसानों से मालगुजारी जमा कराई जाती है। अब खतौनी के अलग-अलग के खाते के अनुसार मालगुजारी तय करके पोर्टल में फीड किया जा रहा है। संबंधित कार्यों के लोग अपने समय का इंतजार करते हैं, जबकि कई बार निर्धारित समय में भी पोर्टल धोखा दे देता है।
फोटो-
किसान क्रेडिट कार्ड से सहित अन्य योजनाओं में जमीन बंधक करके लोन मंजूर करने का कार्य पोर्टल के माध्यम से हो रहा है। सर्वर नहीं चलने पर कार्य बाधित होता है। बैंक कार्य का समय शुरू होते ही कोशिश की जाती है ताकि अधिक से अधिक आवेदन मंजूर किए जा सकें।
-शशिभूषण शुक्ल, बैंक मैनेजर, इंडियन बैंक मुख्य शाखा
तहसील कार्यालय में खतौनी का एक ही काउंटर है, जबकि सर्वर स्लो और लोगों की समस्या देखते हुए दो काउंटर चलाने चलाने की आवश्यकता है। पहले दिन भर खतौनी की निकालने का कार्य हो रहा था, जबकि अब खतौनी का समय निर्धारित है।
-अरविंद गुप्ता, अधिवक्ता, तहसील सदर
बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड जारी कराने के लिए मुझे एक माह इंतजार करना पड़ा, जबकि खतौनी की नकल लेनी हो तो दिन भर में कार्य नहीं हो पा रहा है। किसान खेती करे कि खतौनी के लिए दौड़ लगाए। किसानों को मजबूरी में दलालों को रुपये देने पड़ रहे हैं।
-रामानंद सिंह, किसान, पिपरा मदन गोपाल, देसही देवरिया
विज्ञापन
यूपी भूलेख के पोर्टल पर ही जमीन को बंधक बनाने का काम कर रहे हैं बैंक
सर्वर बंद होने से खतौनी, रियल टाइम खतौनी के साथ लोन मंजूरी के आवेदन अटक रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। यूपी भूलेख के पोर्टल पर अब खतौनी सहित चार प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। तहसील के साथ बैंक में जमीन बंधक दर्शाकर लोन मंजूर करने का कार्य किया जा रहा है। ओवरलोड के कारण पोर्टल के सर्वर का समय बांट दिया गया है।
इसके बावजूद लोगों की समस्याएं कम नहीं हो रही है। खतौनी से संबंधित कार्य से लेकर बैंक लोन तक के मामलों में काश्तकारों को कई दिन भागदौड़ करने के बाद भी कार्य नहीं हो पा रहा है। इस मामले में शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी जरूरतमंदों को राहत नहीं मिल रही है।
विज्ञापन
यूपी भूलेख के पाेर्टल पर रियल टाइम खतौनी के साथ खतौनी के नकल लेने और मालगुजारी संसोधन के कार्य किए जा रहे हैं। जबकि अब किसान क्रेडिट कार्ड सहित बंधक जमीन के अन्य लोन और एनपीए खाते में आरसी जारी करने का कार्य पोर्टल से ही किया जा रहा है।
विज्ञापन
एक जुलाई 2023 से बंधक भूमि के आधार पर लोन की मंजूरी के कार्य भी पोर्टल के माध्यम से रहा है। तहसील क्षेत्र में 707 गांवों में रियल टाइम खतौनी अपडेट करने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन 52 राजस्व गांवों की खतौनी नहीं बन पाई है। पहले 31 दिसंबर तक कार्य पूरा होना था, लेकिन सर्वर को बार-बार हैंग होने के कारण यह कार्य पूरा नहीं हो पाया। अब 31 मार्च 2024 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जब ओवरलोड सर्वर बैठने लगा तो अलग-अलग कार्यों के सर्वर का समय बांट दिया गया है। इसके बावजूद सर्वर स्लो होने से कार्य अटक रहे हैं।
जमीन बंधक होने पर ही मिलता है लोन
नए नियम के अनुसार, जमीन को बंधक बनाकर लोन देने का कार्य भी पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। ताकि बंधक जमीन को कई बार बंधक करके लोन न मंंजूर किया जाए। जिले में 22 बैंकों की 257 शाखाएं हैं। जहां जमीन के आधार लोन स्वीकृत किए जा रहे हैं। लीड बैंक अधिकारी अरुणेश कुमार ने बताया कि पोर्टल का सर्वर स्लो होने के मामले में जिला प्रशासन से शिकायत की गई है।
प्रमाणित खतौनी को लगती है लाइन
तहसील कार्यालय के यूपी भूलेख काउंटर पर हर दिन 300 से अधिक लोग खतौनी प्राप्त कर रहे हैं। क्योंकि जनसेवा केंद्रों में अवलोकनार्थ खतौनी मिलती है, जो सरकारी कार्याें में मान्य नहीं होती है। काउंटर से खतौनी लेने पर 15 रुपये शुल्क निर्धारित है, जबकि एक से अधिक पेज के लिए दो रुपये प्रति पेज शुल्क जमा करना पड़ता है। काउंटर पर खतौनी की नकल लेने का शुल्क सस्ता है, लेकिन जब लोग परेशान हो जाते हैं। कचहरी के दलालों को रुपये देकर खतौनी प्राप्त करते हैं।
अधिवक्ता विजयसेन यादव ने बताया कि जानकारी के अभाव में भी लोग परेशान होते हैं। जनसेवा केंद्र से भी खतौनी लें तो पोर्टल में शुल्क जमा कर दें तो खतौनी मान्य होगी।
इस तरह बांटा गया सर्वर
सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक खतौनी निकालने का कार्य किया जाता है। दोपहर एक से तीन बजे बजे बैंक में जमीन बंधक की प्रक्रिया दर्ज करने का समय निर्धारित किया गया है। दोपहर तीन से पांच बजे तक रियल टाइम खतौनी में मालगुजारी संशोधन का कार्य किया जाता है। सवा तीन एकड़ या इससे अधिक रकबा वाले किसानों से मालगुजारी जमा कराई जाती है। अब खतौनी के अलग-अलग के खाते के अनुसार मालगुजारी तय करके पोर्टल में फीड किया जा रहा है। संबंधित कार्यों के लोग अपने समय का इंतजार करते हैं, जबकि कई बार निर्धारित समय में भी पोर्टल धोखा दे देता है।
फोटो-
किसान क्रेडिट कार्ड से सहित अन्य योजनाओं में जमीन बंधक करके लोन मंजूर करने का कार्य पोर्टल के माध्यम से हो रहा है। सर्वर नहीं चलने पर कार्य बाधित होता है। बैंक कार्य का समय शुरू होते ही कोशिश की जाती है ताकि अधिक से अधिक आवेदन मंजूर किए जा सकें।
-शशिभूषण शुक्ल, बैंक मैनेजर, इंडियन बैंक मुख्य शाखा
तहसील कार्यालय में खतौनी का एक ही काउंटर है, जबकि सर्वर स्लो और लोगों की समस्या देखते हुए दो काउंटर चलाने चलाने की आवश्यकता है। पहले दिन भर खतौनी की निकालने का कार्य हो रहा था, जबकि अब खतौनी का समय निर्धारित है।
-अरविंद गुप्ता, अधिवक्ता, तहसील सदर
बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड जारी कराने के लिए मुझे एक माह इंतजार करना पड़ा, जबकि खतौनी की नकल लेनी हो तो दिन भर में कार्य नहीं हो पा रहा है। किसान खेती करे कि खतौनी के लिए दौड़ लगाए। किसानों को मजबूरी में दलालों को रुपये देने पड़ रहे हैं।
-रामानंद सिंह, किसान, पिपरा मदन गोपाल, देसही देवरिया