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Deoria News: शहर के कई मोहल्लों की नालियां कचरे से पटीं
Sun, 28 Apr 2024 01:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 28 Apr 2024 01:44 AM IST
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कसया बाइपास रोड के किनारे पेट्रोल पंप के समीप से गोशाला होते हुए पशु अस्पताल तक निर्मित नालियां
फोटो समाचार..........
कूड़ेदान का पता नहीं, नालियों में दिख रहा कूड़े का भरमार
साफ-सफाई के नाम पर खानापूर्ति
बदबू के कारण स्थानीय लोगों का निकलना होता है मुश्किल
सफाई पर हर वर्ष लाखों की धनराशि हो जाती है खर्च फिर अधिकतर नालियां रहती हैं जाम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर क्षेत्र में अधिकतर मोहल्लों व मार्गों पर कूड़ेदान की व्यवस्था होने न होने लोग नालियों में ही कचरा फेंक दे रहे हैं। इसके चलते नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं। नालियों की सफाई पर हर वर्ष लाखों की धनराशि खर्च की जाती है। कचरे के कारण अधिकतर नालियां जाम रहती हैं। यह स्थिति शहर के साकेत नगर, खरजरवा, चकीयवा, रामगुलाम टोला, सीसी रोड, गायत्रीपुरम नवनिर्मित वार्डों में है।
इधर, बरसात के मौसम को देखकर नगर पालिका नालियों की सफाई का कार्य करा रही है। लेकिन, अभी शहर के विभिन्न मोहल्लों की नालियों की स्थिति ऐसी है, जिसे देखकर यही प्रतीत हो रहा है कि उनकी सफाई को महीनों बीत गए है। अगर समय रहते इन नालियों की सफाई नहीं हुई तो इस बरसात में विभिन्न मोहल्लों में जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
नगर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर पालिका की ओर से कई तरह के उपाय किए जाते हैं। इसमें बड़े नाले और नालियों की साफ-सफाई भी है। इसके अलावा, जगह-जगह कूड़ेदान रखने का भी प्रावधान है। लेकिन, आलम यह है कि नगर में केवल कहीं-कहीं ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान न होने के कारण दुकानों का कचरा भी नाले और नालियों में डाल दिया जाता है। इसके चलते नाले हों या नालियां, हमेशा जाम रहता है। इसके चलते पानी बहाव भी बाधित होता है। हर वर्ष बरसात से पूर्व बड़े नाले और नालियों की सफाई अभियान चलाकर कराया जाता है। इस पर नगर पालिका का भारी-भरकम बजट भी खर्च होता है। इसके बावजूद, नालियों को जाम रहित रखने को लेकर ठोस उपाय नहीं किए जाते हैं। वर्तमान में नगर के विभिन्न मोहल्लों के नालियों में कूड़ा व अन्य कचरा फेंका जा रहा है।
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नाले की सफाई पर खर्च होते हैं लाखों रुपये
नगर हर वर्ष बारिश में डूबता है। कई पुराने मोहल्ले के साथ-साथ कई नए मोहल्ले डूब जाते हैं। छह महीने तक समस्या रहती है। कारण कि नाला जाम रहता है। सीवरेज नेटवर्क नहीं होने से समस्या और बढ़ जाती है। इस वर्ष, नगर पालिका ने नगर के सभी बड़े से छोटे नालों की सफाई करा रही है। इस पर लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान है। नगर पालिका से पूछने पर उसके द्वारा नाली सफाई पर किसी प्रकार का बजट प्रस्तावित होने से इन्कार किया गया।
सड़कों से गायब हो गए कूड़ेदान
गांव से लेकर शहर तक को ओडीएफ करने की कवायद शुरू हुई। नगरीय क्षेत्रों में भी लाखों की लागत से जगह-जगह कूड़ेदान रखे गए। लेकिन, धीरे-धीरे सभी कूड़ेदान सड़कों से गायब हो चुके हैं। जहां-तहां ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान नहीं होने के कारण लोग कचरे को नालियों में ही डालना शुरू कर देते हैं।
नहीं हुई सफाई तो जलभराव की समस्या झेलेंगे
हर साल की तरह नालियों के चोक होने से लोगों को जलभराव से जलालत झेलनी पड़ेगी। नगर की नालियों के कूड़ेदान बन जाने से बारिश में शहर के कई मोहल्लों में जलभराव हो जाएगा। नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते शहरवासी परेशान हो गए हैं। नगर में नालियों की सफाई के नाम सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। इससे इस वर्ष भी लोगों को बारिश में राहत मिलती नहीं दिख रही है।
गंदगी व सिल्ट से पट चुकी थी नाली
कसया बाईपास रोड के किनारे पेट्रोल पंप के समीप से गोशाला होते हुए पशु अस्पताल तक निर्मित नालियां पूरी तरह से गंदगी से पटी हुई हैं। नालियों की स्थिति देख कर तो यही प्रतीत होता है कि महीने में एकाध बार सफाई कर्मी जाते भी हैं तो सिर्फ नालियों में पड़ी प्लास्टिक निकालकर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। इसके चलते नाली पूरी तरह से गंदगी व सिल्ट से पट चुकी है।
गंदगी से पटीं नालियां
रागिनी मोड़ के समीप मोहल्ले में हर बार की तरह इस बार भी बारिश के मौसम में नालियों में कूड़ा-करकट जम जाने से लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। बारिश होने पर कूड़ेदान बनीं नालियां पानी को आगे नहीं बढ़ने देंगी। हर साल बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है।
एकाध बार कर दी जाती है सफाई
मेडिकल कॉलेज की चहारदीवारी से सटी नाली की सफाई के लिए महीने में एक बार सफाई कर्मी आते हैं। कचरा बाहर निकालकर चले जाते हैं। उसके बाद बाहर निकाले गए कचरे को उठाने कोई नहीं आता है। इससे वह कचरा फिर उसी नाली में जाकर जाम हो जाता है। हर साल बरसात के मौसम में लोगों को नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
मोहल्ले में कई जगह नालियां हैं क्षतिग्रस्त
नगर पालिका क्षेत्र के सीसी रोड और साकेत नगर में कई जगह नालियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे नाली का पानी आसपास खाली पड़ी जमीन में बह रहा है। अगर उसे नहीं बनाया गया तो बारिश होने पर लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है।
वर्जन
नालियों में कूड़ा-कचरा डालने को लेकर लोगों को भी जागरूक रहना चाहिए। समय-समय पर सफाईकर्मियों से नालियों की सफाई कराई जाती है ताकि जाम की स्थिति न हो। लगातार जागरूक करने के बाद भी लोग कूड़ा-करकट को सफाई कर्मियों को देने व कूड़ा पॉइंट की जगह पर फेंकने के बजाय यहां-वहां फेंक देते हैं। नालियों की सफाई का जहां तक सवाल है, सफाई कराई जा रही है। वार्ड तो बढ़ गए हैं लेकिन कर्मियों की कमी है। फिर भी बरसात से पहले नालियों की सफाई करवा ली जाएगी।
-अंकिता शुक्ला, ईओ
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कूड़ेदान का पता नहीं, नालियों में दिख रहा कूड़े का भरमार
साफ-सफाई के नाम पर खानापूर्ति
बदबू के कारण स्थानीय लोगों का निकलना होता है मुश्किल
सफाई पर हर वर्ष लाखों की धनराशि हो जाती है खर्च फिर अधिकतर नालियां रहती हैं जाम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर क्षेत्र में अधिकतर मोहल्लों व मार्गों पर कूड़ेदान की व्यवस्था होने न होने लोग नालियों में ही कचरा फेंक दे रहे हैं। इसके चलते नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं। नालियों की सफाई पर हर वर्ष लाखों की धनराशि खर्च की जाती है। कचरे के कारण अधिकतर नालियां जाम रहती हैं। यह स्थिति शहर के साकेत नगर, खरजरवा, चकीयवा, रामगुलाम टोला, सीसी रोड, गायत्रीपुरम नवनिर्मित वार्डों में है।
इधर, बरसात के मौसम को देखकर नगर पालिका नालियों की सफाई का कार्य करा रही है। लेकिन, अभी शहर के विभिन्न मोहल्लों की नालियों की स्थिति ऐसी है, जिसे देखकर यही प्रतीत हो रहा है कि उनकी सफाई को महीनों बीत गए है। अगर समय रहते इन नालियों की सफाई नहीं हुई तो इस बरसात में विभिन्न मोहल्लों में जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
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नगर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर पालिका की ओर से कई तरह के उपाय किए जाते हैं। इसमें बड़े नाले और नालियों की साफ-सफाई भी है। इसके अलावा, जगह-जगह कूड़ेदान रखने का भी प्रावधान है। लेकिन, आलम यह है कि नगर में केवल कहीं-कहीं ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान न होने के कारण दुकानों का कचरा भी नाले और नालियों में डाल दिया जाता है। इसके चलते नाले हों या नालियां, हमेशा जाम रहता है। इसके चलते पानी बहाव भी बाधित होता है। हर वर्ष बरसात से पूर्व बड़े नाले और नालियों की सफाई अभियान चलाकर कराया जाता है। इस पर नगर पालिका का भारी-भरकम बजट भी खर्च होता है। इसके बावजूद, नालियों को जाम रहित रखने को लेकर ठोस उपाय नहीं किए जाते हैं। वर्तमान में नगर के विभिन्न मोहल्लों के नालियों में कूड़ा व अन्य कचरा फेंका जा रहा है।
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नाले की सफाई पर खर्च होते हैं लाखों रुपये
नगर हर वर्ष बारिश में डूबता है। कई पुराने मोहल्ले के साथ-साथ कई नए मोहल्ले डूब जाते हैं। छह महीने तक समस्या रहती है। कारण कि नाला जाम रहता है। सीवरेज नेटवर्क नहीं होने से समस्या और बढ़ जाती है। इस वर्ष, नगर पालिका ने नगर के सभी बड़े से छोटे नालों की सफाई करा रही है। इस पर लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान है। नगर पालिका से पूछने पर उसके द्वारा नाली सफाई पर किसी प्रकार का बजट प्रस्तावित होने से इन्कार किया गया।
सड़कों से गायब हो गए कूड़ेदान
गांव से लेकर शहर तक को ओडीएफ करने की कवायद शुरू हुई। नगरीय क्षेत्रों में भी लाखों की लागत से जगह-जगह कूड़ेदान रखे गए। लेकिन, धीरे-धीरे सभी कूड़ेदान सड़कों से गायब हो चुके हैं। जहां-तहां ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान नहीं होने के कारण लोग कचरे को नालियों में ही डालना शुरू कर देते हैं।
नहीं हुई सफाई तो जलभराव की समस्या झेलेंगे
हर साल की तरह नालियों के चोक होने से लोगों को जलभराव से जलालत झेलनी पड़ेगी। नगर की नालियों के कूड़ेदान बन जाने से बारिश में शहर के कई मोहल्लों में जलभराव हो जाएगा। नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते शहरवासी परेशान हो गए हैं। नगर में नालियों की सफाई के नाम सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। इससे इस वर्ष भी लोगों को बारिश में राहत मिलती नहीं दिख रही है।
गंदगी व सिल्ट से पट चुकी थी नाली
कसया बाईपास रोड के किनारे पेट्रोल पंप के समीप से गोशाला होते हुए पशु अस्पताल तक निर्मित नालियां पूरी तरह से गंदगी से पटी हुई हैं। नालियों की स्थिति देख कर तो यही प्रतीत होता है कि महीने में एकाध बार सफाई कर्मी जाते भी हैं तो सिर्फ नालियों में पड़ी प्लास्टिक निकालकर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। इसके चलते नाली पूरी तरह से गंदगी व सिल्ट से पट चुकी है।
गंदगी से पटीं नालियां
रागिनी मोड़ के समीप मोहल्ले में हर बार की तरह इस बार भी बारिश के मौसम में नालियों में कूड़ा-करकट जम जाने से लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। बारिश होने पर कूड़ेदान बनीं नालियां पानी को आगे नहीं बढ़ने देंगी। हर साल बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है।
एकाध बार कर दी जाती है सफाई
मेडिकल कॉलेज की चहारदीवारी से सटी नाली की सफाई के लिए महीने में एक बार सफाई कर्मी आते हैं। कचरा बाहर निकालकर चले जाते हैं। उसके बाद बाहर निकाले गए कचरे को उठाने कोई नहीं आता है। इससे वह कचरा फिर उसी नाली में जाकर जाम हो जाता है। हर साल बरसात के मौसम में लोगों को नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
मोहल्ले में कई जगह नालियां हैं क्षतिग्रस्त
नगर पालिका क्षेत्र के सीसी रोड और साकेत नगर में कई जगह नालियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे नाली का पानी आसपास खाली पड़ी जमीन में बह रहा है। अगर उसे नहीं बनाया गया तो बारिश होने पर लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है।
वर्जन
नालियों में कूड़ा-कचरा डालने को लेकर लोगों को भी जागरूक रहना चाहिए। समय-समय पर सफाईकर्मियों से नालियों की सफाई कराई जाती है ताकि जाम की स्थिति न हो। लगातार जागरूक करने के बाद भी लोग कूड़ा-करकट को सफाई कर्मियों को देने व कूड़ा पॉइंट की जगह पर फेंकने के बजाय यहां-वहां फेंक देते हैं। नालियों की सफाई का जहां तक सवाल है, सफाई कराई जा रही है। वार्ड तो बढ़ गए हैं लेकिन कर्मियों की कमी है। फिर भी बरसात से पहले नालियों की सफाई करवा ली जाएगी।
-अंकिता शुक्ला, ईओ