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कुशीनगर में आते हैं जिले का एक गांव और दो मजरे

Thu, 10 Sep 2020 11:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2020 11:21 PM IST
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one village come in kushinager
कुशीनगर में आते हैं जिले का एक गांव और दो मजरे
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देसही देवरिया (देवरिया)। लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर जिले को दो भागों में बांटकर कुशीनगर को नया जिला तो बना दिया गया, लेकिन कुछ समस्याएं आज भी यथावत हैं।
पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र का एक गांव, दो गांवों के दो मजरे आज भी कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र में पड़ते हैं। ऐसे में यहां के लोगों को प्रशासकीय कार्यों के लिए दोनों जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे उनको तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि ये गांव विकास कार्यों से भी अछूते हैं।
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देवरिया जिले का एरिया बड़ा होने की वजह से 13 मई 1994 को कुशीनगर को नया जिला बनाया गया है। जिले के पथरदेवा विधानसभा और बैतालपुर विकास खंड के घुड़ी पाकड़ न्याय पंचायत के करज ग्राम सभा और उसका बेहनी टोला, चैनपुर का कन्हौली टोला और घुड़ी पाकड़ का अमवां टोला कुशीनगर के हाटा कोतवाली में पड़ते हैं।
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दिलचस्प बात यह भी है कि घुड़ी पाकड़ के अन्य दो टोला नरायनपुर गौरीबाजार जबकि घुडी पाकड़ रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र में आते हैं। हालांकि 2010 में क्षेत्र के विक्रम विशुनपुर, रामपुर गौनरिया, अमारी झांगा आदि गांवों को हाटा कोतवाली से हटा कर जिले के थानों से जोड़ दिया गया। यहां के लोगों को राजस्व आदि कार्यों के लिए जिले में आना पड़ता है। जबकि थाना से जुड़े कार्यों के लिए हाटा और कुशीनगर मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। करज गांव के प्रधान अखिलेश कुमार सिंह, घुड़ी पाकड़ गांव के प्रधान घनश्याम प्रसाद और चैनपुर के प्रधानपति रामदयाल ने बताया कि दो जिलों पर निर्भरता की वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

पासपोर्ट बनवाने में दो जिलों की जांच पड़ताल में कभी-कभी महीनों लग जाते हैं। राजस्व एवं फौजदारी मुकदमों के निपटारे में दोनों जिलों का चक्कर लगाना पड़ता है। पत्र व्यवहार आदि में भी समस्याएं होती हैं। लोगों ने इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
इनसेट में-
इन गांवों की आबादी
करज गांव की आबादी 2280, घुड़ी पाकड़ की 4000, चैनपुर की 2500 के करीब है।
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