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देवरिया में गर्मी से 53 लोगों की मौत: इमरजेंसी में अफरातफरी, चीखते- चिल्लाते रहे परिजन, खींच रहे थे स्ट्रेचर

Mon, 19 Jun 2023 12:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया। Updated Mon, 19 Jun 2023 12:18 PM IST
सार

इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. सीपी तिवारी ने कहा कि तेज गर्मी के कारण इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। लू लगने व गर्मी से बुखार, सांस में दिक्कत, बेहोशी की हालत सहित अन्य परेशानी के मरीज आ रहे हैं। करीब छह-सात मौत हर रोज हो रही है। लोगों को धूप से बचना चाहिए।
 

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53 death due to heat stoke in deoria news update
अधिक गर्मी पड़ने के कारण मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में ऑक्सीजन के सहारे भर्ती मरीज। संवाद

विस्तार

देवरिया जिले में पड़री बाजार निवासी भाजपा नेता विमलचंद्र पांडेय के इकलौते पुत्र सौरभ कुमार पांडेय (27) की तबीयत रात में अचानक खराब हो गई। उन्हें उल्टी हो रही थी। परिजन सौरभ को लेकर जिला अस्पताल गए, जहां उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि हीट स्ट्रोक की वजह से सौरभ की मौत हुई है।

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इसी तरह भीखमपुर रोड निवासी सुरेश तिवारी की पत्नी निर्मला देवी (65) को अचानक सांस फूलने की शिकायत हुई। परिजन इमरजेंसी लेकर पहुंचे। इंजेक्शन लगाया गया, लेकिन कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
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शहर के हनुमान मंदिर के पास रहने वाली लाची देवी (70) को सुबह 8.50 बजे परिजन लेकर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। दोघड़ा निवासी वशिष्ठ दूबे (78) को करीब नौ बजे भर्ती कराया गया। उन्हें बुखार व सांस लेने में दिक्कत थी। इलाज के बाद आराम न होने पर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
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तरकुलवा क्षेत्र के पिपरा निवासी चंद्रिका सिंह (73) को लेकर परिजन सुबह 9.45 बजे अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। भलुअनी के करौंदी निवासी आनंद मिश्रा अपनी मां बादमी देवी (65) को लेकर 10.45 बजे अस्पताल पहुंचे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। रुद्रपुर के खजुहा निवासी रामअधार को लेकर परिजन पहुंचे। भर्ती करने के कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। इनके अलावा अधिकतर मरीज ऐसे आए जिन्हें इमरजेंसी के बाहर ही डॉक्टर ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। इनके परिजन शव लेकर घर चले गए। इनका कोई रिकॉर्ड नहीं है।

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इमरजेंसी में अफरातफरी, चीखते- चिल्लाते रहे परिजन, खींच रहे थे स्ट्रेचर

भीषण गर्मी में रविवार को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में अफरातफरी का माहौल रहा। कोई मरीज अचेत होकर पहुंच रहा था तो कोई हांफते हुए। एक के बाद एक एंबुलेंस इमरजेंसी के गेट पर खड़ी हो रहीं थीं। ई-रिक्शा, ऑटो और बाइक से भी मरीज आ रहे थे। मरीजों की संख्या अधिक होने से बेड मिलने में परेशानी हो रही थी।

कई मरीजों को फर्श और स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया गया। ऐसे मरीजों के तीमारदार पंखा झलते रहे। अस्पताल के कर्मचारी भी बेबस नजर आ रहे थे। तीमारदारों को स्ट्रेचर खींचना पड़ रहा था। कोई अपने मरीज को गोद में उठाकर डॉक्टर के पास पहुंच रहा था। कई लोग दूसरे का सहारा लेकर डॉक्टर के पास पहुंच रहे थे।

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कई मरीज फर्श पर पड़े थे। उन्हें बेड मिलने का इंतजार था। बेबस तीमारदार बेड मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। तेज बुखार, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत, बदन में अकड़न, खाना नहीं खाना, खांसी, कमजोरी, पेट दर्द, घबराहट, बेचैनी आदि से पीड़ित मरीज इमरजेंसी में पहुंच रहे थे। अधिकतर लोग एंबुलेंस नहीं मिलने की शिकायत कर रहे थे।

 

इमरजेंसी पर खड़ा रहा शव वाहन, जिम्मेदार बनाते रहे बहाना

भलुअनी थाना क्षेत्र के करौंदी गांव निवासी आनंद मिश्रा की मां बादामी देवी की रविवार को मौत हो गई। इसके बाद वह शव वाहन के लिए भटकते रहे। आंखों में आंसू लिए आनंद इमरजेंसी में आने वाले हर किसी से वाहन की गुहार लगा रहे थे। डॉक्टर ने बताया कि एक वाहन रात में चलता है। दूसरा वाहन खराब है।

इसे सिस्टम की गड़बड़ी मानें या लापरवाही, आनंद मिश्रा स्ट्रेचर पर मां का शव रखकर उसी के नीचे सिर पर हाथ रखकर शव वाहन का इंतजार कर रहे थे। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि दो घंटे बाद शव वाहन आएंगा। लेकिन हकीकत यह थी कि दोनों वाहन इमरजेंसी में खड़े थे, लेकिन आनंद को उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे।

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मां के शव के पास बैठकर वह घंटों सरकारी वाहन का इंतजार करते रहे। अंत में जब उन्हें लगा कि सिस्टम उनकी नहीं सुनेगा तो उन्होंने ऑटो रिक्शा बुलाया और पांच सौ रुपये देकर मां का शव ऑटो में रखकर घर ले गए।

शव वाहन चालक जितेंद्र ने कहा कि गर्मी से इतने लोग मर रहे हैं कि हम लोगों को एक मिनट की फुर्सत नहीं मिल रही है। 25-30 शव ढोने से हालत खराब हो गई है।

पांच मंजिली इमारत, 220 बेड, पीने का पानी का इंतजाम नहीं

मेडिकल कॉलेज करोड़ों रुपये से बना है। पांच मंजिला भवन में 220 बेड की व्यवस्था है, लेकिन पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। तीमारदार मनोज कुमार ने बताया कि मरीज को भर्ती किए हुए 24 घंटे हुए हैं। पीने के पानी पर चार सौ रुपये खर्च हो गए हैं। इसी तरह अन्य कई मरीजों ने बताया कि पूरी बिल्डिंग में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में बोतल बंद पानी खरीदना पड़ रहा है। काफी दूर लगा एक आरओ खराब हो गया है।

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हीट स्ट्रोक को देखते हुए दस बेड का वार्ड बनाया गया
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हीट स्ट्रोक को देखते हुए तैयारी की है। पुराने भवन में दस बेड का एक वार्ड बनाया गया है, जहां पंखा और एक एसी लगाया गया है, लेकिन वार्ड बंद है। उसमें अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है।

श्मशान घाट पर दाह संस्कार की संख्या हुई दोगुनी

गर्मी से मरने वालों की संख्या इधर के कुछ दिनों में काफी बढ़ी है। इसके चलते दाह संस्कार के प्रमुख घाट भागलपुर और बरहज में शव जलाने की संख्या बढ़ी है। पहले 15-20 शवों का दाह संस्कार होता था अब 40 से अधिक का दाह संस्कार किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, भागलपुर के सरयू नदी के तट पर स्थित कालीचरण घाट पर बीते चार दिनों से दाह संस्कार की संख्या दो से ढाई गुना बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को दाह संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। नंबर लग रहा है।

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पहले इस घट पर 15-20 शव का दाह संस्कार किया जाता था। अब हर रोज 40-50 शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है। शिव शंकर जायसवाल, शम्भू जायसवाल, ओमप्रकाश पांडेय, दशरथ साहनी आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घाट पर दूर दराज से लोग शव को जलाने आते हैं। जब से भीषण गर्मी पड़ रही है शवों की संख्या बढ़ गई है। शनिवार को 32 और रविवार की शाम तक 38 शवों को उनके परिजन मुखाग्नि दे चुके थे। इस घाट पर न तो रोशनी की व्यवस्था है न ही पीने का पानी मिलता है।

इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. सीपी तिवारी ने कहा कि तेज गर्मी के कारण इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। लू लगने व गर्मी से बुखार, सांस में दिक्कत, बेहोशी की हालत सहित अन्य परेशानी के मरीज आ रहे हैं। करीब छह-सात मौत हर रोज हो रही है। लोगों को धूप से बचना चाहिए।


 
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