Gold Smuggler: सोने की तस्करी में बुजुर्ग महिला है माहिर खिलाड़ी, बिहार की सीमा का उठाती है लाभ
करीब एक माह पहले भटनी जीआरपी ने चांदी के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद चर्चा हुई थी कि पकड़े गए तस्कर के पास से सोना भी बरामद हुआ था, लेकिन वह कहां चला गया, इसके बारे में पता नहीं चल सका। इसके चलते एक बात तो साफ है कि ट्रेनों में हर वक्त मौजूद रहने वाली पुलिस की नजर आखिर सोना तस्करों पर क्यों नहीं पड़ रही है।
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सोना तस्करी के गिरोह में युवाओं से लगायत बुजुर्ग तक शामिल हैं। जनपद से बिहार की सीमा सटी होने के कारण ट्रेन के रास्ते पुलिस की सेटिंग से पूरा खेल चल रहा है। गैर प्रांत के रहने वाला एक शख्स ने जनपद की कई दुकानों पर अपना जाल बिछा रखा है।
मंगलवार को सोने के बिस्कुट के साथ पकड़े गए तस्कर अमित ने कई खुलासे किए हैं। शहर के गायत्रीपुरम निवासी अमित का बड़ा नेटवर्क है। पुलिस सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो शहर के कई ऐसे तस्कर हैं, जिनका नेटवर्क दिल्ली, कोलकाता, म्यांमार, भैरहवां से जुड़ा हुआ है। एक बुजुर्ग महिला के बारे में चर्चा है कि वह 65 की उम्र पार करने के बाद भी सोना तस्करी के खेल की माहिर खिलाड़ी है।
हर हफ्ते अपने निजी साधन से दिल्ली से उसका आना-जाना होता है। एक सफेदपोश नेता के बारे में भी बताया जा रहा है कि उसके भी संबंध सोना तस्करों से है। गैर प्रांत निवासी एक व्यक्ति काका के नाम से चर्चित है। इस व्यक्ति के अधिकांश बड़े आभूषण के व्यवसायियों से संबंध हैं। इसकी पूर्वांचल के हर जनपदों में नाम के लिए एक दुकान भी है, जो अक्सर बंद रहती है। पूरा गिरोह एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।
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अमित की भी है दुकान, नेहा करती थी वहां काम
शहर के गायत्रीपुरम मोहल्ला निवासी अमित की आर्यसमाज गली में दुकान है। इसी दुकान पर नेहा काम करती है। इसके पिता की भी दुकान है। पर अमित पिता से अलग हटकर रहता है। एक बार रुपये के लेन-देन में भी इसी की दुकान के पास बम से हमला भी किया गया था। पुलिस सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो अमित के सोना तस्करों से गहरे ताल्लुकात हैं। वह काफी समय से इस धंधे में लिप्त है, जबकि दूसरी तरफ चर्चा है कि नेहा उसकी दुकान पर काम करती थी, जिसे कस्टम ने पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया है।
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आभूषण की दुकानों में दिन दोगुना, रात चौगुना होती गई वृद्धि
शहर में करीब एक दशक पहले गिनी-चुनी सौ दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन इस समय हालत है कि शहर में करीब दो हजार हो चुकी हैं, जबकि पूरे जनपद में इनकी संख्या दस हजार पहुंच चुकी है। सर्राफ के सम्मानित कार्य पर कुछ शातिर दाग लगाने का काम कर रहे हैं। डाई का काम करने वाले कुछ ऐसे भी युवक हैं, जो तस्करों से सोना खरीद कर गलाने का काम कमीशन पर करते हैं। इतना ही नहीं चोरी का माल भी कुछ दुकानदार खरीदते हैं। अभी कुछ दिन पहले एक दुकानदार को चोरी का माल खरीदने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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पुलिस की भी है सेटिंग
करीब एक माह पहले भटनी जीआरपी ने चांदी के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद चर्चा हुई थी कि पकड़े गए तस्कर के पास से सोना भी बरामद हुआ था, लेकिन वह कहां चला गया, इसके बारे में पता नहीं चल सका। इसके चलते एक बात तो साफ है कि ट्रेनों में हर वक्त मौजूद रहने वाली पुलिस की नजर आखिर सोना तस्करों पर क्यों नहीं पड़ रही है। इतना ही नहीं जिले की पुलिस को भी तस्करों के बारे में भनक तक नहीं लग पा रही है। एसओ जीआरपी सुधाकर उपाध्याय ने बताया कि ट्रेनों में चेकिंग के दौरान कई बार बदमाशों को पकड़ा जा चुका है। पकड़े गए तस्करों से कुछ सुराग मिले हैं, इस गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।