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Deoria News: श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मंचन देख भावुक हुए श्रद्धालु
Sat, 21 Jun 2025 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 21 Jun 2025 12:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
मईल। देवरहा बाबा आश्रम में चल रहे सात दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में वृंदावन से आए कलाकारों ने रासलीला मेंं शुक्रवार को श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता और माखन चोरी की लीला का मंचन हुआ। इसे देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
लीला के मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि जब सुदामा की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई तो उनकी पत्नी उन्हें उनके बाल सखा श्रीकृष्ण के पास जाने के लिए कहा। जाते समय भेंट में देने के लिए थोड़ा चावल पोटली में बांधकर दे दी।
वहां पहुंचने पर श्रीकृष्ण के दरबारी सुदामा का फटा-पुराना कपड़ा और हाल देखकर मजाक बनाते हैं और भगवान श्रीकृष्ण से मुलाकात नहीं कराते। इससे मायूस होकर सुदामा घर लौटने लगते हैं।
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श्रीकृष्ण अपनी अंतर दृष्टि से सबकुछ देख लेते हैं और सुदामा को लाने के लिए पैदल ही दौड़ पड़ते हैं। पकड़ कर गले मिलने के बाद वह सुदामा को महल में ले आते हैं। इसके बाद वहां की लीला का मंचन होता है। जब सुदामा गांव लौटते हैं तो वहां पक्का महल और शान शौकत देख दंग रह जाते हैं। अपने घर का रास्ता ही भूल जाते हैं। उनकी पत्नी उन्हें घर ले जाती हैं। वह बताती हैं कि ऐसा श्रीकृष्ण की कृपा से हुआ है।
इस दौरान हरिराम दास, पूर्व विधायक स्वामी नाथ, सुरेंद्र सिंह, अंगद तिवारी, डाॅ.राममनोहर मणि त्रिपाठी, कन्हैया तिवारी, माता प्रसाद पांडेय, विनोद चौधरी, रामबोध सिंह, ओमकार मिश्र आदि मौजूद रहे।
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मईल। देवरहा बाबा आश्रम में चल रहे सात दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में वृंदावन से आए कलाकारों ने रासलीला मेंं शुक्रवार को श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता और माखन चोरी की लीला का मंचन हुआ। इसे देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
लीला के मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि जब सुदामा की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई तो उनकी पत्नी उन्हें उनके बाल सखा श्रीकृष्ण के पास जाने के लिए कहा। जाते समय भेंट में देने के लिए थोड़ा चावल पोटली में बांधकर दे दी।
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वहां पहुंचने पर श्रीकृष्ण के दरबारी सुदामा का फटा-पुराना कपड़ा और हाल देखकर मजाक बनाते हैं और भगवान श्रीकृष्ण से मुलाकात नहीं कराते। इससे मायूस होकर सुदामा घर लौटने लगते हैं।
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श्रीकृष्ण अपनी अंतर दृष्टि से सबकुछ देख लेते हैं और सुदामा को लाने के लिए पैदल ही दौड़ पड़ते हैं। पकड़ कर गले मिलने के बाद वह सुदामा को महल में ले आते हैं। इसके बाद वहां की लीला का मंचन होता है। जब सुदामा गांव लौटते हैं तो वहां पक्का महल और शान शौकत देख दंग रह जाते हैं। अपने घर का रास्ता ही भूल जाते हैं। उनकी पत्नी उन्हें घर ले जाती हैं। वह बताती हैं कि ऐसा श्रीकृष्ण की कृपा से हुआ है।
इस दौरान हरिराम दास, पूर्व विधायक स्वामी नाथ, सुरेंद्र सिंह, अंगद तिवारी, डाॅ.राममनोहर मणि त्रिपाठी, कन्हैया तिवारी, माता प्रसाद पांडेय, विनोद चौधरी, रामबोध सिंह, ओमकार मिश्र आदि मौजूद रहे।