Deoria News: ऑपरेशन में लापरवाही पर डॉक्टर, मैनेजर समेत सात पर केस दर्ज
सीएमओ राजेश झा ने डिप्टी सीएमओ आरपी यादव को मेडिवेव हॉस्पिटल का जांच करने का निर्देश दिया है। इस अस्पताल का नवीनीकरण अभी तक नहीं हो सका है। इसकी वजह कागजी प्रक्रिया का पूरा नहीं होना बताया जा रहा है।
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पथरी के ऑपरेशन के दौरान महिला की हुई मौत के मामले में पुलिस ने डॉक्टर, मैनेजर समेत पांच अज्ञात अस्पतालकर्मियों पर केस दर्ज कर लिया है। महिलाओं के सड़क पर उतरने के बाद दबाव में आई पुलिस ने आनन-फानन में केस दर्ज किया है। कार्रवाई के बाद आरोपी फरार हो गए हैं।
बघौचघाट थाना क्षेत्र के विशुनपुरा गांव निवासी 35 वर्षीय रिंकी देवी को पथरी थी। ननद कांती देवी उन्हें लेकर 27 नवंबर को आईटीआई के पास मेडिवेव हॉस्टिपल पर लेकर पहुंचीं। पूरे दिन जांच कराने के बाद देर शाम को रिंकी को ओटी में बुलाया गया। डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर और कर्मचारी ओटी से हड़बड़ाहट में बाहर निलके। संदेह होने पर कांती ओटी में गईं तो एक महिला स्टाॅफ सीने पर पंप कर रही थी।
भाभी को इस हालत में देख कांती शोर मचाने लगीं। हंगामा बढ़ा तो अस्पताल के कर्मचारी रिंकी को जिंदा बताकर गोरखपुर हॉयर सेंटर पर इलाज कराने की बात कह एंबुलेंस से लेकर गोरखपुर के एक निजी अस्पताल पहुंचे और बाहर छोड़कर भाग गए। उसके बाद घर वाले शव को लेकर बघौचघाट थाने पर लेकर पहुंचे।
पुलिस ने शव को कब्जे लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बिसरा सुरक्षित होने के बाद बघौचघाट पुलिस केस दर्ज करने से कतराने लगी और सीएमओ भी निजी अस्पताल की जांच करने से परहेज करने लगे। बृहस्पतिवार को कांती देवी के साथ क्षेत्र की महिलाएं प्रदर्शन करती हुई सीएमओ कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने निजी अस्पताल को सील करने और संचालक पर कार्रवाई के लिए शिकायती पत्र दिया।
इसके बाद महिलाओं ने एसपी संकल्प शर्मा से मिलकर कार्रवाई की मांग की। एसपी तक मामला पहुंचने के बाद आनन-फानन पुलिस ने मेडिवेव हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. पीएन कुशवाहा, हॉस्पिटल के मैनेजर संतोष चौहान और अज्ञात स्पतालकर्मियों पर मारपीट और गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया। सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
सीएमओ राजेश झा ने डिप्टी सीएमओ आरपी यादव को मेडिवेव हॉस्पिटल का जांच करने का निर्देश दिया है। इस अस्पताल का नवीनीकरण अभी तक नहीं हो सका है। इसकी वजह कागजी प्रक्रिया का पूरा नहीं होना बताया जा रहा है। निजी अस्पताल संचालक पर कार्रवाई के बाद शहर में अवैध तरीके से निजी अस्पताल का संचालन करने वालों में हड़कंप मच गया है।