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अस्पताल में बेड फुल, पैंतीस बेड पर पचास बच्चे भर्ती
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में एक बेड पर भर्ती दो दो बच्चे।
- फोटो : DEORIA
अस्पताल में बेड फुल, पैंतीस बेड पर पचास बच्चे भर्ती
- बुखार, सर्दी-खांसी, सांस, उल्टी दस्त से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे अस्पताल
- बीमार बच्चों की भीड़ से कम पड़ रहे बेड, कई बेड पर दो-दो का चल रहा उपचार
देवरिया। मौसम में आए बदलाव का असर बच्चों पर पड़ रहा है और बीमार पड़ रहे हैं। इससे बुखार, निमोनिया, सांस, उल्टी दस्त से ग्रसित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में बेड फुल हो गए हैं। पैंतीस बेड पर पचास बच्चों का इलाज चल रहा है। है। कई बेड पर दो बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। यहां की व्यवस्था लड़खड़ा गई है। इससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानी हो रही है। कुछ दवाओं को भी बाहर से लाना पड़ रहा है।
मौसम का मिजाज बदलने से बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ रही है। वायरल की चपेट में आने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में शहर से लेकर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती इलाके के लोग इलाज कराने आते हैं। इस समय अस्पताल में बीमार बच्चों की संख्या में इजाफा हो गया है। हर रोज बुखार, सर्दी-खांसी, निमोनिया, सांस, उल्टी, दस्त से पीड़ित मरीज बढ़ रहे हैं। तेज बुखार के कारण झटके से पीड़ित बच्चे भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। रविवार को अस्पताल के वार्ड कम पड़ गए थे। क्षमता से अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। थोड़ा आराम मिलने पर छुट्टी देने के बाद ही बेड भर जा रहे थे। पंद्रह बेड के पीआईसीयू में इक्कीस बच्चे भर्ती किए गए थे। कुछ एक बेड पर दो- दो बच्चों का इलाज चल रहा था। यहीं हाल बीस के चिल्ड्रेन वार्ड का था। उसमें 29 बच्चे भर्ती थे। मजबूरी में कुछ बेड पर दो-दो बच्चों को रखा गया था। इसके चलते तीमारदारों तथा बच्चों को दिक्कत उठानी पड़ रही थी। तीमरदारों को कुछ दवा बाहर से लानी पड़ी। बेड न होने से कुछ लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा।
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चिल्ड्रेन वार्ड के बाहर नहीं है बैठने का इंतजाम
अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती एक मरीज के साथ कई लोग आते हैं, लेकिन वार्ड के बाहर तीमारदारों के बैठने के लिए व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें परेशानी होती है। वे हॉल में फर्श पर बैठकर समय काटते हैं। वहीं पीआईसीयू के बाहर बेंच तथा बरामदे में कुर्सी लगी है, लेकिन इस समय कम पड़ जा रही है।
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यह बरतें सावधानी
- सुबह-शाम पूरी बांह का कपड़ा पहनें
- सोते समय मच्छरदानी व मॉस्किटो क्रीम आदि को प्रयोग करें
- ताजा व मौसम के अनुरूप सादा, सुपाच्य भोजन को सेवन करें
- साफ- सफाई पर ध्यान दें, घर के आसपास पानी न जमा होने दें
- स्वच्छ पानी का सेवन करें- सड़क किनारे खुले में बिकने वाले कटे फल व अन्य खाद्य पदार्थ का सेवन न करें
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मौसम बदलने से वायरस का संक्रमण बढ़ जाता है। सर्दी शुरू होने से कम कम्युनिटी क्षमता के लोग बीमारी की चपेट में आते हैं। वहीं देर से बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, उसकी चपेट में भी लोग आ रहे हैं। मौसम का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इन दिनों अस्पताल में बुखार, निमोनिया, सांस, सर्दी, खांसी, उल्टी, दस्त से पीड़ित अधिक बच्चे आ रहे हैं। इस समय सावधानी बरतने के साथ बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है। तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराएं। अस्पताल में इलाज की सुविधा है। मरीजों की अचानक भीड़ से असुविधा हुई। दवाएं उपलब्ध हैं, जो नहीं है, उसे मंगाने की प्रक्रिया चल रही है।
- डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल रोग विशेषज्ञ
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- बुखार, सर्दी-खांसी, सांस, उल्टी दस्त से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे अस्पताल
- बीमार बच्चों की भीड़ से कम पड़ रहे बेड, कई बेड पर दो-दो का चल रहा उपचार
देवरिया। मौसम में आए बदलाव का असर बच्चों पर पड़ रहा है और बीमार पड़ रहे हैं। इससे बुखार, निमोनिया, सांस, उल्टी दस्त से ग्रसित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में बेड फुल हो गए हैं। पैंतीस बेड पर पचास बच्चों का इलाज चल रहा है। है। कई बेड पर दो बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। यहां की व्यवस्था लड़खड़ा गई है। इससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानी हो रही है। कुछ दवाओं को भी बाहर से लाना पड़ रहा है।
मौसम का मिजाज बदलने से बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ रही है। वायरल की चपेट में आने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में शहर से लेकर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती इलाके के लोग इलाज कराने आते हैं। इस समय अस्पताल में बीमार बच्चों की संख्या में इजाफा हो गया है। हर रोज बुखार, सर्दी-खांसी, निमोनिया, सांस, उल्टी, दस्त से पीड़ित मरीज बढ़ रहे हैं। तेज बुखार के कारण झटके से पीड़ित बच्चे भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। रविवार को अस्पताल के वार्ड कम पड़ गए थे। क्षमता से अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। थोड़ा आराम मिलने पर छुट्टी देने के बाद ही बेड भर जा रहे थे। पंद्रह बेड के पीआईसीयू में इक्कीस बच्चे भर्ती किए गए थे। कुछ एक बेड पर दो- दो बच्चों का इलाज चल रहा था। यहीं हाल बीस के चिल्ड्रेन वार्ड का था। उसमें 29 बच्चे भर्ती थे। मजबूरी में कुछ बेड पर दो-दो बच्चों को रखा गया था। इसके चलते तीमारदारों तथा बच्चों को दिक्कत उठानी पड़ रही थी। तीमरदारों को कुछ दवा बाहर से लानी पड़ी। बेड न होने से कुछ लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा।
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चिल्ड्रेन वार्ड के बाहर नहीं है बैठने का इंतजाम
अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती एक मरीज के साथ कई लोग आते हैं, लेकिन वार्ड के बाहर तीमारदारों के बैठने के लिए व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें परेशानी होती है। वे हॉल में फर्श पर बैठकर समय काटते हैं। वहीं पीआईसीयू के बाहर बेंच तथा बरामदे में कुर्सी लगी है, लेकिन इस समय कम पड़ जा रही है।
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यह बरतें सावधानी
- सुबह-शाम पूरी बांह का कपड़ा पहनें
- सोते समय मच्छरदानी व मॉस्किटो क्रीम आदि को प्रयोग करें
- ताजा व मौसम के अनुरूप सादा, सुपाच्य भोजन को सेवन करें
- साफ- सफाई पर ध्यान दें, घर के आसपास पानी न जमा होने दें
- स्वच्छ पानी का सेवन करें- सड़क किनारे खुले में बिकने वाले कटे फल व अन्य खाद्य पदार्थ का सेवन न करें
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मौसम बदलने से वायरस का संक्रमण बढ़ जाता है। सर्दी शुरू होने से कम कम्युनिटी क्षमता के लोग बीमारी की चपेट में आते हैं। वहीं देर से बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, उसकी चपेट में भी लोग आ रहे हैं। मौसम का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इन दिनों अस्पताल में बुखार, निमोनिया, सांस, सर्दी, खांसी, उल्टी, दस्त से पीड़ित अधिक बच्चे आ रहे हैं। इस समय सावधानी बरतने के साथ बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है। तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराएं। अस्पताल में इलाज की सुविधा है। मरीजों की अचानक भीड़ से असुविधा हुई। दवाएं उपलब्ध हैं, जो नहीं है, उसे मंगाने की प्रक्रिया चल रही है।
- डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल रोग विशेषज्ञ