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Deoria News: जीरो प्रतिशत ब्याज के नाम पर किस्तों में महंगा पड़ रहा मोबाइल
Mon, 21 Sep 2026 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:30 AM IST
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देवरिया। जीरो प्रतिशत ब्याज पर मोबाइल खरीदने का ऑफर ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है मगर किस्तों की कुल रकम जोड़ने पर कई मामलों में मोबाइल नकद खरीद से महंगा पड़ रहा है। प्रोसेसिंग फीस, सुविधा शुल्क और किस्त समय पर न कटने की स्थिति में लगने वाले अतिरिक्त चार्ज ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ा रहे हैं। कई ग्राहक केवल मासिक किस्त देखकर मोबाइल खरीद रहे हैं और बाद में कुल भुगतान अधिक होने की बात सामने आ रही है।
शहर के मोबाइल बाजार में अलग-अलग फाइनेंस योजनाओं के तहत जीरो प्रतिशत ब्याज पर फोन दिए जा रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक, कई योजनाओं में 500 से 800 रुपये तक प्रोसेसिंग फीस ली जा रही है। इसके अलावा नकद खरीद पर मिलने वाली छूट किस्तों वाली खरीद में नहीं मिलने से भी कीमत का अंतर बढ़ जाता है। ऐसे में ब्याज शून्य दिखने के बावजूद ग्राहक को मोबाइल की वास्तविक कीमत से अधिक रकम चुकानी पड़ सकती है।
ग्राहकों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी तब खड़ी होती है, जब खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने या किसी अन्य कारण से तय तारीख पर किस्त नहीं कटती। ऐसे मामलों में अलग-अलग फाइनेंस कंपनियों और योजनाओं के अनुसार 500 से 2,000 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क लगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई बार बाउंस शुल्क के साथ देरी का अलग चार्ज भी जुड़ जाता है।
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ग्राहक संदीप यादव ने बताया कि मोबाइल लेते समय बताया गया था कि ब्याज नहीं लगेगा। बाद में प्रोसेसिंग फीस अलग से जुड़ी मिली। मासिक किस्त कम लगी थी, इसलिए शुरुआत में कुल भुगतान पर ध्यान नहीं दिया। अब समझ में आया कि नकद कीमत से तुलना जरूरी है। ग्राहक नीलू ने बताया कि एक बार खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने से किस्त समय पर नहीं कट सकी। बाद में अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा। जीरो प्रतिशत ब्याज सुनकर लगा था कि कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होगा, लेकिन देरी होने पर रकम बढ़ गई।
दुकानदार राजेश गुप्ता ने बताया कि जीरो प्रतिशत ब्याज वाली योजना में ग्राहक अक्सर केवल मासिक किस्त देखते हैं। अलग-अलग फाइनेंस कंपनियों में प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज शुल्क या अन्य चार्ज अलग होते हैं।
कारोबारी अमित वर्मा ने बताया कि कई ग्राहक नकद और किस्त की कुल कीमत की तुलना नहीं करते। कुछ योजनाओं में नकद खरीद पर छूट मिल जाती है, जबकि किस्त वाली खरीद पर वही छूट नहीं मिलती। ऐसे में ब्याज शून्य होने के बाद भी अंतिम कीमत बढ़ सकती है।
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शहर के मोबाइल बाजार में अलग-अलग फाइनेंस योजनाओं के तहत जीरो प्रतिशत ब्याज पर फोन दिए जा रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक, कई योजनाओं में 500 से 800 रुपये तक प्रोसेसिंग फीस ली जा रही है। इसके अलावा नकद खरीद पर मिलने वाली छूट किस्तों वाली खरीद में नहीं मिलने से भी कीमत का अंतर बढ़ जाता है। ऐसे में ब्याज शून्य दिखने के बावजूद ग्राहक को मोबाइल की वास्तविक कीमत से अधिक रकम चुकानी पड़ सकती है।
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ग्राहकों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी तब खड़ी होती है, जब खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने या किसी अन्य कारण से तय तारीख पर किस्त नहीं कटती। ऐसे मामलों में अलग-अलग फाइनेंस कंपनियों और योजनाओं के अनुसार 500 से 2,000 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क लगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई बार बाउंस शुल्क के साथ देरी का अलग चार्ज भी जुड़ जाता है।
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ग्राहक संदीप यादव ने बताया कि मोबाइल लेते समय बताया गया था कि ब्याज नहीं लगेगा। बाद में प्रोसेसिंग फीस अलग से जुड़ी मिली। मासिक किस्त कम लगी थी, इसलिए शुरुआत में कुल भुगतान पर ध्यान नहीं दिया। अब समझ में आया कि नकद कीमत से तुलना जरूरी है। ग्राहक नीलू ने बताया कि एक बार खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने से किस्त समय पर नहीं कट सकी। बाद में अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा। जीरो प्रतिशत ब्याज सुनकर लगा था कि कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होगा, लेकिन देरी होने पर रकम बढ़ गई।
दुकानदार राजेश गुप्ता ने बताया कि जीरो प्रतिशत ब्याज वाली योजना में ग्राहक अक्सर केवल मासिक किस्त देखते हैं। अलग-अलग फाइनेंस कंपनियों में प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज शुल्क या अन्य चार्ज अलग होते हैं।
कारोबारी अमित वर्मा ने बताया कि कई ग्राहक नकद और किस्त की कुल कीमत की तुलना नहीं करते। कुछ योजनाओं में नकद खरीद पर छूट मिल जाती है, जबकि किस्त वाली खरीद पर वही छूट नहीं मिलती। ऐसे में ब्याज शून्य होने के बाद भी अंतिम कीमत बढ़ सकती है।