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ाख में जिंदगी ढूंढ रहे अग्रिकांड पीड़ित
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राख में उम्मीदें ढूंढ रहा नत्थू का परिवार
खुखुंदू कस्बे में अगलगी में राख हो गए सारे अरमान
न तो ऑर्डर पर तैयार हुआ सामान बचा ना ही बचीं लकड़ियां
विनय कुमार राय
खुखुंदू। पाई-पाई जोड़कर फर्नीचर की दुकान खोले नत्थू विश्वकर्मा के सारे अरमान सोमवार को आग में जलकर राख हो गए हैं। अब न तो ऑर्डर पर तैयार सामान बचा है और न ही कोई जमा पूंजी। खाने के भी लाले पड़ गए हैं। परिवार अब राख में आगे की जिंदगी जीने का जरिया ढूंढ रहा है। उसे इंतजार है कि मदद के लिए कोई मसीहा आए जो उनकी जिंदगी को फिर संवार दे।
बरहज थानाक्षेत्र के सिसई गुलाब राय निवासी नत्थू विश्वकर्मा ने एक दशक पूर्व खुखुंदू में मामूली मामूली रकम से फर्नीचर का कारोबार शुरू किया। परिवार में आठ सदस्यों का खर्च चलाने के लिए वह दिन-रात मेहनत करते रहे। लकड़ी के ठेकेदार या बड़े कारोबारी नत्थू को उधार पर बेहिचक लकड़ी दे देते थे। नत्थू ने अपने परिश्रम की बदौलत व्यवसाय को बढ़ाते हुए तकरीबन 15 से 20 लाख रुपये की पूंजी तैयार कर ली थी। मई में केवल उसे 18 अदद बेड और सोफा सेट देने थे। इसमें तैयार दस अदद बेड और उसके सोफे आग में जल गए। बाकी 30 तैयार तख्ता, दस साखू के कीमती चौखट, तकरीबन चार लाख रुपये से अधिक की लकड़ियां रखी गई थीं, वह भी सब जल गए। इतना ही नहीं जेनरेटर, वेल्डिंग मशीन सहित अन्य सारा औजार भी नहीं बचा है। नत्थू पूरे परिवार के साथ दुकान में ही रहता था। अगलगी से परिवार के पास सिर्फ शरीर पर पहने हुए कपड़े ही बचा हैं। नत्थू का कहना है कि तमाम कारोबारियों से लकड़ी लिया था, सबको लगन में रुपये देने का वादा किया था। अब कारोबारी का दबाव अलग और ऑर्डर देने वाले लोगों का दबाव अलग झेलना पड़ेगा। घटना के बाद नत्थू का परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। रात को स्थानीय लोगों के सहयोग से परिवार को भोजन मिला। पूरा परिवार खुले आसमान तले रात गुजारा। मंगलवार की सुबह बगल के लोगों ने पीड़ित परिवार को एक कमरा दिया। बाजार के कुछ व्यवसायियों ने बाजार में घूम-घूमकर चंदा एकत्र कर पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान की। घटना को लेकर हर कोई मर्माहत है। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से पीड़ित परिवार को सहायता दिलाने की मांग की है।
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खुखुंदू कस्बे में अगलगी में राख हो गए सारे अरमान
न तो ऑर्डर पर तैयार हुआ सामान बचा ना ही बचीं लकड़ियां
विनय कुमार राय
खुखुंदू। पाई-पाई जोड़कर फर्नीचर की दुकान खोले नत्थू विश्वकर्मा के सारे अरमान सोमवार को आग में जलकर राख हो गए हैं। अब न तो ऑर्डर पर तैयार सामान बचा है और न ही कोई जमा पूंजी। खाने के भी लाले पड़ गए हैं। परिवार अब राख में आगे की जिंदगी जीने का जरिया ढूंढ रहा है। उसे इंतजार है कि मदद के लिए कोई मसीहा आए जो उनकी जिंदगी को फिर संवार दे।
बरहज थानाक्षेत्र के सिसई गुलाब राय निवासी नत्थू विश्वकर्मा ने एक दशक पूर्व खुखुंदू में मामूली मामूली रकम से फर्नीचर का कारोबार शुरू किया। परिवार में आठ सदस्यों का खर्च चलाने के लिए वह दिन-रात मेहनत करते रहे। लकड़ी के ठेकेदार या बड़े कारोबारी नत्थू को उधार पर बेहिचक लकड़ी दे देते थे। नत्थू ने अपने परिश्रम की बदौलत व्यवसाय को बढ़ाते हुए तकरीबन 15 से 20 लाख रुपये की पूंजी तैयार कर ली थी। मई में केवल उसे 18 अदद बेड और सोफा सेट देने थे। इसमें तैयार दस अदद बेड और उसके सोफे आग में जल गए। बाकी 30 तैयार तख्ता, दस साखू के कीमती चौखट, तकरीबन चार लाख रुपये से अधिक की लकड़ियां रखी गई थीं, वह भी सब जल गए। इतना ही नहीं जेनरेटर, वेल्डिंग मशीन सहित अन्य सारा औजार भी नहीं बचा है। नत्थू पूरे परिवार के साथ दुकान में ही रहता था। अगलगी से परिवार के पास सिर्फ शरीर पर पहने हुए कपड़े ही बचा हैं। नत्थू का कहना है कि तमाम कारोबारियों से लकड़ी लिया था, सबको लगन में रुपये देने का वादा किया था। अब कारोबारी का दबाव अलग और ऑर्डर देने वाले लोगों का दबाव अलग झेलना पड़ेगा। घटना के बाद नत्थू का परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। रात को स्थानीय लोगों के सहयोग से परिवार को भोजन मिला। पूरा परिवार खुले आसमान तले रात गुजारा। मंगलवार की सुबह बगल के लोगों ने पीड़ित परिवार को एक कमरा दिया। बाजार के कुछ व्यवसायियों ने बाजार में घूम-घूमकर चंदा एकत्र कर पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान की। घटना को लेकर हर कोई मर्माहत है। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से पीड़ित परिवार को सहायता दिलाने की मांग की है।
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