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जागृति से पड़ी भोजपुरी कॉल सेंटर की बुनियाद
Updated Tue, 09 Jan 2018 10:59 PM IST
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देवरिया के बैतालपुर में जागृति यात्रा की कोशिशों से शुरू हुआ भोजपुरी काल सेंटर। अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जागृति यात्रा के सालाना सिलसिले के 10वें वर्ष में आने तक स्वउद्यम के प्रति जागृति जिले में जमीनी हकीकत बनने लगी है। शहर से सटे कस्बे बैतालपुर में ‘भोजपुरी कॉल सेंटर’ की स्थापना इसकी बड़ी मिसाल है। करीब छह माह पूर्व इसकी नींव पड़ी थी और इस वक्त आसपास के 200 से ज्यादा युवक-युवतियां इस सेंटर से रोजगार पा रहे हैं।
मुंबई से 24 दिसंबर को सफर की शुरुआत करने वाली जागृति यात्रा की विशेष ट्रेन इस दफा जब बरपार गांव (देवरिया) में रात्रि विश्राम के लिए पहुंची तो वहां के बौद्धिक सत्र में इस विशेष कॉल सेंटर की चर्चा रही। जागृति यात्रा के 10वें संस्करण में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका में रहा। स्वरोजगार को बढ़ावा देने का संदेश लेकर निकली इस यात्रा का पिछले कई साल से हिस्सा बन रहे युवाओं ने बैतालपुर के कॉल सेंटर को जिले में स्वउद्यम बढ़ाने का सशक्त माध्यम माना। बताया गया कि रूरल सोर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वोडाफोन के सहयोग से इस कॉल सेंटर को खासकर कस्टमर केयर सेंटर पर भोजपुरी में आने वाली फोन कॉल के लिए स्थापित किया गया। देवरिया, आसपास ही नहीं बिहार के वोडाफोन धारकों में बड़ी संख्या ऐसी है जो अपने संवाद के लिए सिर्फ भोजपुरी पर निर्भर हैं। ऐसे में जहां भोजपुरी के जानकार नौजवानों को घर के करीब ही कॉल सेंटर कर्मी के तौर पर काम करने का अवसर मिला, वहीं फोन कंपनी को हिंदी-अंग्रेजी की जगह भोजपुरी में संवाद के आदी उपभोक्ताओं को साधने में मदद मिली।
कॉल सेंटर संचालकों ने बताया कि यहां प्रतिदिन 15000 भोजपुरी कॉल के औसत से स्टाफ की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस होने लगी है। आने वाले दिनों में यह कॉल सेंटर औसतन 500 युवाओं के रोजगार का सेंटर बन जाएगा।
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कई और काम को मिला मुकाम
देवरिया। ग्रामीण और निरक्षर महिलाओं को भी नेट के प्रति जागृत करने के लिए जागृति सेवा संस्थान की ओर से ‘इंटरनेट साथी’ की शुरुआत की गई है। संस्था की ओर से न्याय पंचायत स्तर पर स्वयंसेवक रखकर स्मार्ट फोन और टैबलेट दिया गया है। इसकी मदद से वे आसपास की महिलाओं को डिजिटल साक्षरता का पाठ पढ़ा रही हैं। कुछ समय में जहां करीब दो हजार युवक-युवतियां इस तरह के प्रशिक्षक की भूमिका में आगे आए हैं, वहीं डिजिटल साक्षरता के इस अभियान को देवरिया के बाद कुशीनगर, गोरखपुर, महराजगंज, संतकबीर नगर, मऊ और बलिया जिले तक विस्तार मिला है।
‘पुस्तक हल्दी’ नाम से देवरिया, कुशीनगर के बड़े भाग में पैदा होने वाली हल्दी को विकसित बाजार दिलाने की तैयारी है, जबकि ‘रूरल रूट्स’ के नाम से स्थानीय स्तर पर घर-घर तैयार होने वाले लोकप्रिय अचारों को भी बड़ा मुकाम दिलाने की योजना है। देवरिया के एक दर्जन से अधिक गांवों में सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, पेंटिंग, ब्यूटीशियन के प्रशिक्षण से किशोरी और युवतियों को इसे रोजगार की तरह विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जागृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष शशांक मणि त्रिपाठी का कहना है कि सब कुछ ऐसे ही चला तो कस्बों-गांवों में स्वउद्यम के मामले में देवरिया देश के लिए मॉडल होगा। देवरिया मॉडल को ऊंचाई दिलाने के लिए हर जागृति यात्री संकल्पबद्ध है।
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मुंबई से 24 दिसंबर को सफर की शुरुआत करने वाली जागृति यात्रा की विशेष ट्रेन इस दफा जब बरपार गांव (देवरिया) में रात्रि विश्राम के लिए पहुंची तो वहां के बौद्धिक सत्र में इस विशेष कॉल सेंटर की चर्चा रही। जागृति यात्रा के 10वें संस्करण में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका में रहा। स्वरोजगार को बढ़ावा देने का संदेश लेकर निकली इस यात्रा का पिछले कई साल से हिस्सा बन रहे युवाओं ने बैतालपुर के कॉल सेंटर को जिले में स्वउद्यम बढ़ाने का सशक्त माध्यम माना। बताया गया कि रूरल सोर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वोडाफोन के सहयोग से इस कॉल सेंटर को खासकर कस्टमर केयर सेंटर पर भोजपुरी में आने वाली फोन कॉल के लिए स्थापित किया गया। देवरिया, आसपास ही नहीं बिहार के वोडाफोन धारकों में बड़ी संख्या ऐसी है जो अपने संवाद के लिए सिर्फ भोजपुरी पर निर्भर हैं। ऐसे में जहां भोजपुरी के जानकार नौजवानों को घर के करीब ही कॉल सेंटर कर्मी के तौर पर काम करने का अवसर मिला, वहीं फोन कंपनी को हिंदी-अंग्रेजी की जगह भोजपुरी में संवाद के आदी उपभोक्ताओं को साधने में मदद मिली।
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कॉल सेंटर संचालकों ने बताया कि यहां प्रतिदिन 15000 भोजपुरी कॉल के औसत से स्टाफ की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस होने लगी है। आने वाले दिनों में यह कॉल सेंटर औसतन 500 युवाओं के रोजगार का सेंटर बन जाएगा।
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कई और काम को मिला मुकाम
देवरिया। ग्रामीण और निरक्षर महिलाओं को भी नेट के प्रति जागृत करने के लिए जागृति सेवा संस्थान की ओर से ‘इंटरनेट साथी’ की शुरुआत की गई है। संस्था की ओर से न्याय पंचायत स्तर पर स्वयंसेवक रखकर स्मार्ट फोन और टैबलेट दिया गया है। इसकी मदद से वे आसपास की महिलाओं को डिजिटल साक्षरता का पाठ पढ़ा रही हैं। कुछ समय में जहां करीब दो हजार युवक-युवतियां इस तरह के प्रशिक्षक की भूमिका में आगे आए हैं, वहीं डिजिटल साक्षरता के इस अभियान को देवरिया के बाद कुशीनगर, गोरखपुर, महराजगंज, संतकबीर नगर, मऊ और बलिया जिले तक विस्तार मिला है।
‘पुस्तक हल्दी’ नाम से देवरिया, कुशीनगर के बड़े भाग में पैदा होने वाली हल्दी को विकसित बाजार दिलाने की तैयारी है, जबकि ‘रूरल रूट्स’ के नाम से स्थानीय स्तर पर घर-घर तैयार होने वाले लोकप्रिय अचारों को भी बड़ा मुकाम दिलाने की योजना है। देवरिया के एक दर्जन से अधिक गांवों में सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, पेंटिंग, ब्यूटीशियन के प्रशिक्षण से किशोरी और युवतियों को इसे रोजगार की तरह विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जागृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष शशांक मणि त्रिपाठी का कहना है कि सब कुछ ऐसे ही चला तो कस्बों-गांवों में स्वउद्यम के मामले में देवरिया देश के लिए मॉडल होगा। देवरिया मॉडल को ऊंचाई दिलाने के लिए हर जागृति यात्री संकल्पबद्ध है।