{"_id":"594410db4f1c1bb37b8b46c7","slug":"101497632987-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बनकटा में सता के हनक में बन गई 50 लाख की सड़कें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनकटा में सता के हनक में बन गई 50 लाख की सड़कें
Updated Fri, 16 Jun 2017 10:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। सत्ता के हनक में बिना कार्य योजना बनाए अफसरों ने बनकटा ब्लॉक में 50 लाख से अधिक का इंटरलॉकिंग और खडंजा गांवों में बनवा दिया। भुगतान फंसने के बाद इसकी शिकायत सीडीओ तक पहुंची तो जिम्मेदार अफसर पल्ला झाड़ते हुए नियम कानून की बात करने लगे। अगर इसकी ईमानदारी से जांच हो जाए तो कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है। सीडीओ ने आख्या डीसी मनरेगा से मांगा है।
बनकटा ब्लॉक में करीब 25 इंटरलॉकिंग और खड़ंजा का निर्माण कराने के लिए पिछले कार्यकाल में विधायक आशुतोष उपाध्याय ने आयुक्त स्व रोजगार देवरिया को पत्र लिखा। विधायक ने अपने पत्र में जनहित के मामले में निर्माण कार्य कराना जरूरी होने का जिक्र किया। सत्ताधारी विधायक का पत्र आने के बाद अफसर हरकत में आ गए और नियम को ताक पर रख वर्ष 2015-16 में मनरेगा के तहत पिपरा उत्तर पट्टी, करजनिया, सिरिसिया पवार समेत कई गांवों में निर्माण कार्य करा दिए। ठेकेदारों का आरोप है कि इसमें काम करने वाले कुछ मनरेगा मजदूरों का अफसरों ने भुगतान किया है। लेकिन निर्माण कार्य का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। फर्म मालिक मनोज, पप्पू और विजय दुबे का कहना है कि तत्कालीन बीडीओ रामअधार राम और बाबू के कहने पर सड़कों का निर्माण कराया गया है। दोनों अधिकारियों ने भुगतान के लिए एक साल से दौड़ा रहे हैं। सीडीओ के पास ठेकेदार पहुंचे तो जानकारी हुआ कि बिना वित्तीय स्वीकृति लिए निर्माण कार्य करा दिया गया है। सीडीओ राजेश कुमार त्यागी ने बताया कि मामला गंभीर है। डीसी मनरेगा को जांचकर आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इसमें दोषी पाए जाने वाले अफसरों पर कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
बनकटा ब्लॉक में करीब 25 इंटरलॉकिंग और खड़ंजा का निर्माण कराने के लिए पिछले कार्यकाल में विधायक आशुतोष उपाध्याय ने आयुक्त स्व रोजगार देवरिया को पत्र लिखा। विधायक ने अपने पत्र में जनहित के मामले में निर्माण कार्य कराना जरूरी होने का जिक्र किया। सत्ताधारी विधायक का पत्र आने के बाद अफसर हरकत में आ गए और नियम को ताक पर रख वर्ष 2015-16 में मनरेगा के तहत पिपरा उत्तर पट्टी, करजनिया, सिरिसिया पवार समेत कई गांवों में निर्माण कार्य करा दिए। ठेकेदारों का आरोप है कि इसमें काम करने वाले कुछ मनरेगा मजदूरों का अफसरों ने भुगतान किया है। लेकिन निर्माण कार्य का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। फर्म मालिक मनोज, पप्पू और विजय दुबे का कहना है कि तत्कालीन बीडीओ रामअधार राम और बाबू के कहने पर सड़कों का निर्माण कराया गया है। दोनों अधिकारियों ने भुगतान के लिए एक साल से दौड़ा रहे हैं। सीडीओ के पास ठेकेदार पहुंचे तो जानकारी हुआ कि बिना वित्तीय स्वीकृति लिए निर्माण कार्य करा दिया गया है। सीडीओ राजेश कुमार त्यागी ने बताया कि मामला गंभीर है। डीसी मनरेगा को जांचकर आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इसमें दोषी पाए जाने वाले अफसरों पर कार्रवाई होगी।
विज्ञापन