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भूलना चाहते हैं दर्दनाक मंजर

Sat, 27 Feb 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट Updated Sat, 27 Feb 2016 11:41 PM IST
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Want to forget the painful scene
बगैहापुरवा के सामूहिक नरसंहार का दंश झेल रहे भुक्तभोगी परिवार की महिलाएं व बच्चों के मन में शायद अभी भी कुछ भय है। तभी तो फैसले के बाद बस इतना कहा कि हां सुनै हन के गांवन के कुछ लोगन का फांसी की सजा दीन गै हवै। ज्यादातर भुक्तभोगी परिवार की एक राय थी कि वह इसे भूलना चाहते हैं। नरसंहार में मरने वालों की याद आते ही उनकी आंखों के सामने वह दर्दनाक नजारा आता है, तो रोएं खडे़ हो जाते हैं।
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विधवा जानकी देवी ने बताया कि उसके पति राम किशोर की गोली लगने से मौत हुई थी। इसके बाद अपने दोनों पुत्र पवन व दीपक को लेकर भरतकूप क्षेत्र में रहकर मजदूरी कर परिवार पाला। विधवा मुन्नी देवी ने बताया कि उसके पति समेत पुत्र की भी आग में झुलस कर मौत हो गई। इसके बाद इकलौते भागवत को लेकर अपने रिश्तेदार के घर चली गई थी। मजदूरी करके बच्चे को पढ़ाया। अब उसका पुत्र प्राइवेट नौकरी कर परिवार चला रहा है। इसी प्रकार रसोइया देवी ने बताया कि नरसंहार में पति को खोने के बाद दो पुत्र व दो पुत्रियों को लेकर जिला छोड़ चुकी थीं। जब 2007 में ठोकिया की मौत हो गई तो दो साल बाद ही गांव लौटे।
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