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भूले नहीं भूलती वो वारदात, कहीं बबुली जिंदा तो नहीं

Mon, 21 Oct 2019 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2019 11:15 PM IST
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The incident does not forget, Babuli is alive somewhere
चित्रकूट। कुख्यात डाकू बबुली कोल व लवलेश के मारे जाने के बाद भी उनके गांव डोडामाफी में अभी भी उनके नाम का खौफ है। यह सही है कि इस चुनाव में न फरमान था और न ही कोई प्रतिबंध। सभी ने अपने मनपसंद प्रत्याशी को वोट देने घर से निकले। इसके बावजूद 8 अगस्त 2012 की वह दहशत व रक्तरंजित रात किसी को नहीं भूलती।
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जब डाकू बलखड़िया के साथ डाकू बबुली व लवलेश ने मिलकर गांव के पूर्व प्रधान सरोज देवी व कोटेदार दुर्गा के घर में मौत का खेल खेला था। इसी खौफ को याद कर इस परिवार व आस पास के लोग दबी जुबान में कह उठते हैं कि अभी शायद बबुली व लवलेश डाकू जिंदा हैं। पुलिसिया कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
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गांव के रामदयाल ने बताया कि सात साल पहले कुख्यात डाकुओं ने उसके घर में धावा बोलकर माता-पिता समेत पांच परिजनों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद से परिजन पलायन कर गए थे। अब कुछ परिजन इसी गांव लौट आए हैं लेकिन आधा परिवार मानिकपुर में ही रहता है। उसके साथ मौजूद पूरन, किशन, लालू, रामनिरंजन, रामयश, अनिल व अन्य ने कहा कि इस चुनाव में तो कहीं डर नहीं लगा लेकिन पता नहीं क्यों लगता है कि दोनों डाकू जिंदा हैं। मध्य प्रदेश पुलिस ने मारने का दावा किया लेकिन उनके शव ग्रामीणों को नहीं दिखाए और न ही उनका गांव लाकर अंतिम संस्कार हुआ जिससे वह जान नहीं पा रहे हैं कि दोनों मरे कि नहीं। ऐसे डाकुओं को मरना ही सही है।
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