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मौसम की बेरूखी से किसानों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा

Wed, 22 Jan 2020 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 11:51 PM IST
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The farmers are suffering due to the harsh weather
फोटो- 1- सरैंया गांव में ओलावृष्टि व बारिश से खराब हुई फसल - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। मौसम की बेरुखी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बारिश के साथ कई बार ओलावृष्टि होने से किसानों की फसलें नष्ट हो गई । वही महीनों से बदली छाने व कोहरा होेने से फसल मेें पाला पड़ गया है। जिससे किसानों की फसल नष्ट हो रही है। जिन किसानों ने देर से गेहूं की बुआई किया है उसके बीज भी सड़ गए। इस साल दिसंबर माह से मौसम बदला रहता है। जनवरी के प्रथम सप्ताह में बारिश होने से मऊ क्षेत्र के वियावल, ताड़ी, सकरौंहा, चकौर, विसौंधा, धुनवा, देउधा, कटैयाखादर, बराछी, सिलौटा, करही, बेरठी, लुधौरा, व रामनगर सहित मानिकपुर क्षेत्र के चंद्रामारा, सरैंया, गढ़चपा, सेमरहदा, अमचेरूनेरूआ, छेछरिया, किहुनिया, जोरामाफी, इटावा, आदि गांवा में ओलावृष्टि हुई थी। जिससे किसानों की फसल नष्ठ हो गई थी। यह बात प्रशासनिक अधिकारियों ने सर्वेक्षण कराने के बाद भी मानी है। वह आए दिन बारिश होने के साथ ही कोहरा छाया रहता हैं। जिससे पाला पड़ने से अरहर, मसूर की फसल खराब हो रही है। जबकि सरसों की फसल में माहूं व कीटपंतग होने से नुकसान हो रहा है। इस साल गेहूं की फसल की बुआई किसानों ने देर से किया। मौसम सही न होने के कारण खेतों में नमीं अधिक होने के कारण बीज बरबाद हो गए। वही कई किसानों ने खेतोें में नमी अधिक होने के कारण बीज ही नहीं बोए। एडीएम जीपी सिंह ने बताया कि मौसम के खराब होेने व ओलावृष्टि से किसानों की फसल के नुकसान का सर्वे कराकर शासन को भेजा गया है।
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मानिकपुर- मऊ का कराया सर्वे
चित्रकूट। प्रशासनिक अधिकारियों ने बीते दिनों ओलावृष्टि व बारिश होने से जो सर्वे कराया है। उसमेें सबसे अधिक नुकसान मऊ व मानिकपुर क्षेत्र में हुआ है। जैसे सरसों, अरहर, मसूर और जौ को नुकसान हुआ है। मऊ क्षेत्र के सिलौटा, देवीपुर, जोरवारा, करही, धुनुवा, विसौंधा, बराछी, ताड़ी, चकौरा, कटैयाखादर, रामनगर में में सर्वे के आधार पर चना दस 15 प्रतिशत, गेहूं 20 से 25, सरसो 10 से 15, जौ 3 से 15 प्रतिशत नुकसान हुआ। इसी तरह से मानिकपुर तहसील के किहुनिया, चंद्रामारा, अमचेरूनेरूआ, छेछरिया, चंद्रामारा, इटवा, में भी इन फसलों को 10 से 20 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है।
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