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Chitrakoot News: पुलिस के पहुंचने से पहले शातिर सौरभ मिश्रा बदल देता ठिकाना
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- टेलीग्राम पर प्रतिबंधित सामग्री परोसने वाले का असली नाम और ठिकाना तक पता नहीं चल सका
-10 ठिकानों पर दबिश के बाद भी हाथ खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। टेलीग्राम पर प्रतिबंधित सामग्री परोसने वाला शातिर साइबर टीम के लिए पहेली बन गया है। आरोपी सौरभ मिश्रा अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। हैरत की बात यह है कि पुलिस को अभी तक उसका असली नाम और ठिकाना तक पता नहीं चल सका है। आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर के सहारे 10 ठिकानों पर दबिश दी गई लेकिन आरोपी हर बार पुलिस को चकमा देकर निकल गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी नाम-पते से टेलीग्राम चैनल बनाकर लगातार प्रतिबंधित और आपत्तिजनक कंटेंट अपलोड किया। शिकायत के बाद साइबर सेल ने जाल बिछाया लेकिन आरोपी उससे भी शातिर निकला। वीपीएन (आईपी एड्रेस छिपाकर लोकेशन को गुप्त रखने वाला एप) और फर्जी सिम के जरिए वह अपनी लोकेशन बदल-बदल कर पुलिस को गुमराह कर रहा है।
साइबर एक्सपर्ट उसके डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रहे हैं, पर हर बार नया ठिकाना सामने आ रहा है। पुरानी बाजार समेत शहर के कई संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई, मगर आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। लिस का दावा है कि आरोपी के सोशल अकाउंट और टेलीग्राम लिंक से जुड़े अहम सबूत हाथ लगे हैं। सर्विलांस टीम जांच में जुटी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। आशंका है कि इस खेल में उसके कई साथी भी शामिल हैं।
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उधर, इस मामले से जेई रामभवन के चर्चित प्रकरण को जोड़ने की भी चर्चा थी। पुलिस ने इस पर विराम लगाते हुए साफ किया कि दोनों मामलों का कोई संबंध नहीं है। जेई रामभवन का मामला पुराना है, जिसकी जांच सीबीआई पूरी कर चुकी है और केस अब कोर्ट में है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक या प्रतिबंधित सामग्री को फॉरवर्ड न करें, नहीं तो आप भी अपराध की जद में आ सकते हैं।
बोले जिम्मेदार
आरोपी सौरभ मिश्रा के असली ठिकाने का पता लगाया जा रहा है। पुरानी बाजार में उसके घर की तलाश के लिए टीमें लगी हैं। अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से ट्रेस किया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद ही अन्य साथियों व गिरोह के बारे में जानकारी मिल सकेगी।- अरुण कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक।
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-10 ठिकानों पर दबिश के बाद भी हाथ खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। टेलीग्राम पर प्रतिबंधित सामग्री परोसने वाला शातिर साइबर टीम के लिए पहेली बन गया है। आरोपी सौरभ मिश्रा अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। हैरत की बात यह है कि पुलिस को अभी तक उसका असली नाम और ठिकाना तक पता नहीं चल सका है। आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर के सहारे 10 ठिकानों पर दबिश दी गई लेकिन आरोपी हर बार पुलिस को चकमा देकर निकल गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी नाम-पते से टेलीग्राम चैनल बनाकर लगातार प्रतिबंधित और आपत्तिजनक कंटेंट अपलोड किया। शिकायत के बाद साइबर सेल ने जाल बिछाया लेकिन आरोपी उससे भी शातिर निकला। वीपीएन (आईपी एड्रेस छिपाकर लोकेशन को गुप्त रखने वाला एप) और फर्जी सिम के जरिए वह अपनी लोकेशन बदल-बदल कर पुलिस को गुमराह कर रहा है।
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साइबर एक्सपर्ट उसके डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रहे हैं, पर हर बार नया ठिकाना सामने आ रहा है। पुरानी बाजार समेत शहर के कई संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई, मगर आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। लिस का दावा है कि आरोपी के सोशल अकाउंट और टेलीग्राम लिंक से जुड़े अहम सबूत हाथ लगे हैं। सर्विलांस टीम जांच में जुटी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। आशंका है कि इस खेल में उसके कई साथी भी शामिल हैं।
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उधर, इस मामले से जेई रामभवन के चर्चित प्रकरण को जोड़ने की भी चर्चा थी। पुलिस ने इस पर विराम लगाते हुए साफ किया कि दोनों मामलों का कोई संबंध नहीं है। जेई रामभवन का मामला पुराना है, जिसकी जांच सीबीआई पूरी कर चुकी है और केस अब कोर्ट में है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक या प्रतिबंधित सामग्री को फॉरवर्ड न करें, नहीं तो आप भी अपराध की जद में आ सकते हैं।
बोले जिम्मेदार
आरोपी सौरभ मिश्रा के असली ठिकाने का पता लगाया जा रहा है। पुरानी बाजार में उसके घर की तलाश के लिए टीमें लगी हैं। अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से ट्रेस किया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद ही अन्य साथियों व गिरोह के बारे में जानकारी मिल सकेगी।- अरुण कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक।