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Chitrakoot News: आरोपी की करतूत ने खत्म कर दिया खुशहाल परिवार
Sun, 22 Feb 2026 11:13 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:13 PM IST
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चित्रकूट। बहिलपुरवा थाना क्षेत्र में करीब तीन साल पहले हुई दिल को दहलाने वाली घटना में अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया है। आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी एक युवक को 10साल के कारावास की सजा दी गई थी। इस फैसले से इलाके में दो वर्ष 11 माह व 7 दिन पुरानी उस दिल दहला देने वाली घटना की यादें ताजा हो गई हैं, जिसने एक खुशहाल परिवार को पूरी तरह खत्म कर दिया था।
यह घटना साल 2023 में बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। उस समय, एक परिवार अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ सामान्य जीवन जी रहा था। उनकी बड़ी बेटी पढ़ाई में बहुत तेज थी और डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। उसकी पढ़ाई बेहतर हो सके, इसके लिए उसे ननिहाल भेजा गया था और उसे एक मोबाइल फोन भी दिलाया गया था।
स्कूल में रहने कारण बची छोटी बेटी की जान
गांव के लोगों ने बताया कि की कक्षा आठ में पढ़ने वाली छोटी बेटी घटना के समय स्कूल में पढ़ने के लिए गई थी। अगर वह भी घर में होती तो आज घर का कोई नहीं बचता। पिता वैसे शांत स्वभाव का था। वीडियो को देखकर उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ और इतना बड़ा कदम उठा लिया।
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बंदूक का शौकीन था पिता, दो साल पहले लिया था लाइसेंस
पिता बंदूक रखने के लिए शौकीन था। पशुमित्र के रूप में काम करने के बाद भी वह लाइसेंसी बंदूक घर में रखे था। इसके अलावा भी वह कई प्रकार की बंदूकों को कट्टे को लेकर इंटरनेट पर खोज करता रहता था। उसका मानना था कि इससे परिवार की सुरक्षा बनी रहेगी। उसने बंदूक का लाइसेंस करीब 2020 में लिया था।
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यह घटना साल 2023 में बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। उस समय, एक परिवार अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ सामान्य जीवन जी रहा था। उनकी बड़ी बेटी पढ़ाई में बहुत तेज थी और डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। उसकी पढ़ाई बेहतर हो सके, इसके लिए उसे ननिहाल भेजा गया था और उसे एक मोबाइल फोन भी दिलाया गया था।
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स्कूल में रहने कारण बची छोटी बेटी की जान
गांव के लोगों ने बताया कि की कक्षा आठ में पढ़ने वाली छोटी बेटी घटना के समय स्कूल में पढ़ने के लिए गई थी। अगर वह भी घर में होती तो आज घर का कोई नहीं बचता। पिता वैसे शांत स्वभाव का था। वीडियो को देखकर उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ और इतना बड़ा कदम उठा लिया।
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बंदूक का शौकीन था पिता, दो साल पहले लिया था लाइसेंस
पिता बंदूक रखने के लिए शौकीन था। पशुमित्र के रूप में काम करने के बाद भी वह लाइसेंसी बंदूक घर में रखे था। इसके अलावा भी वह कई प्रकार की बंदूकों को कट्टे को लेकर इंटरनेट पर खोज करता रहता था। उसका मानना था कि इससे परिवार की सुरक्षा बनी रहेगी। उसने बंदूक का लाइसेंस करीब 2020 में लिया था।