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Chitrakoot News: मंदाकिनी में 15 लाख ने किया पुण्य स्नान
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फोटो 11 सीकेटीपी 11 रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
फोटो 11 सीकेटीपी 11 रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
फोटो 11 सीकेटीपी 12 भगवान कामतानाथ के दर्शन के लिए कतारों में लगे श्रद्धालु। संवाद
फोटो 11 सीकेटीपी 13 भगवान कामतानाथ के दर्शन के लिए कतारों में श्रद्धालुओं का हुजूम। संवाद
फोटो 11 सीकेटीपी 15 भगवान कामतानाथ के दर्शन करते श्रद्धालु। संवाद
भाद्र अमावस्या पर उमड़ा जनसैलाब, किए दर्शन-पूजन, कामदगिरि की परिक्रमा कर मांगी खुशहाली
घाटों और परिक्रमा मार्ग पर कीचड़ व फिसलन भी नहीं डिगा सकी श्रद्धालुओं का हौसला
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट /खोही। भाद्र मास की अमावस्या पर शुक्रवार को धर्मनगरी चित्रकूट आस्था के रंग में रंग गई। भोर पहर तीन बजे से ही मंदाकिनी के रामघाट, राघव प्रयाग, जानकीकुंड और स्फटिक शिला घाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पुरोहितों के अनुसार करीब 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पितरों की मोक्ष की कामना से मंदाकिनी में डुबकी लगाई।
उन्होंने सूर्य को अर्घ्य दिया और तर्पण कर पुरोहितों को दान-दक्षिणा भी दी। स्नान-दान के बाद भक्तों ने मतगजेंद्रनाथ, कामतानाथ, हनुमान धारा और सती अनुसुइया मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने जय श्रीराम के जयकारों के साथ कामदगिरि पर्वत की पांच किलोमीटर की परिक्रमा की। श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की। अमावस्या से एक दिन पहले गुरुवार शाम हल्की बारिश हुई थी।
बारिश से घाटों और परिक्रमा मार्ग पर कीचड़ व फिसलन बनी रही, पर श्रद्धालुओं का हौसला नहीं डिगा। भदई अमावस्या का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन स्नान-दान से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। बांदा, नरैनी, महोबा, झांसी सहित कई जिलों से श्रद्धालु 2-3 दिन पहले ही पैदल चलकर पहुंचते हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिसमें पुलिस, पीएसी और जल पुलिस तैनात रही।
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फोटो 11 सीकेटीपी 16 कामदगिरि पर्वत पर चढ़ते श्रद्धालु व अन्य। संवाद
प्रतिबंध के बावजूद कामदगिरि पर्वत पर चढ़ाई जारी
चित्रकूट। सुप्रीम कोर्ट और प्रशासन के प्रतिबंध के बावजूद कामदगिरि पर्वत पर लोगों का चढ़ना जारी है। आस्था की आड़ में श्रद्धालु जोखिम उठा रहे हैं। बारिश के कारण पर्वत का धरातल कमजोर हो गया है। जगह-जगह भू-स्खलन की आशंका बनी हुई है। पत्थरों के खिसकने से कभी भी अनहोनी हो सकती है। वन विभाग और नगर निकाय की अनदेखी के चलते रोक प्रभावी नहीं हो पा रही है। परिक्रमा मार्ग में न तो सुरक्षा कर्मी तैनात हैं और न ही बैरिकेडिंग की व्यवस्था है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्ती बरतने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। (संवाद)
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फोटो 11 सीकेटीपी 12 भगवान कामतानाथ के दर्शन के लिए कतारों में लगे श्रद्धालु। संवाद
फोटो 11 सीकेटीपी 13 भगवान कामतानाथ के दर्शन के लिए कतारों में श्रद्धालुओं का हुजूम। संवाद
फोटो 11 सीकेटीपी 15 भगवान कामतानाथ के दर्शन करते श्रद्धालु। संवाद
भाद्र अमावस्या पर उमड़ा जनसैलाब, किए दर्शन-पूजन, कामदगिरि की परिक्रमा कर मांगी खुशहाली
घाटों और परिक्रमा मार्ग पर कीचड़ व फिसलन भी नहीं डिगा सकी श्रद्धालुओं का हौसला
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट /खोही। भाद्र मास की अमावस्या पर शुक्रवार को धर्मनगरी चित्रकूट आस्था के रंग में रंग गई। भोर पहर तीन बजे से ही मंदाकिनी के रामघाट, राघव प्रयाग, जानकीकुंड और स्फटिक शिला घाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पुरोहितों के अनुसार करीब 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पितरों की मोक्ष की कामना से मंदाकिनी में डुबकी लगाई।
उन्होंने सूर्य को अर्घ्य दिया और तर्पण कर पुरोहितों को दान-दक्षिणा भी दी। स्नान-दान के बाद भक्तों ने मतगजेंद्रनाथ, कामतानाथ, हनुमान धारा और सती अनुसुइया मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने जय श्रीराम के जयकारों के साथ कामदगिरि पर्वत की पांच किलोमीटर की परिक्रमा की। श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की। अमावस्या से एक दिन पहले गुरुवार शाम हल्की बारिश हुई थी।
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बारिश से घाटों और परिक्रमा मार्ग पर कीचड़ व फिसलन बनी रही, पर श्रद्धालुओं का हौसला नहीं डिगा। भदई अमावस्या का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन स्नान-दान से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। बांदा, नरैनी, महोबा, झांसी सहित कई जिलों से श्रद्धालु 2-3 दिन पहले ही पैदल चलकर पहुंचते हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिसमें पुलिस, पीएसी और जल पुलिस तैनात रही।
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फोटो 11 सीकेटीपी 16 कामदगिरि पर्वत पर चढ़ते श्रद्धालु व अन्य। संवाद
प्रतिबंध के बावजूद कामदगिरि पर्वत पर चढ़ाई जारी
चित्रकूट। सुप्रीम कोर्ट और प्रशासन के प्रतिबंध के बावजूद कामदगिरि पर्वत पर लोगों का चढ़ना जारी है। आस्था की आड़ में श्रद्धालु जोखिम उठा रहे हैं। बारिश के कारण पर्वत का धरातल कमजोर हो गया है। जगह-जगह भू-स्खलन की आशंका बनी हुई है। पत्थरों के खिसकने से कभी भी अनहोनी हो सकती है। वन विभाग और नगर निकाय की अनदेखी के चलते रोक प्रभावी नहीं हो पा रही है। परिक्रमा मार्ग में न तो सुरक्षा कर्मी तैनात हैं और न ही बैरिकेडिंग की व्यवस्था है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्ती बरतने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। (संवाद)

फोटो 11 सीकेटीपी 11 रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद

फोटो 11 सीकेटीपी 11 रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद

फोटो 11 सीकेटीपी 11 रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद