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निष्ठा-लगन से विज्ञान की नई ऊंचाइयां छुएं छात्र : कुलपति
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ग्रामोदय विवि में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के शुभारंभ पर सरस्वती वंदना प्रस्तुत करतीं छात?
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर ‘सतत भविष्य के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का समेकित दृष्टिकोण’ विषय पर छात्रों व शिक्षकों ने अपनी राय रखी। कुलपति प्रो. भरत मिश्र ने कहा कि हमें विज्ञान की नई ऊंचाइयां छूने के लिए अति लगन एवं निष्ठा से कार्य करना होगा। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में नारी शक्ति की सहभागिता का भी आह्वान किया।
प्रो. एपी मिश्रा ने सर सीवी रमन पर व्याख्यान प्रस्तुत कर बताया कि विज्ञान की नई ऊंचाइयों को पाने में सीमित भौतिक संसाधन बाधक नहीं होते यदि हममें जज्बा जबरदस्त हो। सर रमन ने बहुत ही सीमित संसाधनों में रमन प्रभाव की खोज की। जिसके लिए उन्हें सन् 1930 में विश्व के सर्वोच्च पुरस्कार नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
डा. अरविंद गुप्ता ने बताया कि डा. स्वामीनाथन के पिता सर्जन थे एवं अपने पुत्र को चिकित्सा के क्षेत्र में ले जाना चाहते थे पर भारत में खाद्यान्न की कमी और भुखमरी को लेकर उन्होंने कृषि का क्षेत्र चुना। वर्ष 1966 में उन्होंने देश में हरित क्रांति की शुरुआत की।
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डा. रविंद्र सिंह व डा. वंदना पाठक ने देश के विभिन्न वैज्ञानिकों के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए। फिर निबंध लेखन, वाद विवाद, रंगोली व ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया. जिसमें छात्रों ने प्रतिभाग किया। अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं में भागीदारी करने वाले छात्रों को पुरस्कार बांटे गए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. घनश्याम गुप्ता व आभार प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने जताया।
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प्रो. एपी मिश्रा ने सर सीवी रमन पर व्याख्यान प्रस्तुत कर बताया कि विज्ञान की नई ऊंचाइयों को पाने में सीमित भौतिक संसाधन बाधक नहीं होते यदि हममें जज्बा जबरदस्त हो। सर रमन ने बहुत ही सीमित संसाधनों में रमन प्रभाव की खोज की। जिसके लिए उन्हें सन् 1930 में विश्व के सर्वोच्च पुरस्कार नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
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डा. अरविंद गुप्ता ने बताया कि डा. स्वामीनाथन के पिता सर्जन थे एवं अपने पुत्र को चिकित्सा के क्षेत्र में ले जाना चाहते थे पर भारत में खाद्यान्न की कमी और भुखमरी को लेकर उन्होंने कृषि का क्षेत्र चुना। वर्ष 1966 में उन्होंने देश में हरित क्रांति की शुरुआत की।
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