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कांशीराम कॉलोनी : सात साल में जल निगम और विद्युत को छह रिमांइडर, नतीजा शून्य
Sat, 25 Apr 2026 11:38 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:38 PM IST
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फोटो-25 सीकेटीपी 02- जर्जर कांशीराम कॉलोनी व परिसर में उगी खरपतवार। संवाद
मानिकपुर। चित्रकूट की कांशीराम कॉलोनी में 22 करोड़ रुपये की लागत से बने आवास मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जर्जर हो रहे हैं। इन आवासों में सात साल से पेयजल और बिजली की आपूर्ति नहीं हो पाई है। हालांकि अधूरी बुनियादी सुविधाओं के लिए जल निगम और विद्युत विभाग को इस अवधि में छह रिमाइंडर भेजे गए मगर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इस कारण कॉलोनी को हैंडओवर करने की प्रक्रिया भी अटकी हुई है।
गरीबों को सरकारी छत देने के लिए नगर पंचायत मानिकपुर में यह कॉलोनी बनाई गई थी। 22 करोड़ रुपये से इस कॉलोनी में आवास तैयार किए गए लेकिन इन आवासों में जल निगम और विद्युत विभाग द्वारा पेयजल व बिजली की व्यवस्था नहीं की गई। जलापूर्ति के लिए जल निगम को चार साल में छह बार और विद्युत विभाग को सात साल में सात बार पत्र भेजे गए।
इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भी पत्र भेजा गया लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया। कॉलोनी परिसर में खरपतवार उग आए हैं और अंदर जंगल जैसा माहौल है। आवासों में लगे दरवाजे और खिड़कियां भी गायब हो गए हैं।
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इस लापरवाही के कारण शहरी गरीबों को पक्की छत का लाभ तो नहीं मिला लेकिन इन आवासों की हालत जरूर बद से बदतर हो गई है। बिना मरम्मत के इन आवासों में रहना संभव नहीं है। स्थानीय निवासी सुंदर यादव ने बताया कि कॉलोनी बनने के बाद से पेयजल और बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यहां रहना नामुमकिन है। सुमित सिंह ने कहा कि देखरेख के अभाव में आवास जर्जर हो गए हैं और अंदर जाने में डर लगता है।
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गरीबों को सरकारी छत देने के लिए नगर पंचायत मानिकपुर में यह कॉलोनी बनाई गई थी। 22 करोड़ रुपये से इस कॉलोनी में आवास तैयार किए गए लेकिन इन आवासों में जल निगम और विद्युत विभाग द्वारा पेयजल व बिजली की व्यवस्था नहीं की गई। जलापूर्ति के लिए जल निगम को चार साल में छह बार और विद्युत विभाग को सात साल में सात बार पत्र भेजे गए।
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इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भी पत्र भेजा गया लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया। कॉलोनी परिसर में खरपतवार उग आए हैं और अंदर जंगल जैसा माहौल है। आवासों में लगे दरवाजे और खिड़कियां भी गायब हो गए हैं।
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इस लापरवाही के कारण शहरी गरीबों को पक्की छत का लाभ तो नहीं मिला लेकिन इन आवासों की हालत जरूर बद से बदतर हो गई है। बिना मरम्मत के इन आवासों में रहना संभव नहीं है। स्थानीय निवासी सुंदर यादव ने बताया कि कॉलोनी बनने के बाद से पेयजल और बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यहां रहना नामुमकिन है। सुमित सिंह ने कहा कि देखरेख के अभाव में आवास जर्जर हो गए हैं और अंदर जाने में डर लगता है।