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Chitrakoot News: राजाघाट निर्माण में अनियमितता, मरम्मत के नाम पर सिमट गई मंदाकिनी की धारा
Fri, 17 Oct 2025 12:38 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 17 Oct 2025 12:38 AM IST
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12 सीकेटीपी-10- परिचय- शहर के राजा घाट पर गंदगी। संवाद
चित्रकूट। आस्था की अविरल धारा और पवित्र मंदाकिनी की गोद में स्थित राजाघाट, जहां श्रद्धालु स्नान कर पुण्य संचय करते हैं। अब वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गया है। नगर पालिका परिषद ने मरम्मत और जीर्णोद्धार के नाम पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सिंचाई विभाग की अनुमति के बिना 86 लाख रुपये का टेंडर जारी कर घाट निर्माण शुरू करा दिया। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि मरम्मत के नाम पर अवैध नया निर्माण किया गया। जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो गया।
पूर्व सभासद सुशील श्रीवास्तव की शिकायत पर मामला प्रकाश में आया। आईजीआरएस से दर्ज की गई इस शिकायत ने नगर पालिका के झूठे दावों की हकीकत उजागर कर दी। सिंचाई विभाग, प्रखंड प्रथम कर्वी के अधिशासी अभियंता ने राजाघाट का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामने आया कि जहां नगर पालिका अपने पत्रों में मरम्मत कार्य का हवाला दे रही थी, वहीं घाट पर जेसीबी से मिट्टी की खुदाई और नया निर्माण पूरे जोर-शोर से चल रहा था।
विभागीय आख्या में दर्ज है कि मंदाकिनी नदी के फ्लड प्लेन जोन में किसी भी प्रकार का नया निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके लिए सिंचाई विभाग और एनजीटी से पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है, लेकिन नगर पालिका ने नियमों को दरकिनार कर सीधे निर्माण प्रारंभ कर दिया। विभागीय निरीक्षण के बाद कार्य रोकने के निर्देश दिए गए, पर निर्माण स्थल और नदी के बीच डाली गई मिट्टी और बोरी के ढेरों के कारण मंदाकिनी की धारा सिमट गई है। जिससे नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण के दौरान निकले प्राकृतिक जलस्रोत को बंद कर उसके ऊपर सीढ़ियां डाल दी गईं। इससे घाट क्षेत्र में जलभराव और सीपेज की समस्या बढ़ गई है। श्रद्धालुओं ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन बताया है।
नगर पालिका का पत्र, जिसमें केवल मरम्मत और जीर्णोद्धार का उल्लेख था, विभाग ने भ्रामक दस्तावेज बताया है। निरीक्षण और तस्वीरों से यह स्पष्ट हो गया कि मरम्मत का दावा केवल एक आड़ थी। जिसके भीतर बिना अनुमति अवैध निर्माण का खेल चल रहा था।
अब जनता के बीच सवाल गूंज रहा है कि कुछ सीढ़ियों और दीवारों की मरम्मत के नाम पर 86 लाख रुपये आखिर किसकी जेब में गए। विभागीय रिपोर्ट ने नगर पालिका के दावों की जड़ हिला दी है और पूरे मामले को एक बड़े घोटाले का रूप दे दिया है। श्रद्धालुओं की आस्था और करदाताओं के धन की लूट का यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
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पूर्व सभासद सुशील श्रीवास्तव की शिकायत पर मामला प्रकाश में आया। आईजीआरएस से दर्ज की गई इस शिकायत ने नगर पालिका के झूठे दावों की हकीकत उजागर कर दी। सिंचाई विभाग, प्रखंड प्रथम कर्वी के अधिशासी अभियंता ने राजाघाट का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामने आया कि जहां नगर पालिका अपने पत्रों में मरम्मत कार्य का हवाला दे रही थी, वहीं घाट पर जेसीबी से मिट्टी की खुदाई और नया निर्माण पूरे जोर-शोर से चल रहा था।
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विभागीय आख्या में दर्ज है कि मंदाकिनी नदी के फ्लड प्लेन जोन में किसी भी प्रकार का नया निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके लिए सिंचाई विभाग और एनजीटी से पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है, लेकिन नगर पालिका ने नियमों को दरकिनार कर सीधे निर्माण प्रारंभ कर दिया। विभागीय निरीक्षण के बाद कार्य रोकने के निर्देश दिए गए, पर निर्माण स्थल और नदी के बीच डाली गई मिट्टी और बोरी के ढेरों के कारण मंदाकिनी की धारा सिमट गई है। जिससे नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण के दौरान निकले प्राकृतिक जलस्रोत को बंद कर उसके ऊपर सीढ़ियां डाल दी गईं। इससे घाट क्षेत्र में जलभराव और सीपेज की समस्या बढ़ गई है। श्रद्धालुओं ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन बताया है।
नगर पालिका का पत्र, जिसमें केवल मरम्मत और जीर्णोद्धार का उल्लेख था, विभाग ने भ्रामक दस्तावेज बताया है। निरीक्षण और तस्वीरों से यह स्पष्ट हो गया कि मरम्मत का दावा केवल एक आड़ थी। जिसके भीतर बिना अनुमति अवैध निर्माण का खेल चल रहा था।
अब जनता के बीच सवाल गूंज रहा है कि कुछ सीढ़ियों और दीवारों की मरम्मत के नाम पर 86 लाख रुपये आखिर किसकी जेब में गए। विभागीय रिपोर्ट ने नगर पालिका के दावों की जड़ हिला दी है और पूरे मामले को एक बड़े घोटाले का रूप दे दिया है। श्रद्धालुओं की आस्था और करदाताओं के धन की लूट का यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

12 सीकेटीपी-10- परिचय- शहर के राजा घाट पर गंदगी। संवाद