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Chitrakoot News: 233 नाविक परिवारों को रोजी-रोटी पर संकट
Wed, 16 Sep 2026 12:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 16 Sep 2026 12:01 AM IST
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सीकेटीपी-10-होरीलाल निषाद। संवाद
चित्रकूट। जिस मंदाकिनी की लहरों पर नाव चलाकर नाविक श्रद्धालुओं को चित्रकूट के घाटों और मंदिरों तक पहुंचाते हैं, आज उसी नदी की बाढ़ ने उनकी जिंदगी की नाव रोक दी है।
24 अगस्त से जलस्तर बढ़ने के बाद रामघाट पर नावों का संचालन बंद है। करीब 20 दिन से कमाई ठप होने से 233 नाविक परिवारों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ में 35 से अधिक नावें तेज धारा में बहकर नष्ट हो गईं, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा तक नहीं मिला है।
रामघाट नाविक संघ के मुताबिक चित्रकूट में यूपी के 96 और मध्य प्रदेश के 137 नाविक पंजीकृत हैं। दोनों राज्यों की सीमा से जुड़ा होने के कारण नाविकों को राहत और मुआवजे के लिए भी अलग-अलग व्यवस्थाओं के बीच भटकना पड़ रहा है। बाढ़ से हुए नुकसान के बाद भी अभी तक न यूपी सरकार से मुआवजा मिला और न एमपी से।
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बाढ़ के दौरान नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यूपी और एमपी के 400 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। मंदाकिनी में 29 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में रामघाट के कई नाविकों की नावें बह गईं। नावें नष्ट होने और नदी में नौका संचालन बंद होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
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बोले नाविक-कोई सहायता नहीं मिली
बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया। कमाई का साधन पूरी तरह बंद है। उधार लेकर परिवार का भरण-पोषण करना पड़ रहा है। अभी तक कोई सहायता नहीं मिली।- होरी लाल निषाद।
29 अगस्त की बाढ़ में नाव बह गई। नाव को बचाने के प्रयास में खुद भी तेज धारा में कुछ दूर तक बह गए। किसी तरह जान बची। अब नाव के साथ परिवार की रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।- श्रवण कुमार।
बाढ़ के दौरान नाविकों ने घरों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कई लोगों की जान बचाई लेकिन अब नाविक परिवारों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। किसी तरह घर का खर्च चल रहा है।- मिथुन।
अधिकारियों को नाव की सवारी नहीं कराएंगे
रामघाट नाविक संघ के अध्यक्ष राम नारायण निषाद ने कहा कि बाढ़ के दौरान नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद की। इसके बाद भी नाविकों के परिवारों को राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि जल्द ही नावों पर बोर्ड लगाकर विरोध जताया जाएगा। प्रोटोकॉल के तहत आने वाले अधिकारियों को नाव की सवारी नहीं कराई जाएगी।
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वर्जन
बाढ़ के दौरान और उसके बाद भी पीड़ितों को भोजन और राहत किट वितरित की गई है। शासनादेश के अनुसार निरंतर मदद पहुंचाई जा रही है। पालिका में जिन नाविकों का पंजीयन है, उन्हें नियमों के अनुसार मानव श्रम से संबंधित लाभ दिया जाएगा। - अजय यादव, एसडीएम।
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24 अगस्त से जलस्तर बढ़ने के बाद रामघाट पर नावों का संचालन बंद है। करीब 20 दिन से कमाई ठप होने से 233 नाविक परिवारों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ में 35 से अधिक नावें तेज धारा में बहकर नष्ट हो गईं, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा तक नहीं मिला है।
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रामघाट नाविक संघ के मुताबिक चित्रकूट में यूपी के 96 और मध्य प्रदेश के 137 नाविक पंजीकृत हैं। दोनों राज्यों की सीमा से जुड़ा होने के कारण नाविकों को राहत और मुआवजे के लिए भी अलग-अलग व्यवस्थाओं के बीच भटकना पड़ रहा है। बाढ़ से हुए नुकसान के बाद भी अभी तक न यूपी सरकार से मुआवजा मिला और न एमपी से।
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बाढ़ के दौरान नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यूपी और एमपी के 400 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। मंदाकिनी में 29 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में रामघाट के कई नाविकों की नावें बह गईं। नावें नष्ट होने और नदी में नौका संचालन बंद होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
बोले नाविक-कोई सहायता नहीं मिली
बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया। कमाई का साधन पूरी तरह बंद है। उधार लेकर परिवार का भरण-पोषण करना पड़ रहा है। अभी तक कोई सहायता नहीं मिली।- होरी लाल निषाद।
29 अगस्त की बाढ़ में नाव बह गई। नाव को बचाने के प्रयास में खुद भी तेज धारा में कुछ दूर तक बह गए। किसी तरह जान बची। अब नाव के साथ परिवार की रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।- श्रवण कुमार।
बाढ़ के दौरान नाविकों ने घरों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कई लोगों की जान बचाई लेकिन अब नाविक परिवारों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। किसी तरह घर का खर्च चल रहा है।- मिथुन।
अधिकारियों को नाव की सवारी नहीं कराएंगे
रामघाट नाविक संघ के अध्यक्ष राम नारायण निषाद ने कहा कि बाढ़ के दौरान नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद की। इसके बाद भी नाविकों के परिवारों को राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि जल्द ही नावों पर बोर्ड लगाकर विरोध जताया जाएगा। प्रोटोकॉल के तहत आने वाले अधिकारियों को नाव की सवारी नहीं कराई जाएगी।
वर्जन
बाढ़ के दौरान और उसके बाद भी पीड़ितों को भोजन और राहत किट वितरित की गई है। शासनादेश के अनुसार निरंतर मदद पहुंचाई जा रही है। पालिका में जिन नाविकों का पंजीयन है, उन्हें नियमों के अनुसार मानव श्रम से संबंधित लाभ दिया जाएगा। - अजय यादव, एसडीएम।

सीकेटीपी-10-होरीलाल निषाद। संवाद

सीकेटीपी-10-होरीलाल निषाद। संवाद

सीकेटीपी-10-होरीलाल निषाद। संवाद

सीकेटीपी-10-होरीलाल निषाद। संवाद