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तमंचा लेकर युवक करता था रखवाली
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तमंचा लेकर युवक करता था रखवाली
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। निर्दयी हत्यारोपी लाखों कमाने के चक्कर में हर दिन मानवता को तार-तार करते थे और दोनों मासूम उफ तक भी नहीं कर पाते थे सिर्फ मौन नम आंखों से उन्हें निहारते थे। अपहृत मासूम जुड़वा श्रेयांश और प्रियांश को हत्यारोपी नींद की दवा देते थे। ताकि बच्चों को बेहोशी की हालत में रहे शोर न मचा पाए। फिरौती मिलने के बाद जब बच्चों ने दो को पहचानने की बात कही थी तो 21 जनवरी को ही उन्होंने बच्चों को गला दबाकर मार दिया और शव नदी में फेंक दिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों बच्चों की मौत गला दबाने से होने की पुष्टि हुई है।
रींवा आईजी चंचल शेखर ने बताया कि पूछतांछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि हत्यारोपी प्रतिदिन बच्चों को जूस व दूध पिलाने के बाद नींद की दवा दी जाती थी। एक युवक बच्चों के पास ही रहता था। उसके पास एक पिस्टल व तीन या चार जिंदा कारतूस रखे जाते थे। योजना यह थी कि यदि पुलिस उस स्थान को घेरे तो वह बच्चों को गोली मारकर खुद भाग जाता। जिससे बचे अन्य युवकों के नाम सामने न आ पाए। इसीलिए जहां-जहां भी बच्चों को रखा गया वहां इसका जरूर ध्यान रखा गया कि पीछे या छत के रास्ते से भी भागने का इंतजाम हो।
मामा भांजे के हाईटेक छात्रों की साजिश
चित्रकूट। अपहरण और हत्या में शामिल आरोपी अपूर्व उर्फ पिंटा यादव जो ग्रामोदय विश्वविद्यालय मेें एमएसी कृषि द्वितीय सेमेस्टर का छात्र था। सतना एसपी संतोष गौर ने बताया कि वह दर्द निवारक तेल उद्यमी बृजेश रावत से लाल तेल लेकर फुटकर व्यापार भी किया करता था। जबकि इसी पिंटा का मामा रामकेश यादव प्रियांश व श्रेयांश को ट्यूशन पढ़ाया करता था। इनके साथी बीटेक के साथी अक्सर जब एक साथ बैठते तो मोटी रकम में हाथ साफ करने की योजना बनाते थे।
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30 दिन के अंदर जांच होगी
चित्रकूट। सतना जिले के कलेक्टर सतेंद्र सिंह ने जानकीकुंड से अपहृत दो बच्चों की हत्या के मामले में 30 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। आदेश में कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया । जिन पर जांच होनी है।
इतना महंगा कमरा, बच्चों के होने की जानकारी पर चुप्पी
चित्रकूट। हत्यारोपियों ने चित्रकूट से अपहृत बच्चों को लेकर हाईवे किनारे अतर्रा में सिर्फ दो दिन बच्चों को रखा और इस कमरे को 20 हजार रुपये महीने के हिसाब से तय किया। यहां दो बच्चों के भी होने की जानकारी मकान मालिक को नहीं हुई फिर दो दिन बाद मकान खाली भी कर दिया तब भी उन्हें शक नहीं हुआ। यह बात सबके गले नहीं उतर रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। निर्दयी हत्यारोपी लाखों कमाने के चक्कर में हर दिन मानवता को तार-तार करते थे और दोनों मासूम उफ तक भी नहीं कर पाते थे सिर्फ मौन नम आंखों से उन्हें निहारते थे। अपहृत मासूम जुड़वा श्रेयांश और प्रियांश को हत्यारोपी नींद की दवा देते थे। ताकि बच्चों को बेहोशी की हालत में रहे शोर न मचा पाए। फिरौती मिलने के बाद जब बच्चों ने दो को पहचानने की बात कही थी तो 21 जनवरी को ही उन्होंने बच्चों को गला दबाकर मार दिया और शव नदी में फेंक दिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों बच्चों की मौत गला दबाने से होने की पुष्टि हुई है।
रींवा आईजी चंचल शेखर ने बताया कि पूछतांछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि हत्यारोपी प्रतिदिन बच्चों को जूस व दूध पिलाने के बाद नींद की दवा दी जाती थी। एक युवक बच्चों के पास ही रहता था। उसके पास एक पिस्टल व तीन या चार जिंदा कारतूस रखे जाते थे। योजना यह थी कि यदि पुलिस उस स्थान को घेरे तो वह बच्चों को गोली मारकर खुद भाग जाता। जिससे बचे अन्य युवकों के नाम सामने न आ पाए। इसीलिए जहां-जहां भी बच्चों को रखा गया वहां इसका जरूर ध्यान रखा गया कि पीछे या छत के रास्ते से भी भागने का इंतजाम हो।
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मामा भांजे के हाईटेक छात्रों की साजिश
चित्रकूट। अपहरण और हत्या में शामिल आरोपी अपूर्व उर्फ पिंटा यादव जो ग्रामोदय विश्वविद्यालय मेें एमएसी कृषि द्वितीय सेमेस्टर का छात्र था। सतना एसपी संतोष गौर ने बताया कि वह दर्द निवारक तेल उद्यमी बृजेश रावत से लाल तेल लेकर फुटकर व्यापार भी किया करता था। जबकि इसी पिंटा का मामा रामकेश यादव प्रियांश व श्रेयांश को ट्यूशन पढ़ाया करता था। इनके साथी बीटेक के साथी अक्सर जब एक साथ बैठते तो मोटी रकम में हाथ साफ करने की योजना बनाते थे।
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30 दिन के अंदर जांच होगी
चित्रकूट। सतना जिले के कलेक्टर सतेंद्र सिंह ने जानकीकुंड से अपहृत दो बच्चों की हत्या के मामले में 30 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। आदेश में कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया । जिन पर जांच होनी है।
इतना महंगा कमरा, बच्चों के होने की जानकारी पर चुप्पी
चित्रकूट। हत्यारोपियों ने चित्रकूट से अपहृत बच्चों को लेकर हाईवे किनारे अतर्रा में सिर्फ दो दिन बच्चों को रखा और इस कमरे को 20 हजार रुपये महीने के हिसाब से तय किया। यहां दो बच्चों के भी होने की जानकारी मकान मालिक को नहीं हुई फिर दो दिन बाद मकान खाली भी कर दिया तब भी उन्हें शक नहीं हुआ। यह बात सबके गले नहीं उतर रही है।