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चित्रकूट : प्रसन्नता और दुख से परे हैं तुलसी के राम : दीक्षित

Sun, 07 Aug 2022 12:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2022 12:57 AM IST
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Chitrakoot: Tulsi's Rama is beyond happiness and sorrow: Dixit
चित्रकूट। संस्कृति विभाग की जनजातीय लोककला एवं बोली विकास अकादमी के अंतर्गत रामचरित मानस पाठ और भक्ति संगीत का कार्यक्रम हुआ। उपम पटेल समूह सीधी ने रामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों पर तैयार किए गए लोक गीतों को अपनी शैली में प्रस्तुत किया।
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नयागांव चित्रकूट में स्थित तुलसी भवन तुलसी शोध संस्थान के सभागार में तुलसी के राम विषय पर केंद्रित व्याख्यान हुआ। साहित्यकार व सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि तुलसी के राम हमें तीन प्रभागों में विभक्त दिखाई देते हैं। प्रथम जनतारक, द्वितीय सुख व दुख से परे और तीसरे स्वरूप में मर्यादा पुरुषोत्तम। राज्याभिषेक के लिए मंगल प्रस्थान करते समय मार्ग में ही वनवास की सूचना मिलने पर वह सहज भाव व्यक्त करते हैं।
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जैसे कुछ खोने का न कोई दुख है और ना ही दुखों के प्रतीक वनवास से कोई विचलन। लखनऊ से आए प्रो. पवन अग्रवाल ने कहा कि राम आम जन के साथ-साथ जनजातीय समुदाय को अधिक करीब से देखने और उनके उद्धार के लिए सदैव तत्पर प्रतीत होते हैं। इसके बाद भक्ति गायन संध्या के रूप में मराठी में रचित गीत रामायण की संगीतमय प्रस्तुति प्रसिद्ध गायक अमृता-अभय माणके इंदौर ने प्रस्तुत किए।
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