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ईश्वरीय गुणों को स्थापित करने के लिए महर्षि ने लिखी रामायण

Wed, 12 Jan 2022 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 11:57 PM IST
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फोटो- 6- कथा सुनाते जगदगुरु रामभद्राचार्य। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। तुलसी पीठ के मानस हाल में वाल्मीकि रामायण पर आधारित रामकथा का शुभारंभ हुआ। जिसमें पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शास्त्रीय शैली में श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान कराया।
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अधिवक्ता लालजी केवला प्रसाद त्रिपाठी की यजमानी में बुधवार को शुरू हुई रामकथा के प्रथम दिन जगद्गुरु ने रामायण के सभी संभावित अर्थों को बताया। महर्षि वाल्मीकि के श्लोकों के माध्यम से जगद्गुरु ने सिद्ध किया कि महर्षि वाल्मीकि ने कथा का प्रारंभ ही भगवान श्रीराम के स्वरूप के लिए किया है।
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उन्होंने बताया कि ईश्वर के गुण, ऐश्वर्य, समग्रता, धर्म, यश, कीर्ति, ज्ञान, वैराग्य को स्थापित करने के लिए ही महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में छह कांडों का निर्माण किया। आचार्य रामचंद्र दास ने बताया कि 14 जनवरी से कथा का सीधा प्रसारण संस्कार टीवी पर प्रात: 10 बजे से किया जाएगा। आचार्य हिमांशु त्रिपाठी, मदनमोहन, आञ्जनेय, विनय, गोविंद, पूर्णेंदु व एसपी मिश्रा आदि का सहयोग रहा।
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