{"_id":"5c0c0676bdec224192170677","slug":"awareness-about-creating-awareness-about-science","type":"story","status":"publish","title_hn":"विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने में जुटा नासी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने में जुटा नासी
विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने में जुटा नासी
Updated Sat, 08 Dec 2018 11:29 PM IST
विज्ञापन
Gramodaya University
- फोटो : Amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी में पद्म विभूषित वैज्ञानिक नासी के प्रमुख प्रो. अनिल कोड़कर ने समापन अवसर पर कहा संयुक्त चित्रकूट के 50 किलोमीटर की परिधि में आने वाले हाईस्कूल एवं इंटर के छात्रों ने जो विश्वस्तर के वैज्ञानिकों से सीखा है उसका सकारात्मक प्रयोग कर जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे। अंतिम दिन भौतकीय विज्ञान से संबंधित शोध पत्रों का वाचन, व्याख्यान माला एवं पोस्टर प्रस्तुतियां की गयीं।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय परिसर में चल रही वैज्ञानिकों की राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सांस्कृतिक व बुंदेलखंडी संस्कृति से ओतप्रोत गीत संगीत के साथ हुआ। देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के बीच चिल्ड्रन साइंस मीट का आयोजन हुआ। जिसमें क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की। नासी के अध्यक्ष प्रो. कोड़कर ने बताया कि अनुभवी प्राध्यापकों, युवा अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों को एक मंच में एकत्रित कर विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने का सफ लतम और अभिनव प्रयास नासी कर रहा है। नासी की पूर्व सचिव प्रो. मंजू शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी और वार्षिक अधिवेशन के निर्णयों को संकलित कर सरकार को कार्ययोजना के साथ प्रेषित किया जायेगा। इस दौरान नासी रिलाइंस अवार्ड से आईआईएससी बंगलौर के प्रो. कांता भट्ट, आईआईटी मुंबई के प्रो. रोहित श्रीवास्तव, बीएचयू वनारस के प्रो. प्राले मैथी ने भौतिकीय विज्ञान पर प्रकाश डाला। इसी प्रकार जैविकीय विज्ञान को लेकर थंाजौर के डॉ. सी आनंद, मानेश्वर के प्रो. नंदनीय चटर्जी व कोलकाता के डॉ. पुलक कुमार मुखर्जी अपने विचार प्रस्तुत किये। मानेश्वर ग्लोबल यूनिवर्सिटी भोपाल के कुलपति प्रो. अरूण कुमार पांडेय ने हिमालय में पाई जाने वाले वनस्पतियों की जैव विविधता पर प्रकाश डाला। रीवा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सत्यदेव ने गणितीय विज्ञान में प्रामणिकता की भूमिका पर विचार रखे।
समापन सत्र पर सद्गुरू सेवा संघ ट्रस्ट की ओर से डांडिया नृत्य नर्सिंग की छात्राओं द्वारा आकर्षक प्रस्तुति की गई। जगतगुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने संगीत व यौगिक प्रस्तुति की। सांस्कृतिक कार्यक्त्रस्म की अद्भुत प्रस्तुति बुंदेलखंड का प्रसिद्ध दीवारी लोक नृत्य 25 सदस्यों के दल के साथ बकेश पाल के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन में शािमल वैज्ञानिक व छात्रों का विवि के कुलपति प्रो.नरेश चंद्र गौतम ने आभार जताया।
चित्रकूट। राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी में पद्म विभूषित वैज्ञानिक नासी के प्रमुख प्रो. अनिल कोड़कर ने समापन अवसर पर कहा संयुक्त चित्रकूट के 50 किलोमीटर की परिधि में आने वाले हाईस्कूल एवं इंटर के छात्रों ने जो विश्वस्तर के वैज्ञानिकों से सीखा है उसका सकारात्मक प्रयोग कर जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे। अंतिम दिन भौतकीय विज्ञान से संबंधित शोध पत्रों का वाचन, व्याख्यान माला एवं पोस्टर प्रस्तुतियां की गयीं।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय परिसर में चल रही वैज्ञानिकों की राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सांस्कृतिक व बुंदेलखंडी संस्कृति से ओतप्रोत गीत संगीत के साथ हुआ। देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के बीच चिल्ड्रन साइंस मीट का आयोजन हुआ। जिसमें क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की। नासी के अध्यक्ष प्रो. कोड़कर ने बताया कि अनुभवी प्राध्यापकों, युवा अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों को एक मंच में एकत्रित कर विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने का सफ लतम और अभिनव प्रयास नासी कर रहा है। नासी की पूर्व सचिव प्रो. मंजू शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी और वार्षिक अधिवेशन के निर्णयों को संकलित कर सरकार को कार्ययोजना के साथ प्रेषित किया जायेगा। इस दौरान नासी रिलाइंस अवार्ड से आईआईएससी बंगलौर के प्रो. कांता भट्ट, आईआईटी मुंबई के प्रो. रोहित श्रीवास्तव, बीएचयू वनारस के प्रो. प्राले मैथी ने भौतिकीय विज्ञान पर प्रकाश डाला। इसी प्रकार जैविकीय विज्ञान को लेकर थंाजौर के डॉ. सी आनंद, मानेश्वर के प्रो. नंदनीय चटर्जी व कोलकाता के डॉ. पुलक कुमार मुखर्जी अपने विचार प्रस्तुत किये। मानेश्वर ग्लोबल यूनिवर्सिटी भोपाल के कुलपति प्रो. अरूण कुमार पांडेय ने हिमालय में पाई जाने वाले वनस्पतियों की जैव विविधता पर प्रकाश डाला। रीवा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सत्यदेव ने गणितीय विज्ञान में प्रामणिकता की भूमिका पर विचार रखे।
विज्ञापन
समापन सत्र पर सद्गुरू सेवा संघ ट्रस्ट की ओर से डांडिया नृत्य नर्सिंग की छात्राओं द्वारा आकर्षक प्रस्तुति की गई। जगतगुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने संगीत व यौगिक प्रस्तुति की। सांस्कृतिक कार्यक्त्रस्म की अद्भुत प्रस्तुति बुंदेलखंड का प्रसिद्ध दीवारी लोक नृत्य 25 सदस्यों के दल के साथ बकेश पाल के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन में शािमल वैज्ञानिक व छात्रों का विवि के कुलपति प्रो.नरेश चंद्र गौतम ने आभार जताया।
विज्ञापन