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अंबे तू जगदंबे काली, जय दुर्गे खप्परवाली...
चित्रकूट
Updated Tue, 26 Sep 2017 10:34 PM IST
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मुख्यालय के इलाहाबाद रोड पर स्थापित मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा
- फोटो : amarujala
चित्रकूट। नवरात्र में छठवें दिन मां दुर्गा के रूप कात्यायनी की पूजा अर्चना के लिए भक्त उमड़ पडे़। देवी पंडालों में देर राततक भक्तगण मां के दर्शन के लिए पूजा अर्चना करते रहे। घंटा घड़ियालों से शहर गूंज उठा। मंदिरों में कन्या भोज आयोजन किया गया।
बुधवार को शहर, कस्बों, गांव में सजे देवी पंडालों में देवी गीत गूंजते रहे। घरों में कन्या भोज का कार्यक्रम चला। देवी पंडालों को सजाने की होड़ शुरू है। जिसमें बिजली की भव्य सजावट कई पंडालों में की गई है।
सहज भाव से माता के मिलते दर्शन
चित्रकूट। संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि माता अंबे के छठवे स्वरूप माता कायात्यनी महार्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से इच्छा अनुसार उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई है थीं। महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा सबसे पहले की थी। इस लिए इनका नाम कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र मेें स्थित रहता है। इस लिए देवी के दर्शन सहजभाव से प्राप्त होते हैं।
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बुधवार को शहर, कस्बों, गांव में सजे देवी पंडालों में देवी गीत गूंजते रहे। घरों में कन्या भोज का कार्यक्रम चला। देवी पंडालों को सजाने की होड़ शुरू है। जिसमें बिजली की भव्य सजावट कई पंडालों में की गई है।
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सहज भाव से माता के मिलते दर्शन
चित्रकूट। संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि माता अंबे के छठवे स्वरूप माता कायात्यनी महार्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से इच्छा अनुसार उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई है थीं। महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा सबसे पहले की थी। इस लिए इनका नाम कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र मेें स्थित रहता है। इस लिए देवी के दर्शन सहजभाव से प्राप्त होते हैं।
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